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हमारी राजनीति में ‘राष्ट्र नीति’ सर्वोपरि: मोदी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 53 पुण्यतिथि पर समर्पण दिवस

New Delhi : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भाजपा की राजनीति में ‘राष्ट्र नीति’ सर्वोपरि है और ‘राजनीतिक स्वार्थ’ तथा ‘राजनीतिक अस्पृश्यता’ के बजाय वह ‘सर्वसम्मति’ को महत्व देती है.

भाजपा के विचारक और भारतीय जन संघ के पूर्व अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 53वीं पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित ‘समर्पण दिवस’ कार्यक्रम में पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए उन्होंने देश की सीमाओं जितनी भाजपा की सीमाओं का विस्तार करने का भी आह्वान किया.

उन्होंने कहा कि हम उसी विचारधारा में पले हैं, जो राष्ट्र प्रथम की बात करती है. हमें राजनीति का पाठ राष्ट्र नीति की भाषा में पढ़ाया जाता है. हमारी राजनीति में भी राष्ट्र नीति सर्वोपरि है. राजनीति और राष्ट्रीय नीति में एक को स्वीकार करना होगा तो हमें राष्ट्र नीति को स्वीकार करने का संस्कार मिला है.

जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिये जाने और सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए आरक्षण संबंधी फैसलों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की सिर्फ बात ही नहीं करती बल्कि उसे जीती भी है.

उन्होंने कहा कि देश में जब भी ऐसे काम हुए हैं तो तनाव हुआ है… संघर्ष हुआ है. उसी काम को हमने प्रेम और मेलजोल के वातावरण में किया है. क्योंकि राष्ट्र नीति सर्वोपरि है और राजनीति एक व्यवस्था है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड को अलग राज्य बनाये जाने का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि राज्यों का विभाजन जैसा काम राजनीति में बहुत खतरेवाला होता है.

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उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार ने तीन नये राज्य बनाये तो उस समय हर राज्य में उत्सव का माहौल था. न कोई शिकायत थी न कोई गिला शिकवा. दोनों ही तरफ के लोग आनंद में थे.

जम्मू एवं कश्मीर के साथ ही लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिये जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लद्दाख में जहां उत्सव का माहौल है, वहीं जम्मू एवं कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को भी पूरा करने में सरकार जुटी हुई है.

उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए हम निर्णय नहीं करते हैं. इसका असर जनसामान्य के मन पर होता है. हम राजनीति में सर्वसम्मति को महत्व देते हैं, सहमति के प्रयास को करते-करते सर्वसम्मति तक जाना चाहते हैं. श्री मोदी ने कहा कि भाजपा राजनीतिक छुआछूत में भरोसा नहीं करती है और देश चलाने के लिए वह आम सहमति का सम्मान करती है.

उन्होंने यह भी कहा कि चुनावों में भाजपा अपने विरोधियों के खिलाफ पूरी शक्ति से लड़ती है लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि वह अपने राजनीति विरोधियों का सम्मान नहीं करती.

उन्होंने इस कड़ी में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पूर्व राज्यपाल एससी जमीर का नाम लिया और कहा कि इनमें से कोई भी राजनेता हमारी पार्टी या फिर गठबंधन का हिस्सा कभी नहीं रहे. लेकिन राष्ट्र के प्रति उनके योगदान का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है.

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