न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बाल आसरा घरों पर NCPCR की रिपोर्ट खौफनाक: सुप्रीम कोर्ट

'2,874 बाल आसरा गृह में मात्र 54 की स्थिति दुरुस्त'

178

New Delhi: भारत में आसरा घरों में बच्चों की स्थिति पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की रिपोर्ट को खौफनाक करार देते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह असहाय है, क्योंकि इस मामले में अधिकारियों को कोई निर्देश दिए जाने पर उसे न्यायिक सक्रियतावाद करार दे दिया जाएगा.

इसे भी पढ़ेंःआंध्र प्रदेश के CM नायडू के साले और TDP नेता नंदमुरी हरिकृष्णा की सड़क हादसे में मौत

2,874 बाल आसरा गृह में मात्र 54 की स्थिति दुरुस्त

आसरा घरों पर एनसीपीसीआर की सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2,874 बाल आसरा घरों में से सिर्फ 54 के लिए आयोग ने सकारात्मक टिप्पणी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 185 आसरा घरों का अंकेक्षण किया गया उनमें से सिर्फ 19 के पास वहां रह रहे बच्चों का लेखा-जोखा था.

न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि यदि अदालत ने इस मामले में कुछ कहा तो उस पर न्यायिक सक्रियतावाद के आरोप लगेंगे, भले ही अधिकारी अपना काम करने में दिलचस्पी नहीं लें और सिर्फ जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ें और इन आसरा घरों की स्थिति के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहें.

इसे भी पढ़ेंःदेशभर से वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी से हड़कंप, मामले पर सुनवाई आज

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारियों ने ठीक से अपना काम किया होता तो बिहार के मुजफ्फरपुर में हुए कांड जैसी घटनाएं नहीं होतीं. मुजफ्फरपुर में एक आसरा घर में कई लड़कियों से बलात्कार और उनके यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई है.

इस मामले में अदालत की मदद कर रही वकील अपर्णा भट ने कहा कि शीर्ष न्यायालय का आदेश न्यायिक सक्रियता नहीं हैं, क्योंकि आसरा घरों में रह रहे बच्चों की बेहतरी अहम है. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायधीश की पीठ ने कहा कि एनसीपीसीआर की रिपोर्ट, खौफनाक है. इस मामले में अगली सुनवाई अब 20 सितंबर को होगी.

इसे भी पढ़ें- रांची में फादर स्टेन स्वामी के घर पर पुणे की पुलिस ने मारा छापा, लैपटॉप-मोबाइल जब्त

आसरा गृहों का हो सोशल ऑडिट- महिला कांग्रेस

इधर बिहार और देश के कुछ दूसरे हिस्सों में बालिका गृहों में बच्चियों के साथ यौन शोषण की घटनाओं के मद्देनजर अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने मंगलवार को सरकार से आग्रह किया कि सभी महिला आश्रय गृहों का सोशल ऑडिट कराया जाए. महिला कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने इसे लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा.

इसे भी पढ़ें- राजधानी में गैर आदिवासियों ने हथिया ली आदिवासियों की जमीन,  2261 मामले हैं लंबित

इस ज्ञापन में महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि यौन शोषण की हालिया की घटनाओं को देखते हुए सभी आश्रय गृहों का सोशल ऑडिट कराया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि एनआरआई पुरुषों के भारत में होने वाली शादियों का अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराया जाए ताकि महिलाओं के साथ धोखे पर अंकुश लगाया जा सके.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: