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नवल टाटा ने 150 रुपए महीने पर डिस्पैच क्लर्क से की थी करिअर की शुरुआत, जान‍िए कौन है यह शख्‍स

Jamshedpur : नवल टाटा का जन्म 30 अगस्त, 1904 को हुआ था. नवल टाटा कूवरबाई के पोते थे, जो जमशेदजी की पत्नी हीराबाई के पोते थे. जब वह केवल चार वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई. नवल टाटा को लेडी नवाजबाई ने गोद लिया था और यह असामान्य तरीके से हुआ. 1918 में सर रतन का 47 वर्ष की आयु में इंग्लैंड में निधन हो गया था. सर दोराबजी की अध्यक्षता में एक पारिवारिक बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि चूंकि उत्मना समारोह के लिए कोई पुत्र नहीं था, इसलिए एक दत्तक पुत्र आवश्यक था. नवल टाटा की मां सर रतन की पसंदीदा चचेरी बहन थीं. इसलिए नवल टाटा को गोद लेने के लिए चुना गया था.
नवल टाटा ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और लंदन से अकाउंटेंसी की पढ़ाई की. वह 1930 में टाटा में 150 रुपये के मासिक वेतन पर डिस्पैच क्लर्क सह सहायक के रूप में शामिल हुए. उन्हें 1933 में सहायक सचिव, टाटा संस के रूप में पदोन्नत किया गया और बाद में सचिव, विमानन विभाग बने. 1939 में वे टेक्सटाइल मिल्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक बने.1941 में नवल टाटा, टाटा संस के निदेशक बने. 1947 में नवल टाटा को टाटा मिल्स लिमिटेड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. उन्हें 1948 में टाटा ऑयल मिल्स कंपनी लिमिटेड का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था. नवल टाटा टाटा इलेक्ट्रिक कंपनियों के प्रभारी थे. नवल टाटा 15 वर्षों तक भारतीय हॉकी महासंघ के अध्यक्ष रहे. अब तक के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे और उनके नेतृत्व में भारत की हॉकी टीम ने तीन ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते. नवल टाटा को 1969 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया और 5 मई 1989 को उनका निधन हो गया.

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