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लापरवाही: कई माह से आंगनबाड़ी केंद्रों में बंद है पोषाहार, तो कहीं लकड़ी के चूल्हे पर बन रहा एमडीएम

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Ranchi: केंद्र संचालित समेकित बाल विकास परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार देने के राज्य सरकार तमाम दावे करें. लेकिन हकीकत यह है कि आज भी राजधानी स्थित हरमू इलाके (वार्ड 26) में ऐसे कई केंद्र हैं जहां की महिला पर्यवेक्षिका व सेविका-सहायिका को पिछले कई महिनों से पोषाहार नहीं मिल रहा है. इससे इन आंगनबाड़ी केंद्रों का सही तरीके से संचालन ना होकर जैसे-तैसे चल रहा है.

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स्थिति यह है कि इन सेविकाओं को अपनी जेब से खर्च कर बाजार के दुकानों से पोषाहार खऱीदना पड़ रहा है. बाद में जब सरकार उन्हें पोषाहार देती है, तो वे उक्त दुकानदारों को उसे वापस कर देती है. मामले में केंद्रों में पोषाहार देने वाले इलाके के राशन डीलरों का कहना है कि कडरू स्थिति आपूर्ति विभाग के गोदाम में राशन आया ही नहीं है.

दूसरी और हरमू के ही आनंदनगर इलाके में एक ऐसा नवप्राथमिक विद्यालय हैं, जहां लकड़ी के चूल्हे पर मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) बनाया जा रहा है. इससे होने वाले धुंए से फैलने वाले प्रदूषण से बच्चों, शिक्षकों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. जिससे विभिन्न प्रकार की बीमारी होने का खतरा बढ़ गया है.

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नहीं मिल रहा पोषाहार

हरमू इलाके के टेटंगा टोली स्थित आंगनबाड़ी केंद्र (वार्ड 26, पूर्व में 37) की सेविका रजनी बेक ने पूरे मामले पर न्यूज विंग संवादादाता से बात कर कई महीनों से पोषाहार नहीं मिलने की समस्या बतायी. उन्होंने कहा कि केंद्र में करीब 25 बच्चे हैं. पिछली बार जुलाई माह को उनके आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार दिया गया था. उसके बाद से अभी तक यहां इसकी सप्लाई नहीं की गयी. बच्चों की स्थिति को देख वे खुद अपने पैसे से राशन खरीद केंद्र का संचालन कर रही है. इसकी शिकायत जिला आपूर्ति विभाग स्तर तक की गयी है, लेकिन अभी तक इस और किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं गया है.

 

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हरमू के आजाद हिन्द नगर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका ने बताया कि मई माह के बाद से उन्हें राशन नहीं मिला है. उनके अधीन आनेवाले केंद्र में करीब 28 से 30 बच्चे हैं. वह अपनी जेब से अपर बाजार स्थित दुकानों से राशन खरीद कर केंद्र का संचालन कर रही है. पहले कडरू स्थित गोदाम से राशन की आपूर्ति नियमित होती थी. लेकिन मई माह बाद से केंद्र में राशन की सप्लाई नहीं हुई है.

पोषाहार नहीं मिलने के सवाल पर जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कंचन सिंह ने बताया कि मार्च महीने के बाद गोदाम में राशन की सप्लाई नहीं की गयी है. जैसे ही विभागीय स्तर पर पोषाहार उपलब्ध कराया जाएगा, इन आंगनबाड़ी केंद्रों को आपूर्ति की जाएगी. हालांकि इन केंद्रों के निरीक्षण किये जाने पर उन्होंने कहा कि इलाके की सीडीपीओ ही इन केंद्रों की स्थिति का निरीक्षण करती है.

लकड़ी के चूल्हे पर बनता एमडीएम

इसी तरह हरमू के ही आनंदनगर इलाके में नवप्राथमिक विद्यालय (एनपीएस) है. जहां आज भी बच्चों के लिए बनने वाले मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) लकड़ी के चूल्हे पर बनता है. स्कूल में कार्यरत पारा शिक्षक संगीता कुमारी ने बताया कि वर्तमान में भी जिले के सभी एनपीएस भी लकड़ी के चूल्हे से ही भोजन पकाया जा रहा है. इसके जिले के सभी मीडिल स्कूलों में सरकार द्वारा मुफ्त में दी गयी गैस सिलेंडर से ही भोजन तैयार हो रहा है.

शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी को समझना चाहिए कि लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएं का असर शिक्षकों और बच्चों के सेहत पर बुरा प्रभाव डाल रहा है. बावजूद इसके धुएं से निजात दिलाने की दिशा में ठोस पहल नहीं कर रहे हैं. लकड़ी के चूल्हे से खाना बनाए जाने के सवाल पर जिला शिक्षा अधीक्षक छठू विजय सिंह का कहना है कि अभी मीडिल स्कूल स्तर तक गैस सिलिंडर की व्यवस्था कर दी गयी है. जल्द ही नवप्राथमिक विद्यालयों में भी गैस चूल्हों की सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी.

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