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लापरवाहीः राज्य में म्यूटेशन के 54,624 मामले लंबित, आये थे 11,99,443 आवेदन, रिजेक्ट हुए 6,029,18

Ranchi :  झारखंड में म्यूटेशन की स्थिति में अब तक सुधार नहीं हुआ है. तमाम प्रयासों के बावजूद म्यूटेशन के आंकड़े कम होते नहीं दिखते हैं. विभाग के आंकड़े के अनुसार राज्य में अभी करीब 54624 मामले पेंडिंग हैं. अबतक 11,99,443 म्यूटेशन के आवेदन आए, जिसमें से 6,029,18 म्यूटेशन के केस रिजेक्ट कर दिए गए हैं. जबकि पूरे राज्य में 54624 केस पेंडिंग हैं. वहीं 541901 केसों का निष्पादन कर दिया गया है. इसकी मुख्य वजह नक्शा सही नहीं होना बताया जा रहा है. भू-राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई के अंत तक म्यूटेशन के    25, 938 के आवेदन आए. इसमें 20,557 केस रिजेक्ट कर दिए गए.

मुख्यमंत्री ने खुद बैठक कर म्यूटेशन मामलों को दुरूस्त करने का दिया था आदेश

म्यूटेशन के बढ़ते आंकड़ों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी चिंता जतायी थी और राज्य के सारे डीसी के साथ बैठक कर म्यूटेशन के आंकड़ों को कम करने का आदेश दिया था. यही नहीं, रांची जिले के लगभग सात सीओ से शो-कॉज भी जारी किया गया था.

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बिहार से 82,129 नक्शा मंगाया था

राज्य सरकार ने बिहार से 82,129 नक्शा मंगाया था. इस नक्शे को झारखंड लाने के लिए बिहार के गुलजारबाग प्रेस से फोटो कॉपी कराई गई थी. नक्शा मंगाने का मुख्य वजह यह था कि पूरे झारखंड के गांवों की सही मौपिंग की जा सके. इसमें एक प्रति सरकार के पास और एक प्रति रैयत के पास होती है. पर ये मामला ठंडा पड़ गया है.

90 दिनों के भीतर जमीन म्युटेशन का प्रावधान

राज्य में भले ही राइट टू सर्विस एक्ट लागू हो गया है. लेकिन सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और मनमानी के कारण आम लोगों को दिया गया यह संवैधानिक अधिकार सफेद हाथी साबित हो रहा है. प्रावधान के अनुसार जब कोई जमीन या फ्लैट के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन दाखिल खारिज आवेदन देता है तो इसका निष्पादन 90 दिन में हो जाना है मगर यह सारी व्यवस्था धरी की धरी रह गयी है.

पैसों की भी होती है डिमांड

दाखिल-खारिज को लेकर अक्सर अंचल कार्यालयों की शिकायतें पदाधिकारियों को लगातार मिल रही हैं. अधिकतर मामलों में रैयतों को दाखिल खारिज के नाम पर दौड़ाया जाता है. रैयत शिकायत कर रहे हैं कि दाखिल खारिज करने के नाम पर डिमांड की जाती है. डिमांड पूरी होने के बाद ही म्यूटेशन किया जाता है, वरना चक्कर काटते रहिये कार्यालय का. इसे लेकर बड़ा खेल किया जा रहा है. बड़े भूखंडों में तो बड़ी राशि देनी ही पड़ती है. छोटे-छोटे प्लॉट के लिए भी पैसे लेने की शिकायतें हैं.

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