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झारखंड में कमजोर पड़ रहा नक्सलवाद, पिछले पांच वर्षों के दौरान 86 नक्सलियों ने किया सरेंडर

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Ranchi : झारखंड में नक्सली संगठन के कमजोर होने का असर दिखने लगा है. नक्सली संगठन के कमजोर होने से कई बड़े नक्सलियों का संगठन से मोह भंग हो रहा है और वे सरेंडर कर रहे हैं. हाल के दिनों में जहां एक करोड़ के इनामी नक्सली सुधाकरण ने अपनी पत्नी 25 लाख की इनामी नक्सली नीलिमा के साथ तेलंगाना में सरेंडर कर दिया, तो वहीं 25 लाख के इनामी नक्सली बलवीर ने गिरिडीह पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. पुलिस के आंकड़े के अनुसार पिछले पांच वर्षों के दौरान झारखंड में 86 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया.

लगातार कमजोर हो रहा नक्सली संगठन

पुलिस का दावा है कि नक्सली संगठन भाकपा माओवादी झारखंड में कमजोर पड़ गया है. संगठन की गतिविधियों और उनकी ओर से की जानेवाली घटनाओं में कमी आयी है. प्रभाव वाले कई इलाकों में नक्सली कमजोर हो गये हैं. ऐसा हाल के वर्षों में पुलिस की ओर से लगातार चलाये गये अभियान की वजह से हुआ है. चतरा, सिमडेगा, खूंटी, रांची और हजारीबाग में इस संगठन की सक्रियता लगभग समाप्त हो गयी है. हालांकि हाल के दिनों में नक्सली संगठन ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं, लेकिन पुलिस द्वारा लगातार उन्हें हानि पहुंचायी जा रही है. नक्सली संगठन पिछले दो महीनों से वाहनों में आग लगाकर दहशत फैलाने का काम कर रहे हैं.

पिछले पांच वर्षों के दौरान 86 नक्सलियों ने किया सरेंडर

झारखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान 86 नक्सलियों ने सरेंडर किया. 2014 में दो, 2015 में नौ, 2016 में 27, 2017 में 40 , 2018 में सात और 2019 में अभी तक एक नक्सली ने सरेंडर किया है. वहीं, एक करोड़ के इनामी नक्सली सुधाकरण और उसकी पत्नी 25 लाख की इनामी नक्सली नीलिमा ने झारखंड से जाकर तेलंगाना में सरेंडर कर दिया. वहीं, पिछले पांच साल के दौरान 958 से ज्यादा नक्सली गिरफ्तार हो चुके हैं. झारखंड के विभिन्न जिलों में पहाड़ी चीता, जेपीसी, जेजेएमपी, एसजेएमएम, एसपीएम की सक्रियता अब न के बराबर है. जिन नक्सली-उग्रवादी संगठनों की सक्रियता नजर आती हैं, उनमें माओवादी, टीपीसी और पीएलएफआई हैं. पुलिस के दावे के मुताबिक, माओवादी भी अब 25 फीसदी बचे हैं. वहीं, पीएलएफआई भी 60 फीसदी खत्म हो चुके हैं, सिर्फ 40 फीसदी खत्म करना बाकी है. टीपीसी की कमर लगभग तोड़ी जा चुकी है. हाल में कई नक्सली, पीएलएफआई के उग्रवादी और टीपीसी उग्रवादियों की गिरफ्तारी होने से ये सभी संगठन कमजोर पड़ गये हैं.

झारखंड में बचे हैं सिर्फ 550 माओवादी

झारखंड पुलिस के आंकड़े के अनुसार झारखंड राज्य में अब 550  माओवादी बचे हैं. 250 पर इनाम घोषित हो चुका है. 30 पर इनाम घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है. 2019 में अब तक नौ मुठभेड़ें हुई हैं, जिनमें पुलिस को सफलता मिली है. हालांकि, नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता राज्य पुलिस को चार अप्रैल 2018 में मिली थी, जब लातेहार के हेरहंज थाना क्षेत्र के सेरेनदाग व केड़ू गांव के निकट पांच-पांच लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमांडर शिवलाल यादव और श्रवण यादव सहित कुल पांच नक्सली मारे गये थे. वहीं, हाल के दिनों में पुलिस ने खूंटी जिले में छह पीएलएफआई उग्रवादियों को मार गिराया.

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