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बच्चों के मुद्दे पर मिलकर काम करेंगे राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और सेव द चिल्ड्रन

Ranchi : बेघर बच्चों के देखभाल और संरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और सेव द चिल्ड्रन मिलकर काम करेंगे. दोनों संस्थाओं ने इस तरह के बच्चों को मदद पहुंचाने के लिए एक नये एसओपी बनायी है.

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इस नयी एसओपी को जारी करते समय राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कहा कि भारत सरकार ने जेजे एक्ट 2015 को लागू किया है. यह ऐसे एक्ट है जिससे ऐसे बच्चे जो फुटपाथ पर रहने पर विवश है उनको राहत पहुंचाया जा सकता है.

इस एक्ट को पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के हितों के लिए इनके परिवारों को भी ऐसी योजनाओं से जोड़ना होगा जिससे वे सशक्त हो सके.

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मौके पर सेव द चिल्ड्रन के सीईओ सुदर्शन सुची ने कहा कि इस एसओपी के लिए हुए परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा होने पर हमें खुशी है. उन्होंने कहा कि इसके जरिए जो भी काम होंगे उससे फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों का पुनर्वास होगा साथ ही उनके परिवारों का भी सशक्तीकरण होगा. इस नयी एसओपी में कहा गया है कि बच्चों को उनके परिवार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए क्योंकि किसी भी बच्चे के लिए उसका परिवार ही सबसे बड़ा सहारा होता है. इतना ही नहीं इसमें परिवार के सशक्तीकरण के लिए कई तरह की योजनाओं को शामिल किया गया है.

इसमें बच्चों से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याएं, जिसमें विकलांगता नशा पान और बाकी समस्याओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है. इससे इन समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी. इस नए एसओपी में बच्चों को 3 वर्ग में बांटा गया है. पहले वर्ग मे सड़कों या फुटपाथ पर रहने वाले अनाथ बच्चे है. दूसरे वर्ग में ऐसे बच्चे हैं जो दिन भर सड़कों पर भटकते हैं और रात होने पर झुग्गियों में अपने परिवार के पास वापस लौट जाते हैं. तीसरे वर्ग में ऐसे बच्चे हैं जो अपने परिवार के साथ फुटपाथ पर ही रहते हैं.

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