न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जड़ से नक्सलवाद खत्म होने के बन रहे आसार,  हालांकि दिल्ली अभी दूर है

अवैध कारोबारी और पुलिस के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के फलस्वरूप ही पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के बड़े पदाधिकारियों की सुनियोजित तरीके से हत्याएं की गयीं.

178

Ranjan Jha

‌Dhanbad: नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में चलनेवाले तमाम अवैध कारोबार में पुलिस के बड़े अधिकारियों और सत्तापक्ष, विपक्ष के और प्रभावित क्षेत्र के नेताओं की मिलीभगत रही है. अवैध कारोबारी और पुलिस के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के फलस्वरूप ही पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल के बड़े पदाधिकारियों की सुनियोजित तरीके से हत्याएं की गयीं. इसकी शिकायत केंद्र सरकार को बार बार मिली है. समझा जाता है कि नक्सली, नेता, पुलिस, प्रेस और अवैध कारोबारियों की मिलीभगत का उद्भेदन करने में केंद्रीय जांच एजेंसियां खासकर प्रवर्तन निदेशालय और एनआइए पिछले करीब दो साल से लगी हुई है. सूत्रों के अनुसार सरकार की उक्त एजेंसियां इस बात को लेकर आश्वस्त है कि नक्सली क्षेत्रों में कोयला, वन संपदा यानी खैर, ढिबरा, अफीम की खेती आदि का अवैध कारोबार पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ सत्ता और विपक्ष के नेताओं की मिलीभगत से ही चलता रहा है. एजेंसियां इस दिशा में तेजी से काम कर रही है. बीते दो दशक से भी अधिक अवधि में नक्सली इलाकों में चलनेवाले कारोबार से जुड़े लोग और उनके लिंक को सबूत के साथ दबोचने में केंद्रीय एजेंसियां लगी हैं. इसमें हाल ही सरेंडर कर जेल गये नक्सलियों के बड़े नेताओं से मिली जानकारी बहुत ही कारगर साबित हो रही है.

एनआइए का रांची ब्रांच खुलने के बाद ऐसे मामलों की जांच में जबर्दस्त तेजी आ गयी है. जिस तरह लोगों को यह भनक नहीं थी कि झारखंड के मंत्री रहे रमेश सिंह मुंडा की हत्या नक्सलियों से करवाने के मामले में मंत्री रहे राजा पीटर को एनआइए दबोच लेगा, वैसे ही एनआइए की चतरा की मगध-आम्रपाली कोल परियोजना में उगाही के मामले में दबिश आश्चर्यजनक है. मंगलवार को एनआइए ने पंद्रह अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी कर कुल 68 लाख रुपये बरामद किये. इसके अलावा कयी अन्य दस्तावेज आदि बरामद किये गये.

इसे भी पढ़ेंःकोर्ट, पीएमओ, राष्ट्रपति, सीएम, मंत्रालय, नीति आयोग और कमिश्नर किसी की परवाह नहीं है कल्याण विभाग को

‌नक्सलियों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई लगातार जारी

‌राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां नक्सलियों की संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई में लगातार लगी हुई है. दो वर्षों में दो दर्जन से अधिक नक्सलियों की संपत्ति जब्त की गयी. इनमें नक्सली नेता संदीप यादव का भी नाम है जिनकी करोड़ों की संपत्ति ईडी ने जब्त की.

इसे भी पढ़ें – अडाणी समूह पर क्यों ‘मेहरबान’ झारखंड की भाजपा सरकार

‌बोकारो रहा है नक्सली गतिविधियों का केंद्र

‌बोकारो का झुमरा पहाड़ हाल के दिनों में नक्सली गतिविधियों का केंद्र था. नेपाल के प्रधानमंत्री रहे कमल पुष्प दहाल उर्फ प्रचंड ने झुमरा पहाड़ पर ही नक्सली ट्रेनिंग ली थी. यह नक्सलियों का अभेद्य गढ़ था. किन पुलिस पदाधिकारियों के समय नक्सलियों की यहां तूती बोलती थी, उस समय इलाके में कहां कहां कोयले का अवैध कारोबार चल रहा था और उससे कौन कौन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी किस माध्यम से लाभान्वित हो रहे थे इसकी गंभीरता से पड़ताल की जा रही है. सूत्रों के अनुसार जांच के दायरे में यहां स्थित इलेक्ट्रो स्टील भी है, जहां चायनीजों का स्वच्छंद आना जाना था. इस कंपनी को नियम के विरूद्ध पर्वतपुर कोल ब्लाक का आवंटन किया गया, जिसे बाद में रद्द किया गया. हालांकि तब तक कंपनी ने अरबों का कोयला निकालकर बेच दिया. जांच का विषय है कि क्या इलेक्ट्रो स्टील को नक्सलियों की फंडिंग का मजबूत आधार प्रदान करने के लिए नाजायज तरीके से कोल ब्लाक देकर उपकृत किया गया.

इसे भी पढ़ें – 8 अरब की वन भूमि निजी और सार्वजनिक कंपनियों के हवाले, फिर भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं 

धनबाद के कोयला आधारित उद्योगों  के भी नक्सली कनेक्शन

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने धनबाद के कोयला आधारित उद्योगों की जांच का आदेश दिया है. बता दें कि यहां टुंडी सर्रा के जंगल में एसएसपी की विशेष टीम ने छापामारी कर 15 टन कोयला बरामद किया था. गिरफ्तार तस्कर के बयान पर 24 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. प्राथमिकी में भाजपा और संघ परिवार से गहरा रिश्ता रखनेवाले लोगों का नाम था. तस्कर ने बताया था कि गिरिडीह से नक्सल प्रभावित क्षेत्र से कोयला लाकर वह आसपास के भट्ठों में सप्लाई करते हैं. उस समय यह मामला दबा दिया गया था. अब मुख्यमंत्री ने जनसंवाद कार्यक्रम में किसी के मामला उठाने पर कोयले के अवैध खनन, ढुलाई, हार्डकोक और अन्य उद्योगों में चोरी के कोयला के उपयोग की जांच का आदेश दिया है. मुख्यमंत्री के इस आदेश से उद्यमियों में हड़कंप है. झारखंड इंडस्ट्रियल ट्रेड एसोसिएशन ने मामले की तीखी आलोचना की है. आलोचना करनेवालों में ज्यादातर वही लोग हैं जिनको सर्रा में चोरी का कोयला बरामद होने पर नामजद किया गया था.

 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: