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मुजफ्फरनगर दंगा मामला: कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया बरी

Muzaffarnagar : यूपी के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों के मामले में कोर्ट अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इडिंयन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हत्या के गवाहों के अपने बयान से मुकर जाने के बाद अदालत ने इन सभी 10 मुकदमों के आरोपियों को रिहा कर दिया. इन गवाहों में अधिकतर मारे गए लोगों के संबंधी थे.

एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए. इसके साथ ही हत्या में प्रयोग किए गए हथियार भी पुलिस की ओर से पेश नहीं किए गए.

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अपनी बात से मुकरे गवाह

रिपोर्ट के मुताबिक, इन 10 मामलों से जुड़े शिकायतकर्ता और गवाहों से बातचीत के साथ ही कोर्ट के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद पता चला कि पांच गवाह अदालत में इस बात से मुकर गए कि अपने संबंधियों की हत्या के वक्त मौके पर मौजूद थे. छह अन्य गवाहों ने अदालत में कहा कि पुलिस ने जबरन खाली कागजों पर उनके हस्ताक्षर लिए थे.

इस संबंध में जनवरी 2017 से फरवरी 2019 तक चले इन मुकदमों के रिकॉर्ड, गवाहों के बयानों की विस्तृत पड़ताल और मुकदमें में शामिल अधिकारियों से बातचीत के बाद पता चला कि पांच मामलों में हत्या में इस्तेमाल हुए औजार को पुलिस ने अदालत में पेश नहीं किया. इतना ही नहीं अभियोजन पक्ष ने पुलिस की सभी बातों को ज्यों का त्यों स्वीकार कर लिया. इस तरह सभी आरोपी अदालत से छूट गए.

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41 में से मात्र एक मामले में सुनाई गयी सजा

मुजफ्फरनगर दंगों के 41 मामलों में से सिर्फ एक मामले में मुजफ्फरनगर की स्थानीय अदालतों ने सजा सुनाई है. इस मामले में इस साल 8 फरवरी को सजा सुनाई गई थी.

इसमें 27 अगस्त 2013 को कवल गांव में हुई वह घटना शामिल है, जिसमें सचिन और गौरव नाम के दो भाइयों की हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के आरोप में अदालत ने मुजम्मिल, मुजस्सिम, फुर्कान, नदीम, जहांगीर, अफजल और इकबाल को सजा सुनाई गई.

हत्या से जुड़े 10 मामलों में 53 लोगों को सीधे तौर पर रिहा कर दिया गया. इसके अलावा सामूहिक बलात्कार के चार और दंगों के 26 मामलों में भी किसी आरोपी को सजा नहीं मिल सकी. गौरतलब है कि साल 2013 में  मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में 65 लोगों की मौत हो गई थी.

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अखिलेश यादव की सरकार में दर्ज किए गए थे सभी मामले

मालूम हो कि दंगे के सभी मामले अखिलेश यादव की सरकार में दर्ज किए गए थे. इन मामलों की सुनवाई सपा के साथ भाजपा सरकार में भी हो रही थी. उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि वह इन मामलों में अपील नहीं करेगी.

सरकारी वकील दुष्यंत त्यागी का कहना है कि हम 2013 मुजफ्फरनगर दंगे मामले में कोई अपील नहीं करने जा रहे हैं. इन मामलों में सभी मुख्य गवाह अपने बयान से मुकर गए थे. इन मामलों में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट गवाहों के बयान पर ही दर्ज की गई थी.

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