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असहिष्णुता वाले बयान पर नसीर की सफाईः मैं गद्दार नहीं

Ajmer: देश में असहिष्णुता पर बयान देने के बाद विवादों में घिरे अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने एकबार फिर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि, उनका बयान एक भारतीय होने के नाते आज के माहौल पर चिंता जाहिर करनेवाला था. उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, जिससे उन्हें गद्दार ठहराया जाये. उन्होंने तो बस अपने मुल्क के बारे में बात करते हुए अपनी चिंता जाहिर की है. एक स्कूल के कार्यक्रम में भाग लेने आए नसीर से जब उनके इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘यह बात तो एक चिंतित भारतवासी की हैसियत से मैं पहले भी कह चुका हूं. मुझे नहीं मालूम कि इस बार मैंने ऐसा क्या कह दिया कि मुझे गद्दार ठहराया जा रहा है. अजीब बात है.’’

मैं गद्दार नहीं- नसीर

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को एक वीडियो सामने आया जिसमें नसीरुद्दीन ने कहा, ‘कई इलाकों में हम देख रहे हैं कि एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत से ज्यादा एक गाय की मौत को अहमियत दी जा रही है. ऐसे माहौल में मुझे अपनी औलाद के बारे में सोचकर फिक्र होती है.’ नसीर ने इससे पहले क्रिकेटर विराट कोहली को घमंडी कहकर भी विवाद खड़ा कर दिया था.

नसीर ने संवाददाताओं से कहा, ‘फिर आप यह भी कह सकते हैं कि विराट कोहली की आलोचना करने के लिए मुझे आस्ट्रेलियाई टीम ने कहा था. अगर उनको आलोचना करने का हक है तो मुझे भी है ना. ’ साथ ही कहा कि मैं अपने मुल्क, जो मेरा अपना घर है मैं उससे बहुत प्यार करता हूं.

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पैसे लेकर एक्टिंग करना शाह का पेशा: विहिप

इधर नसीरुद्दीन शाह के इस बयान से विहिप भड़की हुई है. उसने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि पैसे लेकर अभिनय करना नसीरुद्दीन शाह का पेशा है. साथ ही पूछा कि अभिनेता शाह को यह बताना चाहिए कि इस बार वे किसके इशारे पर यह अभिनय किया है. विहिप ने नसीरुद्दीन शाह के बयान को राजनीति से प्रेरित बताया है.

विहिप ने आरोप लगाया कि अभिनेता शाह के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पिछले चुनाव से पहले इसी प्रकार पुरस्कार वापसी ब्रिगेड का अभियान पूरी तरह प्रायोजित था. 2019 का चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर उसी तरह का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है.

हालांकि, नसीरुद्दीन शाह को अजमेर में एक साहित्य सम्मेलन में भी भाग लेना था. लेकिन भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने वहां विरोध प्रदर्शन किया. एक कार्यकर्ता ने सम्मेलन स्थल के बाहर नसीर के पोस्टर पर स्याही फेंकी.

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