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कुड़ूख भाषा पर चेन्नई में राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, झारखंड के भिखु तिर्की को मिला 2018 का साहित्य सम्मान

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Ranchi : कुड़ूख लिटरेरी सोसायटी ऑफ इंडिया, नयी दिल्ली के तत्वावधान में कुड़ूख भाषा का तेरहवां राष्ट्रीय सम्मेलन चेन्नई में संपन्न हुआ. सम्मेलन में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, चेन्नई, असम, दिल्ली, अंडमान निकोबार से लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सम्मेलन में भिखू तिरकी द्वारा लिखित पुस्तक खोड़चका आरा खुज्जका कुड़ूख डंडी पुस्तक सोसायटी द्वारा प्रकाशित कुड़ूख बओत, शोध पत्रिका कुड़ूख डहरे का भी लोकार्पण किया गया. सम्मेलन का शुभारंभ अना आदी कुड़ूख विनती से हुआ.

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घर, बाजार, कार्यालय में कुड़ूख भाषा को प्रयोग में लाना होगा : सुमन कुमार कुजूर

सम्मेलन के मुख्य अतिथि चेन्नई के सुमन कुमार कुजूर ने कहा कि हर हाल में कुड़ूख भाषा और साहित्य का विकास बहुत जरूरी है. घर-परिवार से भाषा को व्यवहार में लाना होगा. बाजार, कार्यालय में कुड़ूख भाषा को प्रयोग में लाना होगा. सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उषा रानी ने कहा कि कुड़ूख भाषा उरांव जनजातियों की मातृभाषा है, इसलिए मां का परम कर्तव्य बनता है कि बच्चों को कुड़ूख भाषा के प्रति घमंड करना होगा और बच्चों को अपनी मातृभाषा में ही बात करनी होगी. लिखने में स्पेलिंग और बोलने में उच्चारण का बहुत महत्व है, चाहे कोई भी लिपि हो. डॉक्टर हरि उरांव ने कहा कि साहित्य जगत में साहित्य लाने के लिए उन सभी विधाओं को ध्यान में रखते हुए कुड़ूख साहित्य के क्षेत्र में रचना करने की आवश्यकता है. उन्होंने सोसायटी के इतिहास और उद्देश्यों पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान प्रस्तुत किया. अशोक कुमार बाखला ने अभी तक सोसायटी द्वारा किये गये कार्यों की समीक्षा करते हुए विस्तार से व्याख्यान प्रस्तुत किया. डॉ करमा उरांव ने कहा कि विश्व पटल पर कुड़ूख भाषा का स्थान निरूपित करते हुए इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है.

सोसायटी के तत्वावधान में 2018 का साहित्य सम्मान झारखंड के भिखु तिर्की को दिया गया. पूरे सम्मेलन को छह सत्रों में बांटा गया था. अखिल भारतीय तमिल संगम के महासचिव व तमिल के तुलसी कहे जानेवाले डॉ एम गोविंदराजन ने तमिल भाषा और कुड़ूख भाषा के अंतर्संबंध विषय पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि भाषा स्वयंभू है, इसलिए किसी भी भाषा के विकास के लिए भाषा भेदों को दूर करना होगा, क्योंकि भाषा बहता नीर है.

कुड़ूख भाषा पर चेन्नई में राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, झारखंड के भिखु तिर्की को मिला 2018 का साहित्य सम्मान

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सोसायटी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का हुआ चुनाव

कुड़ूख लिटरेरी सोसायटी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव किया गया. इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष उषा रानी मींज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर महेश भगत, सचिव नाबोर एक्का, कोषाध्यक्ष जोसेबियुस एक्का व कुड़ूख डहरे शोध पत्रिका के राष्ट्रीय संपादक हरि उरांव का चयन किया गया. इसके अलावा झारखंड चैप्टर के चीफ विरेंद्र उरांव, पश्चिम बंगाल चैप्टर चीफ जवाल बघवार, बिहार से गोरखनाथ तिर्की, ओड़िशा से आशीष फ्रैंकलीन तिर्की, कोलकाता से सुशीला लकड़ा, दिल्ली से शिलास कुजूर, छत्तीसगढ़ से शिवभरोस बेक, असम से डेविड बाड़ा, मध्य प्रदेश से निकोलस टोप्पो, महाराष्ट्र से सुशील कुजूर, चेन्नई से समीर अनूप मिंज और अंडमान निकोबार से फबियानुस टोप्पो को सर्वसम्मति से चैप्टर चीफ चुना गया.

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झारखंड में होगा कुड़ूख भाषा का अगला राष्ट्रीय सम्मेलन

तीन दिवसीय 13वें राष्ट्रीय कुड़ूख सम्मेलन में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये, जो इस प्रकार हैं- कुड़ूख भाषा का 14वां राष्ट्रीय सम्मेलन झारखंड में और अंतर्राष्ट्रीय कुड़ूख सम्मेलन 15-16 दिसंबर 2018 को भूटान में करने का निर्णय लिया गया. इसी तरह कुड़ूख लिटरेरी सोसायटी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 26 मई 2019 को रांची में करने का निर्णय लिया गया. कुड़ूख भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए शीतकालीन सत्र से पहले कुड़ूख भाषा भाषी सांसद-विधायकों का दिल्ली में सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा कुड़ूख निबंध साहित्य की रचना, कुड़ूख पुस्तक की समीक्षा बैठक, बच्चों के लिए चित्र आधारित पुस्तक का प्रकाशन और कुड़ूख भाषा का ट्रेनिंग प्रोग्राम, नेतृत्व क्षमता का विकास, कुड़ूख भाषा के क्षेत्र में जनजागृति जैसे कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया गया. सम्मेलन में मुख्य रूप से दिल्ली से दर्शील खाखा, अशोक कुमार बाखला, नागौर इक्का, शीला स्कूलजू, झारखंड से डॉ करमा उरांव,  डॉ हरि उरांव,  प्रोफेसर महेश भगत,  विरेंद्र उरांव, अरुण अमित तिग्गा, विकास उरांव, पुष्पा, राधिका उरांव,  ओड़िशा से पुष्पा,  महाराष्ट्र से सुशील कुजूर,  छत्तीसगढ़ से उषा रानी कुजूर मुख्य रूप से शामिल थे.

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