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नक्‍सली बंदी: दुमका के दो थाना क्षेत्रों में खनन प्रभावित, सुरक्षा के लिए प्रशासन चौकस

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Dumka: हार्डकोर नक्सली प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला को फांसी की सजा सुनाये जाने के विरोध में नक्सली संगठनों ने दो दिवसीय झारखंड बंद का आह्वान किया. बंद 16 और 17 अक्टूबर को नक्सलियों ने आहूत किया. नक्सलियों के बंद का खासा असर नक्सल प्रभावित शिकारीपाड़ा और गोपीकांदर में संचालित पत्थर उद्योग में देखने को मिला. दोनों ही थाना क्षेत्रों में बंदी के दौरान क्रशर व पत्थर का खनन पूरी तरह ठप्‍प रहे. हालांकि‍ यात्री वाहनों का आवागमन बंदी के प्रभाव से मुक्त रहे. देर शाम तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं थी. बंद में नक्सलियों द्वारा किए जाने वाले अप्रिय घटना को देखते हुए संताल परगना के डीआईजी राजकुमार लाकड़ा, एसपी किशोर कौशल, एसएसबी के प्रभारी कमांडेंट संजय कुमार दल-बल के साथ गोपीकांदर थाना क्षेत्र में चलने वाले सड़क निर्माण में लगे कंपनियों के साइट पर पहुंचे. पदाधिकारियों ने गोपीकांदर थाना क्षेत्र के रोलडीह के समीप सड़क निर्माण कंपनी के साइट में जाकर निरीक्षण किया. पदाधिकारियों ने जिले में स्थित विभिन्न पिकेट एवं निर्माण कार्य में लगे कंपनियों के साइट्स पर जाकर सुरक्षा का जायजा लिया. प्रतिनियुक्त सुरक्षा बलों को सुरक्षा संबंधित दिशा-निर्देश दिये.

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ज्ञात हो कि पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बालिहार सहित पांच पुलिस जवानों के हत्या के आरोप में नक्सली प्रवीर दा और सनातन बास्की को दुमका चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तौफीकुल हसन की अदालत ने 26 सितंबर को फांसी की सजा सुनायी थी. सजा ऐलान होने के बाद से नक्सलियों ने झारखंड में दो दिवसीय बंदी बुलायी है.

वर्ष 2013 में नक्सलियों ने की थी पाकुड़ एसपी बलिहार की हत्या

नक्सली हमला में शहीद पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड मामले की प्रवीर दा उर्फ सुखलाल मुर्मू और सनातन बास्की उर्फ ताला दा को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनायी थी. मामले में अन्य पांच आरोपी नक्सलियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था. संदेह का लाभ देते हुए रिहा होने वाले नक्सलियों ने पाकुड़ जिला के पाकुड़िया थाना क्षेत्र के चरखाडांगा गांव निवासी वकील हेम्ब्रम, काठीकुंड थाना क्षेत्र के डोमनपुर गांव निवासी सत्तन बेसरा, थाना क्षेत्र के ग्राम चौधर निवासी मारबेल मुर्मू एवं थाना क्षेत्र के ही धंडारिक गांव निवासी मारबेल मुर्मू 2 एवं रामगढ़ थाना क्षेत्र पोखरिया गांव निवासी लोबिन मुर्मू को बरी किया था.

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यह घटना 2 जुलाई 2013 को नक्सल प्रभावित काठीकुंड थाना के जमनी गांव के पास घटी थी. नक्सलियों के हमले में पाकुड़ एसपी अमरजीत बलिहार सहित 6 पुलिस जवानों की मौत हो गई थी. नक्सलियों ने एसपी के स्कार्पियो वाहन में ताबड़तोड़ फायरिंग की थी. एसपी बलिहार स्कार्पियों में बॉडीगार्ड के साथ बैठे हुए थे. एसपी के वाहन के पीछे बोलेरो में पाकुड़ जिला के पुलिस जवान सवार थे. घटना को अंजाम देने के बाद सभी नक्सली काठीकुंड जंगल के रास्ते भागने में कामयाब रहे थे.

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सजा सुनाने वाले न्यायाधीश की सुरक्षा में तैनात हुए अतिरिक्त बल

नक्सली प्रवीर दा एवं ताला दा को फांसी की सजा सुनाने वाले न्यायाधीश को नक्सली संगठनों ने धमकी दी थी. इस बावत न्यायाधीश की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ायी गई. पुलिस प्रशासन द्वारा नक्सलियों के धमकी देने के मद्देनजर सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाते हुए न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों की कई दौर बैठक कर रणनीति बनायी. न्यायाधीश के सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती कर दी है.

रिहाई के बाद ही लेवी लेने के आरोप में सत्तन बेसरा गया जेल

न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए जिन पांच नक्सलियों को रिहा किया था. उनमें एक काठीकुंड थाना क्षेत्र के डोमनपुर गांव निवासी सत्तन बेसरा को प्रवीर दा और ताला दा के फांसी की सजा सुनाने के दो  दिन बाद ही रंगदारी मांगने के आरोप में पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज दी. आरोपी नक्सली सत्तन बेसरा पर आरोप है कि वाहनों एवं क्रेशर खादानों से दोषी करार नक्सलियों के रिहाई को लेकर लेवी वसूल रहे थे.

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