Opinion

नारायणमूर्ति व गडकरी के बयान बता रहे, कंगाली के दरवाजे पर खड़ा है देश

Surjit Singh

इस वित्तीय वर्ष में देश की आर्थिक गति आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति में होगी. GDP में आजादी के बाद सबसे बड़ी गिरावट दिख रही है. अर्थव्यवस्था को जल्दी से जल्दी पटरी पर लाया जाना चाहिए: एनआर नारायणमूर्ति

कोरोना महामारी की वजह से केंद्र व राज्य सरकार को 10 लाख करोड़ रुपये का बजट घाटा होगा. इसलिए हमें अर्थव्यवस्था में तेल डाल कर उसे पंप करने की जरुरत है. नहीं तो उद्योग और व्यवसाय नहीं चलेंगेः नितिन गडकरी

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देश के बड़े उद्योगपति इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने जो कहा है, उसे मेन स्ट्रीम मीडिया ने तवज्जो नहीं दी. जबकि उनके बयान बता रहे हैं कि देश कंगाली के दरवाजे पर खड़ा है. आप इसके लिए मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार माने या फिर कोरोना को. पर, इनकी आशंकाएं हमारी-आपकी खराब भविष्य की तरफ इशारा करते हैं.

नितिन गडकरी ने तो यहां तक कहा है कि अगर किसी किसान के पास पैसा नहीं हो तो वह मोटरसाइकिल कैसे खरीदेगा. वह कैसे पेट्रोल का उपयोग करेगा. या होटल-रेस्टरां में खर्च करेगा या फिर कपड़े खरीदेगा. इसलिए पूंजी गरीब लोगों तक पहुंचने चाहिए.

ये तो एनआर नारायण मूर्ति और नितिन गडकरी की बात हुई

देश का सबसे बड़ा सच यह भी है कि नोटबंदी से छोटे व मंझोले उद्योग तबाह हो गये. लाखों लोग बेरोजगार हो गये. फिर खराब तरीके से जीएसटी लागू किया गया. इसने तो उद्योग की कमर ही तोड़ दी. केंद्र व राज्य सरकार का राजस्व कम होता चला गया. और अब कोरोना की शुरुआत में केंद्र सरकार द्वारा लागू लॉकडाउन में तो सबकुछ तबाह ही हो चला है. अनुमान है कि संगठित और असंगठित क्षेत्र के करीब 14 करोड़ लोगों को बेरोजगार बना दिया है.

मोदी सरकार ने अब तक इन 14 करोड़ लोग, जिन्हें हम मिडिल क्लास कहते हैं, उनके लिए कुछ भी नहीं किया है. ये 14 करोड़ लोग मोटरसाइकिल कहां से खरीदेंगे, कहां से पेट्रोल भरवायेगा या कहां से होटल-रेस्टरां में खर्च करेंगं. कहां से कपड़े खरीदेंगे. केंद्र की मोदी सरकार के पास इसके जवाब नहीं है.

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बेगलुरु शहर से खबर है कि वहां के करीब 50,000 से अधिक दुकानें बंद हैं. देश के अन्य राज्यों के शहरों में स्थित बाजार व मॉल की दुकानें रोज बंद हो रहे हैं. उनमें काम करने वाले बेरोजगार हैं. पर, सरकार के स्तर से ऐसा कुछ भी नहीं किया जा रहा, जिससे यह सब रुके या कोई ठहराव आये.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मानते हैं कि लोगों तक पूंजी व पैसे पहुंचना चाहिए. लेकिन सरकार की ऐसी कोई तैयारी दिखती नहीं.

ऐसे में यह सहज समझा जा सकता है कि अगर वक्त पर बेरोजगारों तक नकदी नहीं मिला तो हालात खराब हो जायेंगे. उद्योगों के बंद होने की रफ्तार बढ़ेगी. और बेरोजगारी भी और तेजी से बढ़ेगी.

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