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आउटसोर्स पर नौकरी प्रक्रिया को उठी खारिज करने की मांग, सरयू राय ने कहा- नई लकीर खींचे हेमंत सरकार

Ranchi. राज्य में बड़े पैमाने पर लगातार आउटसोर्स के जरिये नियुक्तियां होती रही हैं. बड़ी संख्या में युवा वर्ग इसका विरोध भी करता आया है. वे मानते हैं कि इससे उनके कैरियर के साथ खिलवाड़ होता है. भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहता. अब विधायक सरयू राय ने भी उनका समर्थन किया है. उन्होंने राज्य में सुस्त पड़ी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया है. सीएम हेमंत सोरेन से कहा है कि सरकार राज्य के युवकों की सेवाएं आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से ले रही है. इन्हें पगार कम मिलती है. सेवा की गारंटी आउटसोर्स करने वाले की मर्ज़ी पर निर्भर है. सरकारी महकमे में रिक्तियाँ हैं. विज्ञापन हुए हैं,. कइयों ने परीक्षा दी है. बावजूद इसके नियुक्ति में देरी का होना ताज्जुब है.

नियुक्ति के लिये बने एडवांस प्लान

सरयू राय ने आउटसोर्स प्रक्रिया से होने वाली नियुक्तियों को लेकर ट्विटर पर भी मसला उठाया है. कहा है कि राज्य के हर स्तर के कर्मी एक निश्चित संख्या में हर साल रिटायर होते हैं. इनकी जगह नियुक्ति के लिये अग्रिम योजना बनानी चाहिये. इससे सरकार का मैनपावर भी बरकरार रहेगा. इसके अलावे योग्य युवा रोज़गार भी पायेंगे. सरकार को चाहिये कि इस सिलसिले को शुरू करने की हिम्मत करे. पुरानी घिसीपिटी लकीर की जगह नई रेखा खींचे.

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वेतन में विसंगतियां

आउटसोर्स पर नौकरी को लेकर युवाओं ने सरयू राय के ट्विट पर अपनी जोरदार प्रतिक्रिया भी दी है. कहा है कि सरकार आपकी बात सुनती है. इस दिशा में आप सरकार का ध्यान आकृष्ट कराएं. शिक्षक बहाली से लेकर LDC, UDC, गजेटेड, नॉन गजेटेड हर कैटेगरी में सीट खाली है. पर आउटसोर्स से सिर्फ युवाओं का शोषण करने वाली कम्पनी मालामाल हो रही है. स्थाई मजदूरों के लिए ग्रेड रिविजन, केंद्र और राज्य कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग होता है. पर ठेका मजदूर, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कुछ भी नहीं. जबकि मंहगाई दोनों के लिए समान दर से बढ़ती है. बाजार में समान भी एक दर पर मिलता है. एक का निम्न वेतन भी 25,000 तक होता है जबकि दूसरे का 8000 तक. ऐसी विसंगतियों को रोकना चाहिये.

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कुछ रिक्तियों को आउटसोर्सिंग से भरना कुछ हद तक जायज है परंतु जो लॉग टर्म्स के पोस्ट हैं, उसके लिये सरकार को ही आगे आना चाहिये. इससे भी ज्यादा घातक इसमें होने वाले भर्तियों के पीछे होने वाले पैसे का खेल है. कई ऐसी एजेंसियां हैं जो बिना पैसे लिए लोगों को जॉब नहीं देते हैं. उनके फैलाए हुए एजेंट हर जगह हैं जो पैसे लेकर लोगों को लाते हैं. जबसे ज्यादा तो JAP – IT में निकलने वाले जॉब्स को लेकर ये होता है. JAP-IT जैसी संस्था से सवाल पूछना चाहिए कि एक ही टेंडर को किस कारण वो चार बार चेंज करके पब्लिश करता है. कई बार तो अलॉट होने के बाद भी एक ही टेंडर को दोबारा पब्लिश किया जाता है. यह उन कंपनियों के साथ खिलवाड़ है जो इसमें भाग लेते हैं. एक ने लिखा कि कोरोना जैसी बड़ी महामारी के बावजूद स्वास्थ्य विभाग में बहुत सारे पद ख़ाली हैं. तीसरी लहर आनेवाली है. लेकिन इसे भरने की सुध किसी को नहीं है. सिर्फ़ बेड और वेंटिलेटर ख़रीद लेने से क्या मरीज़ अपना इलाज खुद कर लेंगे.

 

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