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पूर्व नक्सली अब जगा रहा शिक्षा का अलख

Gaya: नक्सली शब्द सुन कर लोगों के मन में कई तरह की भयावह तस्वीरें सामने आने लगती हैं. लेकिन यदि हृदय परिवर्तन हो जाये तो वही नक्सली समाज का हितैषी भी बन सकता है. जहानाबाद  जिले का एक नक्सली अब बच्चों को शिक्षा दे रहा है. उस पूर्व नक्सली का नाम है नंदा सिंह. उसे हत्या और अपहरण के मामले में हथियार समेत 2007 में पुलिस ने बाराचट्टी से गिरफ्तार किया गया था.

नंदा सिंह गया जिले के डोभी प्रखंड के डोभी पंचायत के डुमरी गांव और आसपास के गांव में चंदा कर के गांव में ही एक पेड़ के नीचे गांव के सभी गरीब बच्चो को निःशुल्क दो घंटा प्रतिदिन पढ़ाते हैं और एरिया में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं.

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नंदा सिंह नक्सली जीवन के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पूछने के आग्रह करते हुए बताया कि नंदा सिंह मेरा नाम है और हम जहानाबाद जिले के बोकनारी गांव के निवासी हैं और 2010 के पहले हम भाकपा माओवादी संगठन के सक्रिय सदस्य रहे हैं. जेल से छूटने के बाद मेरा मन बदल गया,  लगा कि हम बंदूक से मदद से समाज के वंचित लोगों को अधिकार नहीं दिला सकते हैं. जिस गरीब के लिए बंदूक उठाया, उस गरीब को जब तक शिक्षित नहीं किया जायेगा, तब तक हम बंदूक के बल पर ज्यादा दिन नहीं रह सकते हैं.

उन्होंने कहा कि जब गरीब व्यक्ति शिक्षित होगा, तब उसे कोई लूटेगा नहीं, ठगेगा नहीं और शिक्षित होना इन सभी का अधिकार है. जेल में रहने के बाद हमें काफी पढ़ने मौका मिला. महात्मा गांधी जी से हमने अहिंसा का मंत्र लिया. मदर टरेसा से हमे लगा कि समाजसेवा करनी चाहिए. नाम कमाने के लिए जरूरी नहीं है कि दूसरे रास्ते पर ही रहे हैं. हमें विचार आया कि हम लोगों की मदद करें. जब हम संगठन में रहे, तो अनगिनत घटनाओं में शामिल रहे, जिसका विवरण हम नहीं कर सकते हैं. अब उसे याद नहीं करना चाहते हैं, वह समय मेरे जीवन का काला दिन था.

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