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राष्ट्रीय ईसाई महांसघ ने रघुवर सरकार पर नस्लीय भेदभाव का लगाया आरोप, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

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Ranchi  :  राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के बैनर तले आदिवासियों के आरक्षण के सवाल पर एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन रांची में किया गया, जिसमें झारखंड के सभी जिलों  से आये ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि  शामिल हुए. परिचर्चा में वक्ताओं ने कहा कि हमारे भविष्य के लिए विशेषकर नयी पीढ़ी के समक्ष एक चुनौती खड़ी हो गयी है,  क्‍योंकि   केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा आदिवासियों के हित में प्रदर्शित संवैधानिक अधिकारों से आदिवासियों को वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है. चाहे वह सीएनटी एक्ट हो , या एसपीटी एक्ट,  भूमि अधिग्रहण कानून हो या पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का सवाल,   सरकार के द्वारा इन विषयों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. आज रघुवर सरकार के द्वारा राज्य में  आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के कानूनी   प्रावधानों  को नयी-नयी व्याख्या देकर अर्थविहीन करने का प्रयास किया जा रहा है.  वक्ताओं ने रघुवर सरकार पर  कटाक्ष  करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा आदिवासियों को आपस में लड़ाने की साजिश की जा रही  है. कहा कि  सरकार को किसी भी  कीमत पर सफल नहीं होने दिया जायेगा. आरोप लगाया  कि राज्य में  रघुवर सरकार नस्लीय भेदभाव कर रही है.  सरकार धर्म अथवा जाति के आधार पर किसी भी नागरिक को संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं कर सकती.  वक्‍़ताओं  ने कहा कि सरकार ईसाई समुदाय से डरने  लगी है, इसलिए  हमले तेज हो गये  हैं, जिसका जवाब  ईसाई समुदाय  सरकार को आंदोलन से देगा. jjjj

ईसाई आदिवासियों को जाति प्रमाण पत्र देने के मामले में  संशय पैदा किया जा  रहा है

वाक्ताओं ने कहा कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने ईसाई आदिवासियों को जाति प्रमाण पत्र देने के मामले में  विवादित बयान देकर इस कड़ी में एक और संशय पैदा करने की कोशिश की है. जाति प्रमाण पत्र के मसले पर सरकार के मुखिया केबयान को गैर संवैधानिक ही नहीं, गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए आदिवासी समाज की पहचान को नकारने वाला बताया गया. राज्य के महाधिवक्ता के द्वारा आदिवासियों के आरक्षण पर दिये गये  परामर्श को  आदिवासियों की नयी व्याख्या करने की कोशिश  बताया गया .  कहा गया  कि  भारत के संविधान में आदिवासियों की व्याख्या बहुत ही सूक्ष्म तरीके से की गयी है और उसकी सुरक्षा के उपाय किये गये हैं.  महाधिवक्ता के द्वारा गलत रूप में  इसकी व्याख्या देकर आदिवासियों का अपमान किया गया  है.

पत्थलगड़ी को चर्च  से जोड़कर देखना गलत 

वक्ताओं ने संविधान की नये तरीके से व्याख्या एवं  खूंटी में पत्थरगड़ी के मामले को ईसाई मिशनरियों के साथ जोड़ने  एवं खूंटी पुलिस के द्वारा ईसाई  धर्मावलंबी  को गिरफ्तार करने की कार्रवाई को  ईसाई मिशनरियों को बदनाम करने की सुनियोजित सा जिश करार  दिया.   kkkk

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  तैयार हुई रघुवर सरकार के विरोध आंदोलन की रणनीति

परिचर्चा  में अलग अलग जिलों से आये ईसाई धर्मावलंबियों  के द्वारा  रघुवर  सरकार  के विरोध में रणनीति तैयार की गयी.  साथ ही खूंटी में आदिवासी समुदाय पर पुलिस के द्वारा किये जा रहे दमन को लेकर राष्ट्रपति को अवगत कराने का निर्णय लिया गया.

संत जोसेफ हॉल में भी  परिचर्चा की गयी  

परिचर्चा को  राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव  डॉ. क्रिस्टी अबाहम, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की, प्रदेश अध्यक्ष दीपक तिर्की, प्रदेश महासचिव विनय केरकेटट़ा, युवा प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप तिर्की ,युवा प्रदेश महासचिव अलनी लकड़ा आदि ने संबोधित किया. परिचर्चा में प्रतिभागियों की अधिक संख्या हो जाने के समानांतर परिचर्चा संत जोसेफ हॉल में शुरू की गयी, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी रही.  परिचर्चा  में आरक्षण के सवाल पर युवाओं ने अपनी राय रखी.

 

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