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राजधानी में नाम बदल कर रह रहे हैं नक्सली और नक्सली समर्थक

लेवी वसूलने के साथ पुलिस की गतिविधियों की भी दे रहे जानकारी.

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Ranchi: नक्सली जंगलों में रह कर पुलिस को तो चुनौती दे ही रहे हैं. साथ ही साथ अब शहर में भी रहकर अपना संगठन चला रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी रांची के बाहरी इलाके नाम बदलकर कई नक्सली और नक्सली समर्थक रह रहे हैं.

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यह नक्सली और नक्सली समर्थक जहां व्यापारियों और ठेकेदारों से लेवी वसूलने का काम करते हैं. तो वहीं अपने नक्सली संगठनों को पुलिस की गतिविधियों की भी जानकारी देते रहते हैं.

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हाल के वर्षों में कई ऐसे नक्सली राजधानी रांची से पकड़े जा चुके हैं, जो राजधानी के बाहरी इलाकों में अपना नाम बदल रह रहे थे. मिली जानकारी के मुताबिक अभी भी कई माओवादी एरिया कमांडर हैं, जो नाम बदल कर और छिप कर शहर में रह रहे हैं.

राजधानी के बाहरी क्षेत्रों को नक्सलियों ने बनाया ठिकाना

जानकारी के मुताबिक, राजधानी रांची के आसपास के इलाकों में नक्सलियों व प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई, टीपीसी और माओवादी संगठन के नक्सलियों ने अपना ठिकाना बनाया है.

ये रांची बाहरी इलाके अनगड़ा, खलारी, बुढ़मू, चान्हो, मांडर, बेड़ो, इटकी, बुंडू, तमाड़, सोनाहातू, नामकुम का कुछ इलाका, हटिया, तुपुदाना, रातू के कमड़े, रातू,ओरमांझी, सिल्ली में नाम और पेशा बदल कर नक्सली रह रहे हैं.

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लेवी वसूली के साथ पुलिसिया गतिविधियों की देते हैं जानकारी

मिली जानकारी के अनुसार राजधानी रांची के बाहरी इलाके में नाम बदलकर रह रहे नक्सली और नक्सली समर्थक जहां व्यापारियों और ठेकेदारों से लेवी वसूलने का काम करते हैं. तो वहीं अपने नक्सली संगठनों को पुलिस की गतिविधियों की भी जानकारी देते रहते हैं.

नक्सली और नक्सली समर्थक पहचान बदलकर किराए के मकान में रहते हैं और वह दिनभर पुलिस की गतिविधियों की जानकारी हासिल करते हैं, फिर फोन कर संगठन के एरिया कमांडर को इसकी जानकारी देते हैं.

अब रांची में नक्सलियों की पोस्टरबाजी

राजधानी में नक्सलियों के होने की बात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं, कि रांची में माओवादियों के पोस्टर देखने को मिल रहे हैं. सोमवार को बरियातू थाना क्षेत्र में कई जगहों पर माओवादियों के नाम से पोस्टरबाजी की गई है.

हालांकि,माओवादियों के नाम से चिपकाए गए पोस्टर के पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ है या वाकई में माओवादियों ने इसे चिपकाया है,अभी तक इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाई.

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नक्सलियों ने कई कंपनियों में भी किया है निवेश

हाल के दिनों में पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप और पीएलएफआई नक्सलियों के खिलाफ पुलिस ने छापेमारी की थी.

इसमें नक्सली समर्थक और उससे जुड़ी कई कंपनियों में नक्सली निवेश के बारे में खुलासा किया था. छापेमारी के दौरान पुलिस ने निवेश से जुड़ी डायरी भी बरामद की थी.

पुलिस ने मकान मालिक को जारी किए हैं कड़े निर्देश

रांची में पहचान छिपाकर नक्सलियों और नक्सल समर्थक के रहने की बात सामने आने पर रांची पुलिस ने मकान मालिक को कड़े निर्देश दिए हैं.

मकान मालिक को स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि जिन्हें वह घर किराए पर दे रहे हैं, उनके वोटर आईडी, गारंटर समेत कई अन्य डॉक्यूमेंट की जांच कर लें. इसके अलावा स्थानीय लोग जो पिछले कई सालों से उन्हें जानते हैं उनसे भी जानकारी ले लें.

इतना ही नहीं, किरायेदार का विस्तृत विवरण थाने में जमा करें. अगर कोई मकान मालिक इसका पालन नहीं करता है और उसके घर से नक्सली या नक्सली समर्थक पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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पिछले 5 सालों में कई नक्सली और समर्थक हो चुके हैं रांची से गिरफ्तार

15 फरवरी 2019- छत्तीसगढ़ की बलरामपुर जिले की पुलिस की एक टीम ने रांची के नामकुम से समाजवादी पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष केश्वर यादव उर्फ रंजन यादव को गिरफ्तार कर लिया.
केश्वर मूल रूप से पलामू के पांकी के रहने वाले हैं और नामकुम में अपना मकान बनाकर रह रहा था. पुलिस ने उसे नक्सल संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था.

25 फरवरी 2019- पंडरा ओपी क्षेत्र के चटकपुर से 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली संतोष यादव उर्फ टाइगर को पुलिस ने उसके घर से गिरफ्तार किया. मुठभेड़ में घायल होने के दौरान वह अपने घर में छिप कर अपना इलाज करवा रहा था.

8 जुलाई 2015- रांची से पीएलएफआई का एरिया कमांडर वरुण यादव गिरफ्तार,जो दिनेश गोप के राइट हैंड धनेश्वर गोप दस्ते का मेंबर था.

11जुलाई 2015- खलारी थाना पुलिस ने टीपीसी के एरिया कमांडर गोपाल गंझू उर्फ निर्भय जी को पकड़ा.

23 जून 2015- तमाड़ थाना पुलिस ने पीएलएफआई के तीन नक्सलियों गोदा पुराण, शनिका ओड़ेया और सोमा सालूकर को गिरफ्तार किया था.

26 मई 2015- पतरातू एरिया से रांची पुलिस ने मोस्ट वांटेड माओवादी रोहित जी को गिरफ्तार किया था.

5 अगस्त 2014- रांची पुलिस ने पीएलएफआई के एरिया कमांडर व दिनेश गोप के राइट हैंड जेठा कच्छप को गिरफ्तार किया था. वह कर्रा के डुमरगड़ी गांव का रहनेवाला था.

18 अगस्त 2014- पुलिस ने इटकी एरिया से दिनेश गोप के सहयोगी मंगल उरांव को गिरफ्तार किया. मौके से फरार शमशाद उर्फ मौलवी की गिरफ्तारी इटकी के सौका जंगल से हुई थी.

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