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मुजफ्फरपुर कांडः सुप्रीम कोर्ट की नीतीश सरकार को फटकार, पूछा- आखिर कौन दे रहा पैसे

New Delhi: मुजफ्फरपुर कांड ने जहां बिहार के सिस्टम पर सवालिया निशान लगाया है. वही सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार मामले को लेकर बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा,” ऐसा लगता है कि जैसे ये गतिविधियां राज्य सरकार करवा रही थी.” सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों का भी जिक्र किया. आंकड़ों के अनुसार हर छह घंटे में देश में एक महिला के साथ रेप होता है.

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इस मामले में न्याय मित्र बनाई गई वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट ने कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में हुए कथित दुष्कर्म के मामले में अभी तक कथित पीड़िताओं को कोई मुआवजा तक नहीं दिया गया है.

बालिका गृह चलाने के लिए पैसे कौन दे रहा है?

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मंगलवार को मुजफ्फरपुर बाल गृह मामले में सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार से सवाल किया कि कौन है जो बिहार के शेल्टर होम में पैसा दे रहा है ? कोर्ट ने कहा,” ऐसा लगता है कि जैसे ये गतिविधियां राज्य सरकार करवा रही थी.” लड़कियों के साथ कथित तौर पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न करने वाली गैर सरकारी संगठन को राशि देने पर उच्चतम न्यायलय ने बिहार सरकार को फटकार भी लगाई. अदालत ने बिहार सरकार को पूछा कि आखिर क्यों नहीं इन बाल गृहों की जांच की गई. वही मामले पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस केस में राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए.

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एक आरोपी की पत्नी की गिरफ्तारी के भी आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान बालिका गृह कांड के एक आरोपी की पत्नी को गिरफ्तारी करने को कहा है. दरअसल इस महिला ने 34 पीड़िताओं में से कुछ की पहचान और नाम अपने फेसबुक एकाउंट पर एक पोस्ट के जरिए जारी किये थे. जिसके बाद कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने को कहा है.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से किसी भी मामले में यौन शोषण के पीड़ितों की तस्वीरें प्रकाशित या प्रदर्शित नहीं करने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि यौन शोषण की शिकार नाबालिगों का इंटरव्यू नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि इसका उनपर गंभीर मानसिक प्रभाव पड़ेगा.

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मंत्री मंजू वर्मा देंगी इस्तीफा ?

समाज कल्याण मंत्री बिहार सरकार मंजू वर्मा को इस्तीफा देना पड़ सकता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था अगर किसी के खिलाफ कुछ भी साक्ष्य सामने आता है तो वो इस्तीफा लेने में कोताही नहीं बरतेंगे. हालांकि इसके साथ यह भी कहा थी कि किसी को बिना कारण जिम्मेदार ठहराकर इस्तीफा कैसे लिया जा सकता है.

मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर और मंत्री पति की थी यारी

मामले की जांच के प्रारंभ में पता चला है कि चंद्रेश्वर वर्मा जो समाज कल्याण मंत्री बिहार सरकार मंजू वर्मा के पति है. वो मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर के संपर्क में थे. यह जानकारी बृजेश ठाकुर के फोन की कॉल डिटेल से पता चला है.

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पहले से ही यह आरोप लगाया जा रहा था कि मंजू वर्मा के पति चंद्रेश्वर वर्मा और मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर के बीच काफ़ी नजदीकी थी. दोनों कई बार दिल्ली और अन्य जगहों में एकसाथ यात्रा करते थे. जांच अधिकारियों के अनुसार, ट्रैवल एजेंट का रिकॉर्ड खंगालने पर शायद कुछ सबूत उनके हाथ लग जाये. मंत्री पति और मुख्य आरोपी के बीच संपर्क का पता लगने पर यह मामला तूल पकड़ सकता है. जदयू के कई नेता मानते हैं कि मंत्री का जाना तब तय कहा जा सकता है जब अगर बृजेश की कृपा से मंत्री या उनके परिवार के लोगों ने कुछ हासिल किया है या बृजेश के ऊपर मेहरबानी के कोई सबूत बाहर आए.

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