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नवरात्र: मां दुर्गा के कुंवारी स्वरूप मां चंचला के दर्शन को पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु

Ranchi: नवरात्र के दौरान कोडरमा के मरकच्चो प्रखंड के घने जंगलों के बीचो-बीच 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बसा चंचला धाम भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है. दुर्गम और कष्टदायक सफर के होने के बावजूद यहां पर रोजाना हजारों श्रद्धालू मां चंचला के दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं. पहाड़ी पर मां दुर्गा का मंदिर अवस्थित है, जहां पर भक्तगण मां दुर्गा के कुंवारी स्वरूप मां चंचला देवी की पूजा करते हैं.

नहीं चढ़ाया जाता सिंदूर

मंदिर के पुजारी बतातें है कि प्रचलित मान्यताओं के अनुसार वर्ष 1648 में देवीपुर के राजा जयनारायण सिंह शिकार खेलने के लिए क्रम में एक बार इस पहाड़ी पर पहुंचे. यहां उन्हें मां भगवती के कुंवारी स्वरूप का साक्षात दर्शन हुआ. इसके बाद से लगातार यहां मां भगवती की पूजा हो रही है.

पुजारी बताते हैं कि मां दुर्गा का कुंवारी स्वरूप होने के कारण यहां सिंदूर वर्जित है, लेकिन हर तरह के प्रसाद यहां चढ़ाए जाते हैं.

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भक्तों की हर मुराद होती है पूरी

मां चंचला के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की हर मुराद पूरी होती है. स्थानीय लोग बताते हैं कि झरिया के राजा काली प्रसाद सिंह को शादी के कई वर्षों तक संतान की प्राप्ति नहीं हो रही थी. इस दौरान वे और उनकी पत्नी सोनामती देवी मां चंचला देवी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंची. वहां उन्होंने मां चंचला से पुत्र प्राप्ति की मन्नतें मांगी. जिसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई.फलस्वरूप, उन्होंने 1956 में मां के दरबार में पूजा की और कानीकेंद से माता के दरबार तक घने जंगलों के बीच सड़क नुमा पगडंडी बनवाई. साथ ही पहाड़ के दुर्गम रास्तों पर लोहे की दो भारी-भरकम सीढ़ी लगवाई.

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नवरात्र के अलावा मंगलवार व शनिवार को रहती है श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्र के अलावा यहां पर मंगलवार व शनिवार को श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है. लोग दूर दूर से अपनी मान्नतें पूरी करने के लिए यहां आते है. ऐसे में इनकी सुविधा के लिए यहां कई धर्मशाला, कुआं, प्रवेश द्वार, यज्ञशाला, पहाड़ पर चढ़ने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है.

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