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नावाडीह : पहली बरसात में ही बह गया था चेक डैम, अभी तक देखने नहीं पहुंचे विभागीय अधिकारी

वर्ष 2018 में सिंचाई विभाग ने बना दिया एक और चेक डैम, जहां नहीं ठहर सका एक बूंद पानी.

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Bokaro : जिले के उग्रवाद प्रभावित नावाडीह ब्लाॅक के उपरघाट इलाके में पेंक, मुंगो रांगामाटी पंचायत में मनरेगा के तहत वर्ष 2009-10 में डेढ़ करोड़ की लागत से आधे दर्जन चेक डैम लघु सिंचाई विभाग की ओर से बनाया गया था, लेकिन उससे एक भी खेतों में पानी नहीं पहुंच सका.

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नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण विभाग के अभियंता सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए कार्य स्थल पर गए और सारा काम ठेकेदारी के भेट चढ़ गया. कई चेक डैम पहली बरसात में ही टूट गए, कई चेक डैम का एक किनारा ध्वस्त हो गया और नाला ने अपना रुख ही बदल लिया. स्थिति ऐसी की लोगों के नहाने और जानवरों के पीने तक का पानी गर्मी के दिनों में वहां नहीं मिल पाता है. जबकि चेक डैम निर्माण के समय यह पूरा घोर नक्सल प्रभावित माना जाता था, इन योजनाओं को जमीन पर उतारने का एक मकसद जिला प्रशासन का रहा था कि सिंचाई की सुविधा हो जाने से लोग खेती-किसानी से जुड़ेगे और मुख्य धारा में शामिल होंगे. लेकिन विभागीय अधिकारियों के घोर लापरवाही के कारण मनरेगा का लाखों रुपया बर्बाद हो गया. लेकिन इन चेक डैमों की सुधी लेने फिर कोई जिला प्रशासन की ओर से अधिकारी नहीं पहुंचे. अभी भी ये सभी चेक डैम पेंक और मुंगा रांगामाटी पंचायत के गांवों में सरकारी लूट के नमूने के तौर पर खड़े या टूटे हुए मिल जायेंगे.

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करमा नाला में बना चेक डैम पहली बरसात में ही बह गया

पेक पंचायत के मानपूर गांव होकर बहने वाली करमा नाला में तीन चेक डैम लघु सिंचाई विभाग की ओर से मनरेगा के तहत बनाया गया था. सभी चेक डैम बेकार पड़े हुए है. यह नाला बोकारो और हजारीबाग जिले के सीमा पर बहता है. मानपुर और केंदुआडीह गांव के बीच बना यह चेक डैम बनने के साथ ही बेकार हो गया.
जिसका एक किनारा बह गया और न तो इसका लाभ हजारीबाग जिले के लोग उठा सके और न ही मानपूर गांव के ही लोग. इसी तरह इससे करीब पांच मीटर नीचे बारुघुंटू और जमुनिया गांव के दो चेक डैम बने है, जिसमें बालू भरा हुआ है और पानी दूसरे किनारे से निकल जाती है. इसी तरह मुंगो रांगामाटी में कोठी गांव में लघु सिंचाई विभाग का दो चेक डैम बेकार पड़ा हुआ है. जो करीब 20-20 लाख की लागत से बना था. नावाडीह कला के किचिनदाहा में भी लघु सिंचाई विभाग ने 25 लाख की लागत से चेक डैम बनाये थे, जिसका पानी लोग नहाने में करते है. इधर हाल में कोठी गांव के पास बनने वाला चेक डैम को लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पेंक पंचायत के सीमा में बनवा दिया, जहां पर खेती के लायक जमीन तक नहीं है.

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वन विभाग के चेक डैम में जमा रहता है पानी

बोकारो वन प्रमंडल की ओर से पांच चेक डैम का निर्माण उपरघाट इलाके में साढ़े पांच लाख रुपए की लागत से किया गया है. बेरमो वन क्षेत्र पदाधिकारी दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पेंक पंचायत में दो, कंजकिरो में एक, कोठी में एक और नावाडीह कला में एक चेक डैम बनाया गया है. जिसें एक चेक डैम लिकेज होने की बात सामने आई थी, जिसे बरसात के दिनों में ही मरम्मत कर लिया गया था, जिस कारण हर चेक डैमों में पर्याप्त मात्रा में पानी है. वन विभाग सिंचाई के साथ गांव में रहने वाले मवेशी और जंगली जानवरों के पानी व्यवस्था करने एवं वाटर लेबल को बनाये रखने के लिए जंगल में चेक डैम का निर्माण करता है.

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