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लापरवाहीः 17 कॉलेजों में हैं मात्र 65 शिक्षक, टीचर्स की संख्या बढ़ाने की बजाय बढ़ा दी छात्रों की सीटें

अब दो शिफ्टों में होगी पढ़ाई

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Ranchi: सिर्फ 65 शिक्षकों के भरोसे राज्य के 17 सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज संचालित किये जा रहे हैं. अब सीटों की संख्या भी बढ़ा दी गयी है और इन्हीं मात्र 65 शिक्षकों के भरोसे दो शिफ्टों में इनकी पढ़ाई करायी जाएगी. राज्य सरकार के उच्च शिक्षा एंव कौशल विकास विभाग ने मंजूरी दे दी है.

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सरकार ने पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी से अवगत होने के बावजूद बिना शिक्षकों की नियुक्ति किये ही सीटों की संख्या बढ़ा दी है.

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आने वाले एक-दो साल में सीटों की संख्या दोगुनी भी हो जाएगी. अभी राज्य के सभी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 31 हजार 569 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और प्रति शिक्षक छात्रों का अनुपात एक शिक्षक पर 485 छात्र हैं.

पॉलिटेक्निक कॉलेजों में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा के परिणाम आ चुके हैं. नामांकन के लिए काउंसिलिंग में वर्तमान में सीटों के हिसाब से सेकेंड शिफ्ट में एडमिशन लिया जायेगा.

उसी आधार पर छात्रों को बताया जाएगा की, उनका एडमिशन किस शिफ्ट के लिए हुआ है. अभी राज्य के चुनिंदा कॉलेजों में दो शिफ्टों में पढ़ाई करायी जाएगी.

संसाधनों के परिपूर्ण होने पर अगले साल राज्य के अन्य कॉलेजों में दोनों शिफ्टों में ये व्यवस्था चालू करायी जाएगी.

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पीटीएल शिक्षकों के भरोसे होती है पढ़ाई

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राज्य में पॉलिटेक्निक कॉलेजों की पढ़ाई पार्ट टाइम लेक्चरर (पीटीएल) शिक्षकों के भरोसे होती है. पॉलिटेक्निक कॉलेज खुद से नोटिफिकेशन निकाल कर पीटीएल शिक्षकों की बहाली करता है. उन्हें प्रति क्लास के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं.

इनकी नियुक्ति प्रति वर्ष होती है. बीटेक-एमटेक कर चुके छात्र पॉलिटेक्निक कर रहे छात्रों को पढ़ाते हैं. लेकिन अधिकतर मामलों में पीटीएल शिक्षक बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं और छात्रों की पढ़ाई बाधित हो जाती है. ऐसे हालात में छात्रों को बिना कोर्स कंपलीट हुए ही सेमेस्टर परीक्षा देने को मजबूर हो जाते हैं.

अयोग्य शिक्षक बने हैं प्राईवेट कॉलेजों के प्रिंसिपल

राज्य में शिक्षकों की भारी कमी है. शिक्षकों की नियुक्ति के दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. राज्य में कई ऐसे प्राईवेट और पीपीपी मोड में चलने वाले पॉलिटेक्निक संस्थान हैं.

जहां अयोग्य शिक्षक प्रिंसिपल बन कॉलेज चला रहे हैं और प्रशासन को पता होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जाता.
नियमतः डिप्लोमा कॉलेजों में प्रिंसिपल बनने के लिए बीटेक एमटेक और शिक्षण के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव की आवश्यकता होती है.

लेकिन सिर्फ मैथेमेटिक्स की डिग्री के साथ सिल्ली पॉलिटेक्निक कॉलेज में डॉ. बंधोपाध्याय को प्रिंसिपल बना दिया गया है.

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