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Nai Chetna Campaign: लैंगिक हिंसा के खिलाफ केंद्र का ‘नई चेतना’ अभियान, महिलाओं को किया जाएगा जागरूक

New Delhi: केंद्र सरकार लैंगिक हिंसा के खिलाफ महिलाओं व लड़कियों को जागरूक करने के लिए आज से एक माह का ‘नई चेतना अभियान’ शुरू कर रही है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने दिल्ली में इसकी शुरुआत की. अभियान के तहत महिलाओं को हिंसा के खिलाफ उपलब्ध कानूनी व अन्य उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर शुक्रवार को यह अभियान शुरू हुआ. दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह इसे एक जन आंदोलन बनाने के इरादे से शंखनाद किया.


ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने कहा कि यह दुखद है कि बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं अभी भी लिंग आधारित हिंसा को सामान्य मानते हैं. यह दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है. ग्रामीण विकास सचिव ने कहा कि बदलाव लाने के लिए हम खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं व लड़कियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए लिंग आधारित भेदभाव और हिंसा के खिलाफ एक महीने का अभियान शुरू करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया जनता का आंदोलन होगा. इसके पीछे विचार यह है कि लैंगिक हिंसा के मामलों को चर्चा के केंद्र में लाना और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए उपलब्ध नियमों व उपलब्ध तंत्र व उपायों के जरिए उनकी समस्या या शिकायतों के समाधान की जानकारी देना है.

महिलाएं नहीं कर पातीं भेदभाव की पहचान
उन्होंने कहा कि भेदभाव और हिंसा के सामान्य होने के कारण महिलाएं अक्सर अपने साथ होने वाली इन घटनाओं की पहचान करने में असमर्थ होती हैं. इसलिए वे शायद ही कभी सरकारी संस्थाओं से मदद मांगती हैं. वे हिंसा व भेदभाव सहती रहती हैं. यदि वे कानूनी या अन्य मदद लेना भी चाहें तो उनकी समस्याओं के निवारण का तंत्र और उन्हें सेवाएं देने वाली संस्थाओं व एजेंसियों की उन्हें कोई जानकारी नहीं होती है. इनसे वे अनजान रहती हैं. उनमें कानूनी जागरूकता की कमी है.

1200 केंद्र खोले गए, 160 सेंटर आज खुलेंगे
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस दिशा में काफी काम किया है. देश भर में 1,200 जेंडर रिसोर्स सेंटर्स लैंगिक संसाधन केंद्र खोले गए हैं. ऐसे कुल 160 और केंद्र आज शुरू किए जाएंगे. इन केंद्रों से लैंगिक हिंसा व भेदभाव का सामना करने वाली महिलाएं मदद मांग सकती हैं. मंत्रालय अगले पांच वर्षों में सामुदायिक संस्थानों, ग्रामीण समुदायों और सरकारी विभागों के जरिए लैंगिक हिंसा और भेदभाव के खिलाफ एक आम समझ पैदा करने की कोशिश करेगा.

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