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रांची पुलिस की इस एक गलती का भरपूर फायदा उठा रहे नक्सली

Ranchi: राजधानी में लगातार बढ़ते अपराध की एक बड़ी वजह किरायेदारों का वेरिफिकेशन नहीं होना भी है. मकान मालिक द्वारा सत्याीपन न किये जाने के कारण अपराधी प्रवृति के लोग भी राजधानी में आकर किराये के मकान ले लेते हैं और चोरी, डकैती और दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं.

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हालांकि दो वर्ष पहले तत्कालीन एसएसपी अनीश गुप्ता ने एक आदेश जारी कर सभी किरायेदारों का सत्यापन करने का निर्देश दिया था. इसके लिए पुलिस विभाग की ओर से एक फॉर्मेट भी जारी की गयी थी.

किरायेदारों का सत्यापन नहीं होने की वजह से रांची पुलिस के पास किरायेदारों का किसी प्रकार का भी रिकॉर्ड मिलना मुश्किल है. ऐसे में अपराधिक घटनाओं का अंजाम देने के बाद अपराधी आराम से फरार हो जाते हैं जिसे पकड़ने में पुलिस को सफलता नहीं मिल पाती है.

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कई राज्यों में है वेरिफिकेशन की ऑनलाइन व्यवस्था

गुजरात, जम्मू एंड कश्मीर, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, पंजाब जैसे राज्यों में पुलिस किरायेदारों का ऑनलाइन वेरिफिकेशन करती है. मकान मालिक को पहले अपने राज्य की पुलिस डिपॉर्टमेंट की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी डिटेल दर्ज करनी होती है.

इसमें फोटो, एड्रेस, नाम और डेट ऑफ बर्थ के जरिये रजिस्ट्रेशन कराना होता है. रजिस्ट्रेशन के बाद आपके पास यूजर आइडी और पासवर्ड ई-मेल पर भेजा जाता है.

इसके बाद किरायेदार का रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. पुलिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर लॉग इन करने के बाद किरायेदार वेरिफिकेशन के लिए अप्लाइ करना पड़ता है. यहां किरायेदार का नाम, परमानेंट एड्रेस, फोटो, आधार नंबर, पैन कार्ड की डिटेल भरनी होती है. इसके बाद आपके किरायेदार का वेरिफिकेशन हो जाता है. इसके लिए मकान मालिक को पुलिस स्टेशन नहीं जाना पड़ता है.

उतराखंड में सत्यापन नहीं कराने पर पुलिस लगाती है जुर्माना

उत्तराखंड पुलिस डोर-टू-डोर किरायेदारों का सत्यापन कार्य करती है. सत्यापन नहीं कराने वाले भवन स्वामियों पर जुर्माना भी लगाया जाता है. उत्तराखंड पुलिस के ऐप पर भौतिक सत्यापन की व्यवस्था है.

भवन स्वामी को किरायेदार विकल्प पर जाकर किरायेदार का नाम, पता, पहचान पत्र, फोटो अपलोड कर भवन स्वामी का नाम व पता सबमिट करना पड़ता है. इसके बाद भवन स्वामी को टीएन नंबर मिलता है. इससे सत्यापन की पुष्टि होती है.

पुलिस का फोकस जंगल पर

नक्सलियों व उग्रवादियों की धरपकड़ के लिए पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियां जंगलों में सर्च अभियान चला रही हैं. लेकिन दूसरी ओर बड़ी संख्या में उग्रवादी व नक्सली शहरों में छिपे हुए होते हैं.

शहर में किरायेदार रखने से पहले किसी प्रकार का पुलिस सत्यापन नहीं होने की वजह से इन उग्रवादियों व नक्सलियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी भी नहीं होती है.

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कोई खुद को बताता है मजदूर तो कोई छात्र

किराये पर घर लेने वाले नक्सली व उग्रवादी कभी खुद को मजदूर बताते हैं तो कभी छात्र. मकान मालिक भी पैसे के लालच में बगैर कोई जांच-पड़ताल किये तुरंत उसे रहने के लिए अपने घर में जगह दे देते हैं. इसके बाद उग्रवादी व अपराधी संगठन के लिए काम करते हैं और व्यवसायियों से रंगदारी के रूप में मोटी रकम की वसूली करते हैं.

पिछले कुछ माह में शहर से उग्रवादियों व नक्सलियों की गिरफ्तारी

29 अगस्त 2020 – जमीन कारोबारियों से रंगदारी वसूलने के लिए पीएलएफआइ उग्रवादी विनय तिग्गा और कचना पाहन नामकुम थाना क्षेत्र के लोअर चुटिया में किराए के घर में शरण लिये हुए थे. पुलिस ने दो पिस्टल व बड़ी संख्या में गोली के साथ किया गिरफ्तार.

29 अगस्त 2020 – मजदूर बनकर पंडरा थाना क्षेत्र स्थित किराये के घर में पिछले कई माह से रहकर पीएलएफआइ उग्रवादी सनी कच्छप व्यवसायियों से वसूल रहा था रंगदारीय गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस ने मकान मालिक पर नहीं की कार्रवाई.

21 अगस्त 2020 – राजधानी में बड़े व्यवसायी की हत्या करने की योजना बना रहे पीएलएफआइ उग्रवादी परमेश्वर गोप को टाटीसिलवे से गिरफ्तार किया गया. किराये के घर में पिछले कई माह से ले रखी थी शरण. पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ नहीं की कार्रवाई.

2 मई 2020 – अरगोड़ा इलाके में किराये के घर में छिपकर रह रहे टीपीसी के सब-जोनल कमेटी के सदस्य सौरभ गंझू उर्फ दिनेश गंझू को पुलिस ने गिरफ्तार किया. सौरभ चतरा के टंडवा थाना क्षेत्र स्थित गोंदा का रहने वाला है.

11 फरवरी 2020 – टीपीसी के एरिया कमांडर राजेंद्र कुमार भुइयां उर्फ बादल को पलामू पुलिस ने रातू पुलिस के सहयोग से किया गिरफ्तार. राजेंद्र ने अपनी पहचान छुपाकर रातू में किराये के घर में ले रखी थी शरण. जमीन कारोबारियों से रंगदारी वसूलने का कर रहा था प्रयास.

31 जनवरी 2020 – टीएसपीसी का सबजोनल कमांडर निशांत को पुलिस ने रातू से गिरफ्तार किया. निशांत अपनी पहचान छुपाकर राजधानी में रह रहा था.

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