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झारखंड में खाद्यान्न मिलावट की जांच बंद, इकलौते फूड टेस्टिंग लैब में जांच पर NBL ने लगायी रोक

♦लैब अबतक नहीं हुआ है अपडेट

Ranchi: झारखंड के इकलौते फूड टेस्टिंग लैब में खाद्यान्न की जांच पर एनएबीएल ने रोक लगा दी है. अब राज्य में किसी भी खानेवाले चीज में मिलावट की जांच मुश्किल हो जायेगी. खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम 2006 के अनुसार फूड टेस्टिंग लैब को जांच के लिए एनएबीएल से मान्यता प्राप्त होना जरूरी है. राज्य खाद्य विश्लेषक एवं हेड, स्टेट फूड लेबोरेटरी चतुर्भुज मीणा ने कहा कि 2006 से स्टेट लैबोरेटरी चल रही है और इसे 2011 तक एनएबीएल के मानक के अनुसार विकसित हो जाना चाहिए था. एनएबीएल ने औपबंधिक मान्यता दे रखी थी जिसे 1 जनवरी 2021 से समाप्त कर दिया, जिसके चलते लेबोरेटरी में होनेवाली जांच की अब कोई लीगल मान्यता नहीं रही. प्रयोगशाला को अपग्रेड करने की मांग 2019 में ही की गयी थी, पर विभाग के अधिकारियों की देरी के कारण यह नहीं हो सका. अब इसे बैन कर दिया गया है.

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जांच की नहीं होगी लीगल मान्यता

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स्टेट फूड लेबोरेटरी में जांच अगर होती भी है तो लीगत रूप से मान्यता नहीं मिल पायेगी. यदि कारोबारियों के खाद्य पदार्थों में मिलावट भी मिलता है तो उन पर कार्रवाई नहीं हो पायेगी. अतिआवश्यक मामलों में यदि किसी पदार्थ की जांच की जरूरत पड़ेगी तो दूसरे राज्यों में जांच के लिए भेजा जायेगा. जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलना पड़ेगा.

लगभग 40 फीसदी सैंपल में होती है मिलावट

हर साल 1200 से ज्यादा सैंपल जांच के लिए स्टेट फूड टेस्टिंग लैब भेजे जाते थे, जिनमें से 40 प्रतिशत सैंपल में मिलावट पायी जाती थी. जिसके बाद कानूनी कार्रवाई होती थी. मान्यता रद्द होने से अब मिलावटी पदार्थों के गोरखधंधे में लगे लोगों पर लीगल एक्शन नहीं लिया जा सकेगा.

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