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#MobLynching पर कविता लिख सोशल मीडिया पर छाये नवीन चौरे

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होशंगाबाद (मप्र) के रहने वाले नवीन चौरे इन दिनों साहित्यिक हलचल को लेकर सोशल मीडिया तक की सुर्खियों में हैं. वे आइआइटीयन हैं. उन्होंने दिल्ली आइआइटी से बीटेक किया है. लेकिन उनके सुर्खियों में रहने की वजह यह नहीं बल्कि मॉब लिचिंग पर उनकी कविता है.

नवीन ने यह कविता मुल्क में लगातार घट रही मॉब लिंचिंग की खबरों के बाद की है. जुलाई महीने में नवीन की यह कविता यूट्यूब पर अपलोड की गयी थी. जिसे दुनियाभर में सुना गया है. अब नवीन की कविता का मूल पाठ खूब वायरल हो रहा है. ये प्रस्तुत है उनकी कविता –

मॉब लिंचिंग

इक सड़क पे खून है
तारीख तपता जून है
एक उंगली है पड़ी
और उसपे जो नाखून है
नाखून पे है इक निशां
अब कौन होगा हुक्मरान
जब चुन रही थीं उंगलियां
ये उंगली भी तब थी वहां
फिर क्यों पड़ी है खून में
जिस्म इसका है कहां?
मर गया के था ही ना?
कौन थे वो लोग जिनके हाथ में थी लाठियां?
कोई अफसर था पुलिस का?
न्यायाधीश आए थे क्या?
कौन करता था वकालत?
फैसला किसने दिया?
या कोई धर्मात्मा था?
धर्म के रक्षक थे क्या?
धर्म का उपदेश क्या था?
कौन थे वो देवता?
न पुलिस न पत्रकार
नागरिक हूं जिम्मेदार

WH MART 1

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