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22 अक्टूबर से रांची में भाजपा के राष्ट्रीय ST मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीसरी बैठक, नड्डा करेंगे उद्घाटन

Ranchi: 22, 23 और 24 अक्टूबर को रांची के कॉर्निवल बैंक्वेट हॉल के बिरसा मुंडा सभागार में भाजपा के राष्ट्रीय एसटी मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी. झारखंड में तीसरी बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होनी है.
मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद समीर उरांव ने कॉर्निवल हॉल में रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पहले दिन भाजपा के एसटी मोर्चा के पदाधिकारी बैठक में शामिल होंगे. इसके अगले दिन 23 अक्टूबर को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे. 24 को बैठक का समापन होगा. तीन दिवसीय बैठक के दौरान देशभर में एसटी समाज के लिये केंद्र, राज्य सरकार से स्तर से किये जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और दूसरे विषयों पर मंथन होगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, एसटी मोर्चा (प्रदेश) के अध्यक्ष और पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव भी मौजूद थे.

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7 सत्रों में होंगे कार्यक्रम

समीर उरांव के मुताबिक कार्यकारिणी की बैठक 7 सत्रों में होनी है. इस दौरान केंद्र सरकार में शामिल 8 केंद्रीय मंत्रियों के अलावा देशभर के 46 सांसद (राज्यसभा, लोकसभा) भी शामिल होंगे. देश की आजादी के बाद पहली बार देश में केंद्रीय कैबिनेट में जनजाति समाज के 8 लोगों को मंत्रिमंडल में जगह दी गयी है. जनजाति समाज के उत्थान में मोदी सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. उनके सर्वांगीण विकास के लिये कई योजनाओं पर काम हो रहा है. बाकी सरकारों ने उन्हें केवल वोट बैंक के तौर पर ही देखा है.

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पूर्व पीएम अटल बिहारी के समय देश में पहली बार जनजाति विकास मंत्रालय अस्तित्व में आया. ट्राईबल कमिशन का गठन हुआ जिससे आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन और अन्य मसलों से जुड़ी समस्याओं का प्रभावी तरीके से निदान हो सके. ट्राइफेड का भी गठन हुआ. मोदी सरकार में वन धन केंद्र खोलं गये. एकलव्य स्कूलों का लाभ जनजाति समाज के बच्चों को मिल रहा. फॉरेस्ट राइट एक्ट के जरिये भाजपा सरकार ने जनजातियों को जंगलों पर वाजिब अधिकार दिलाने में पहल की. आदिवासी समाज में पलायन रोकने को मोदीजी ने लोकल फॉर वोकल, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना पर जोर दिया.

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मिशन 2024 पर निगाह

एक सवाल के जवाब में समीर उरांव ने कहा कि रघुवर सरकार में जनजाति समाज की बेहतरी के लिये कई स्तरों पर प्रयास हुए. हेमंत सरकार ने कई उल्लेखनीय कामों को स्थगित कर दिया. सरकार जनजाति समाज के विकास के नाम पर केवल झूठ परोस रही. समाज को बरगला रही. 2024 के चुनाव में भाजपा आदिवासी समाज का भरोसा झारखंड में फिर से हासिल करेगी. सब हेमंत सरकार की सच्चाई को समझ चुके हैं. सरना धर्म कोड की आड़ में जनजाति समाज को बरगलाने की साजिश सफल नहीं होगी. विदेशी भावनाओं को आगे बढ़ाने को सरना के नाम पर आदिवासी समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है. संविधान में ट्राइबलों के स्पेशल स्टेटस और सुविधाओं की बात है. इस दिशा में काम होना चाहिये. सरना धर्म से बाहर निकल चुके, सरना की आस्थाओं, परंपराओं को त्याग चुके लोग ही सरना धर्म कोड के नाम पर फर्जी कार्यों में लगे हैं.

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