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मुस्लिम महिलाएं कांग्रेस के लिए सिर्फ वोट बैंक, सत्ता में रहकर कांग्रेस ने इनके हित में कानून क्यों नहीं बनाया : मिस्फिका

  • महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव के तीन तलाक पर दिये बयान को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

Ranchi : कांग्रेस का तीन तलाक कानून खत्म करनेवाला बयान काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. यह मुस्लिम महिलाओं के अधिकार विरोधी बयान है. यह कहना है भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मिस्फिका हसन का. उन्होंने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और असम की सिल्चर लोकसभा सीट से सांसद सुष्मिता देव के बयान का खंडन करते हुए मिस्फिका हसन ने कहा कि 22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने त्वरित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया था और कहा था कि त्वरित तीन तलाक की प्रथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में प्रदत्त अधिकारों का हनन करती है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मुस्लिम महिलाओं को संवैधानिक हक और आत्मसम्मान के लिए त्वरित तीन तलाक के खिलाफ सदन में बिल पेश किया था और कानून बनाने की पहल की. बता दें कि महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने गुरुवार को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में अल्पसंख्यक महाधिवेशन में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद तीन तलाक को समाप्त करने की बात कही थी.

इस्लामिक धर्मशास्त्र में त्वरित तीन तलाक गलत

मिस्फिका हसन ने कहा कि इस्लामिक धर्मशास्त्र के अनुसार त्वरित तीन तलाक यानी तलाक-ए-बिद्दत एक आपराधिक मामला है. कांग्रेस सरकार का 1986 का कानून तलाक अधिकार संरक्षण अधिनियम कहता है कि इद्दत और मुद्दत के बीच तक ही महिला को मेनटेंनेस दिया जायेगा. जबकि, सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि महिला को जीवन भर मेनटेनेंस देना होगा, जिन्हें तलाक दिया गया हो.

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इंसाफ की दुहाई न दे कांग्रेस

मिस्फिका हसन ने कहा कि जब मोदी सरकार सत्ता में आयी है, तो कांग्रेस इंसाफ की दुहाई दे रही है. जब इनका समय था, तब पार्टी ने तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी क्यों नहीं करार दिया. भारत में आज भी 477 महिलाएं हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तलाक-ए-बिद्दत का शिकार हुई हैं. उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस अल्पसंख्यकों का इतना हित चाहती, तो 1986 के कानून के बाद मुस्लिम महिलाएं सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंचतीं.

मुस्लिम महिलाएं सिर्फ वोट बैंक

मिस्फिका ने कहा कि कांग्रेस के लिए मुस्लिम महिलाएं सिर्फ वोट बैंक हैं. जब सत्ता में पार्टी थी, तब और जब सत्ता में नहीं है, तब भी पार्टी को सिर्फ एजेंडा नजर आ रहा है. जनता की समस्याओं से इसका कोई सरोकार नहीं. उनके उत्थान और आत्मसम्मान के लिए पार्टी ने कभी कुछ नहीं किया.

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