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अलकडीहा क्षेत्र की बंद कोल खदानों से हर माह होती है लगभग दो करोड़ के कोयले की चोरी

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Kumar Kamesh

Dhanbad : जिले की बंद कोयला खदानों से कोयले की चोरी धड़ल्ले से हो रही है. सिर्फ हम अलकडीहा ओपी क्षेत्र की बात करें तो इस क्षेत्र से प्रतिमाह लगभग दो करोड़ रुपये के कोयले की चोरी हो रही है.

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जानकारों का कहना है कि बंद खदानों से कोयले की चोरी का खेल पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है. न्यूजविंग आज आपको बताने जा रहा है कि कैसे कोयला खदानों में खुदाई होती है और कैसे इसे बंगाल पहुंचाया जाता है.

बंगाल से सटे धनबाद के बलियापुर, सिंदरी, गौशाला, अलकडीहा और तीसरा थाना क्षेत्र से हर माह औसतन पांच सौ टन कोयले की अवैध रूप से खुदाई हो रही है.

कोयले के इस काले कारोबार से धनबाद  से सटे पश्चिम बंगाल का दुबरा, पुरुलिया, रघुनाथपुर  और धनबाद जिले के कोयला माफिया की खूब चांदी कट रही है.

ये माफिया हर महीने कोयले की अवैध खुदाई से करोड़ों रुपये का कारोबार कर रहे हैं.  कोयला माफिया का नेटवर्क बिहार-झारखंड के आसपास के जिलों के साथ-साथ बनरास की कोयला मंडियों तक फैला हुआ है.

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इस रास्ते से बंगाल ले जाया जाता है कोयला

धनबाद के तीसरा, अलकडीहा ओपी क्षेत्र के  बीसीसीएल के बंद ओपन कास्ट परियोजना से जिस कोयले की अवैध रूप से खुदाई होती है, उसे बंगाल भेजा जाता है.

इस क्षेत्र से बंगाल जाने के क्रम में धनबाद जिले के पांच थाना क्षेत्र पड़ते हैं. इन थाना क्षेत्रों में अलकडीहा, तीसरा, बलियापुर, गौशाला और सिंदरी थाना क्षेत्र पड़ते हैं.

पांच थाना क्षेत्रों से गुजरने के बाद भी इन कोयला तस्करों के खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती है.

हर दिन सैकड़ों साइकिल -स्कूटर का होता है उपयोग

कोयला की तस्करी में प्रतिदिन लगभग 500 सौ साइकिल और 150 से ज्यादा स्कूटर गुजरते हैं. जो चोरी के कोयलों से लदे होते हैं. प्रतिदन दो पालियों में सैकड़ों टन कोयले की अवैध ढुलाई कर बलियापुर और सिंदरी थाना क्षेत्र से होकर दामोदर नदी के रास्ते  पश्चिम बंगाल के दुबरा और उसके आसपास के क्षेत्रों में संचालित अवैध कोयला डिपो में पहुंचाया दिया जाता है.

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थाने में मिले माफिया, कहा- पैसे की वसूली कर पुलिस वालों को भी देते हैं

काले कारोबार का सच जानने के लिए न्यूज विंग की टीम 750 फीट गहरी खदान के अंदर गयी. वहां पहुंच कर पता चला कि बंद खदान में धड़ल्ले से कोयले की अवैध खुदाई हो रही है.

खदान से सटा हुआ ही एक पुलिस चौकी है. हम उस पुलिस चौकी में भी गये. इस पुलिस चौकी में कोई पुलिसवाला तो नजर नहीं आया. अलबत्ता कुछ कोयला माफिया जरूर बैठे हुए मिल गये.

ये माफिया कोयले की अवैध खुदाई करने वालों से पैसे की वसूली करते हैं. इनका कहना था कि ये लोग इनसे पैसे लेकर इसे पुलिस के ऊपर के अधिकारियों तक पहुंचाते हैं. और अपना कमीशन भी इसी से लेते हैं.

तीन स्थानों पर किया जाता है कोयले का स्टॉक

बंद कोयला खदान से लेकर पश्चिम बंगाल के अवैध डिपो पहुंंचने तक तीन स्थानों पर कोयले का स्टॉक किया जाता है. पहले खदान के अंदर कोयला काटने वाले को तीस रुपये प्रति बोरा के हिसाब से भुगतान किया जाता है.

फिर उस कोयले को स्थानीय कोयला माफिया तीन रुपये प्रतिकिलो की दर से खरीद कर स्टॉक करते हैं. इस तरह का कार्य तीसरा थाना क्षेत्र के सुरंगा और बलियापुर थाना क्षेत्र के बाघमारा में धड़ल्ले से किया जा रहा है.

स्थानीय दलाल और पुलिस की सूचना पर यह जगह बदलती रहती है. इसके बाद इस स्टॉक किये गये कोयले को बंगाल के माफिया साइकिल और स्कूटरों के माध्यम से बंगाल ले जाने का काम करते हैं.

वे सिंदरी थाना क्षेत्र में पड़ने वाले दामोदर नदी के करगली घाट से नाव के सहारे बंगाल में संचालित अवैध डिपो तक इसे पहुंचाते हैं. यह अवैध डिपो बंगाल के दुबरा में संचालित किया जाता है. कोयला को बंगाल पहुंचाने का काम सुबह के तीन बजे से ही शुरू हो जाता है.

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पुलिस ने कहा- खनन के खिलाफ चलाते रहते हैं अभियान

बंद कोयला खदानों में माइनिंग करना प्रतिबंधित है. इसके बावजूद सुबह से शाम तक इन खदानों में खुदाई का काम चलता रहता है. इस मामले में जब सिंदरी थाना प्रभारी और बलियापुर थाना प्रभारी से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में इस तरह का कोई काम नहीं चल रहा है. बलियापुर थाना प्रभारी बताते हैं कि वे लोग समय-समय पर अवैध कोयला खनन के खिलाफ अभियान चलाते रहते हैं.

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