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राजधानी के 13837 भवनों की जानकारी से निगम अंजान, अब कर रहा होल्डिंग्स को निष्क्रिय करने की तैयारी

रिकॉर्ड को निष्क्रिय करने सूडा ने दिया आदेश

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Ranchi : रांची नगर निगम क्षेत्र में ऐसे कई गुमनाम होल्डिंगधारी हैं, जिसकी जानकारी निगम प्रशासन को भी नहीं है. राजस्व शाखा के मुताबिक ऐसे होल्डिंगधारियों की संख्या करीब 13,837 है. जिनपर करीब 19.01 करोड़ रूपये की राशि बकाया है. अब निगम ने इस करोड़ों की राशि और ऐसे ऑकड़ों को निष्क्रिय करने के लिये अपनी तैयारी शुरू कर दी है. ऐसे भवनों के होल्डिंग को निष्क्रिय करने के लिए निगम परिषद की बैठक में एक प्रस्ताव लाया जाना है. ऐसा होता है तो निगम को उपरोक्त राशि का नुकसान होना तय है.

वास्तविक पता नहीं होने से हो रही परेशानी

ऐसे होल्डिंगधारियों के स्थानीय पता की जानकारी लेने के लिए राजस्व शाखा में एक समीक्षा बैठक की गई थी. बैठक में जब इस मुद्दे पर बात हुई तो पता चला कि होल्डिंग पंजीयन रजिस्टर में पूर्व में दर्ज होल्डिंग नंबरों में से 13,837 होल्डिंगधारियों की जानकारी निगम को अबतक नहीं है. वहीं इसके पीछे की वजह निगम को इन होल्डिंगधारियों के स्थानीय पता की जानकारी नहीं होना है. इस वजह से राजस्व शाखा के कर्मचारियों को होल्डिंग कार्य में कई तरह की परेशानी भी झेलनी पड़ती है.

 1.63 लाख भवनों का हुआ है होल्डिंग

जानकारी के मुताबिक, झारखंड नगरपालिका सम्पत्ति कर नियमावली 2013 (संशोधित नियमावली 2015) के तहत 1 अप्रैल 2016 तक कुल 1.63 लाख भवनों का होल्डिंग कराया जा चुका है. वहीं उपरोक्त दिये गये होल्डिंग कराने में शाखा को जो परेशानी हो रही है, उसे हटाने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है.

 सूडा से निगम ने लिया था आदेश

ऐसे होल्डिंगधारियों के होल्डिंग को निष्क्रिय करने की अनुमति निगम प्रशासन ने राज्य शहरी विकास अभिकरण से मांगी थी. इसके पीछे उपर दिये गये कारण की चर्चा करते हुए सूडा को कहा गया था कि ऐसे रिकॉर्ड की वजह ही निगम को होल्डिंग टैक्स वसूलने में परेशानी हो रही है. इसपर सूडा निदेशक ने Deactivation of non-responsive legancy data को निष्क्रिय करने का निर्णय लिया था. बीते  जुलाई माह में सूडा ने इस संदर्भ में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया था. इसी आलोक में अब निगम परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा.

 जमीन बिकने पर आयी ऐसी समस्या :  राजस्व प्रभारी

हालांकि गुमनाम भवनों की बात को नकराते हुए राजस्व शाखा की सिटी मैनेजर फरहत अनीसी ने पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पहले से अगर किसी व्यक्ति के नाम से होल्डिंग चल रही थी और फिर उस जमीन की बिक्री के बाद ही इस तरह की समस्या सामने आयी है. साथ ही  उन्होंने बताया कि जमीन विकने का बाद उसपर एक नया प्लैट बना, तो उस प्लैट में अलग-अलग होल्डिंग टैक्स काटा जाने लगा. फिर उस जमीन के पुराने चल रहे होल्डिंग नंबर को निष्क्रिय किया जाना चाहिए था, जिसे अब तक निष्क्रिय नहीं किया गया है. इसके लिए सूडा से आदेश मांगा गया था. जिसपर अब अनुमति मिल गयी है.

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