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भारतीय न्यायिक प्रणाली में क्रांतिकारी कदम उठाने की आवश्यकता : न्यायमूर्ति रंजन गोगोई

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 NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने गुरुवार को एक कार्यक्रम में कहा कि आम आदमी को सहज, सुलभ और प्रभावी न्‍याय दिलाने के लिए भारतीय न्‍यायिक प्रणाली में क्रांतिकारी कदम उठाने की आवश्‍यकता है. न्यायमूर्ति ने इस दिशा में तत्‍काल जरूरी कदम उठाने पर भी बल दिया. साथ ही उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यायपालिका को और अधिक सक्रिय होना होगा. बता दें कि जस्टिस गोगोई इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.  इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जज मौजूद थे.

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न्यायपालिका उम्मीद की आखिरी किरण है

जस्टिस गोगोई ने दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में आयोजित न्याय की दृष्टि विषयक व्याख्यान में विचार व़्यक़्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका उम्मीद की आखिरी किरण है और वह महान संवैधानिक दृष्टि का गर्व करने वाली संरक्षक है. इस पर समाज का काफी विश्वास है. जस्टिस गोगोई ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि न्याय देने के प्रक्रिया काफी धीमी है. इसे तेज करने की जरूरत है. कहा कि लंबित मामलों में त्‍वरित आधार पर निपटारा करना होगा ताकि न्‍यायिक जड़ता से बचा जा सके.

स्वतंत्र न्यायाधीश और स्‍वतंत्र पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा करने वाली संस्‍था

उन्होंने हाउ डेमोक्रेसी डाइज नामक शीर्षक से प्रकाशित एक लेख का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्र न्यायाधीश और स्‍वतंत्र पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा करने वाली अग्रिम पंक्ति की संस्‍थाएं हैं. दोनों संस्‍थानों पर लोगों का भरोसा कायम रखने की महती जिम्‍मेदारी है. यह कानूनी और नैतिक दोनों रूपों में हमारे सामने में आती रहती हैं. इसलिए इन संस्‍थानों से जुड़े लोगों हमेशा तत्‍पर रहने की जरूरत है.

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