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बाल संरक्षण पर गंभीरता से काम करने की जरूरतः सचिव

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Ranchi:  झारखंड सरकार के महिला व बाल विकास विभाग एवं बचपन बचाओ आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार से दो दिवसीय कंस्लटेंशन कार्यक्रम की शुरुआत की गयी. बाल संरक्षण विषय पर आयोजित परिचर्चा के पहले दिन विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के सचिव अरुण कुमार राय, अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता, झारखण्ड राज्य बाल संरक्षण संस्था के निदेशक डी के सक्सेना, बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल एवं वरिष्ठ पत्रकार विष्णु राजगढ़िया ने अपने विचार रखे.

झालसा सचिव अरुण कुमार राय ने कहा कि हालांकि झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था जेजे एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अच्छा प्रयास कर रही है लेकिन अभी भी संपूर्णा बेहुरा बनाम केंद्र सरकार व अन्य मामले में सर्वाच्च न्यायालय के फैसला के विभिन्न बिन्दुओं पर सुधार की गुंजाईश है.

90 प्रतिशत बच्चे देखरेख की आवश्यकता वाले हैं

श्री राय ने कहा कि झारखंड राज्य जेजे एक्ट से प्रभावित कुल बच्चों के लगभग 10 फीसदी बच्चे विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चे हैं जो बाल सम्प्रेक्षण गृह में हैं. जबकि 90 प्रतिशत बच्चे देखरेख की आवश्यकता वाले हैं. उनके लिए कार्य कार्य् करने की बहुत आवश्यकता है.

उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण की ढेर सारी समितियां तो बन चुकी हैं लेकिन उन्हें सशक्त एवं सक्रिय करने की आवश्यकता है. उन्होंने राज्य बाल संरक्षण संस्था को सलाह दिया कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउन्डेशन के द्वारा गिरिडीह एवं कोडरमा के कुछ गांवों में बनाये गये बाल मित्र मंडल को देखें और उसकी अच्छी बातों को ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति को सशक्त बनाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समिति एवं जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से सबंन्धित संरचना से सम्बन्धित मुद्दों पर झारखण्ड राज्य बाल संरक्षण संस्था के निदेशक के साथ समन्वय करेंगे.

बालमित्र थानों के कार्यप्रणाली के समीक्षा की वकालत

अपराध अनुसंधान विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता ने कहा कि बच्चों के साथ शोषण के अधिकांश मामले बाल श्रम से सम्बन्धित होते हैं. उन्होंने बचपन बचाओ आंदोलन के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस मामले में गुमशुदा बच्चों के मामले में तुरंत एफआईआर करने करने का आदेश दिया गया है.

इसका कितना पालन हो रहा है, इसकी समीक्षा वे करेंगे. उन्होंने पुलिस के प्रभावी प्रशिक्षण के लिए सरल ट्रेनिंग माॅड्यूल विकसित करने और उस पर ट्रेनिंग देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बाल मित्र थाना तो बने हैं लेकिन वे कितने ढंग से काम कर रहे हैं, इसकी भी समीक्षा की जायेगी.

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दूसरों के बच्चों का भी रखे ख्याल

झारखंड राज्य बाल संरक्षण संस्था के निदेशक डी के सक्सेना ने कहा कि हमारी मानसिकता होनी चाहिए कि जिस तरह हम अपने बच्चे का ख्याल करते हैं, उसी तरह दूसरे बच्चों के साथ भी होने चाहिए.

उन्होंने कहा कि जेजे एक्ट का क्रियान्वयन के लिए विभिन्न संरचनाएं हैं, उसमें सबकी जवाबदेही है, उसका पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जेजे एक्ट, जेजे रुल्स एवं सम्पूर्णा बेहूरा बनाम केंद्र सरकार एवं अन्य मामले में माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग सुधार करने की ओर अग्रसर हैं. इसके लिए जरुरी है कि सभी सम्बन्धित हितधारक अपनी जवाबदेही का ईमानदारी से पालन करें. उन्होंने विभाग के द्वारा विभिन्न अच्छे पहल को साझा किया.

12 जून को बाल श्रम होगी चर्चा

बताते चलें कि सम्पूर्णा बेहुरा बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यक्रम निदेशक हैं. उन्होंने ही जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रभावी क्रियावन्यन के लिए सर्वाच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर किया था. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को माननीय झारखण्ड हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका में तब्दील किया है और सरकार से माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभिन्न मुद्दों पर मॉनिटरिंग कर रहा है. 12 जून को इस कन्सल्टेशन में बाल श्रम से सम्बन्धित मामले पर चर्चा की जायेगी.

कार्यक्रम में इनकी रही भागीदारी

पहले दिन के कार्यक्रम में दो पैनल डिस्कशन हुए. पैनल डिस्कशन को झारखण्ड हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिव संतोष कुमार ने किया. कार्यक्रम के दौरान सभी जिलों के बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी, सभी जिलों, रेलवे विभाग सहित स्पेशल जुवेनाईल पुलिस यूनिट के नोडल ऑफिसर एवं राज्य के सभी एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के थाना प्रभारी मौजूद थे.

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