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इस तरह घटता गया विधानसभाओं में मुस्लिम प्रतिनिधित्व

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MZ Khan

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mzगौर से देखें तो, हमें राज्य की विधानसभाओं में मुस्लिम आबादी की तुलना में इनकी नुमाइंदगी कम होती दिखायी देगी. 2014 के बाद इनमें और कमी आयी है. 2017 के यूपी चुनाव में जहां आबादी के हिसाब से हर पांचवां शहरी मुस्लिम है, बीजेपी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं दिया. गुजरात में मुस्लिम आबादी 9% है, यहां बीजेपी 1998 में मुस्लिम उम्मीदवार बनाया था जो हार गया. उसके बाद बीजेपी से कभी मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा नहीं किया गया. हालिया विधानसभाओं के चुनाव को देखें तो पता चलता है कि कांग्रेस ने 277 और बीजेपी मात्र 66 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. बीजेपी के आधे से अधिक उम्मीदवार जम्मू कश्मीर से थे. जनवरी 2018 तक बीजेपी के 1418 विधायकों में मात्र 4 मुस्लिम विधायक थे. दिसम्बर 2018 में आये 5 राज्यों के विधानसभा के नतीजे की तरफ नज़र डालें तो मुस्लिम नुमाइंदगी के सूरते हाल को बहुत आशाजनक नहीं कहा जा सकता.

आइये अब मुस्लिम वोटों पर राज्यवार नज़र डालते हैं: 
राजस्थान. कुल सीट 199, मुस्लिम आबादी 9.07%. कांग्रेस के 8 मुस्लिम एमएलए जीत कर आये. यानी मात्र 4.02%. आधे से भी कम. बीजीपी ने टोंक से एक मात्र मुस्लिम उम्मीदवार (यूनुस खान) को सचिन पायलट के ख़िलाफ़ खड़ा किया था जो हार गया. यहां मुस्लिम आबादी 11%है. कांग्रेस यहां से हर बार मुस्लिम उम्मीदवार देती आयी है. और बीजेपी हिन्दू. इस बार उल्टा हो गया. विडम्बना देखिये कि कांग्रेस ने 15 मुस्लिम उम्मीदवारों को ऐसी जगह से उतारा था जहां मुस्लिम 10 से 24% हैं. कांग्रेस ने जैसलमेर जैसी सामान्य सीट से जहां मुस्लिम की घनी आबादी है, एक अनुसूचित जाति को अपना उम्मीदवार बनाया था.

मध्य प्रदेश: कुल सीट 230, मुस्लिम आबादी 6.57%. कांग्रेस के 2 मुस्लिम उम्मीदवार जीत कर आये हैं, जो इनकी आबादी के मुकाबले में.087% है. कांग्रेस ने मात्र 3 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, वो भी उन जगहों से जहां मुस्लिम आबादी 20%से कम है. बीजेपी ने यहां से अपना कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं दिया था.
तेलंगाना: कुल सीट 119, मुस्लिम आबादी 12.7%. तेलंगाना विधान सभा मे 8 मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर आये हैं जिनमें 7 मजलिस के और 1 टीआरएस के हैं. कांग्रेस ने यहां से अपने 9, मजलिस ने 8, टीआरएस ने 8, टीडीपी ने 1 और बीजेपी ने 1 मुस्लिम उम्मीदवार दिए थे. कुल 27 मुस्लिम उम्मीदवार थे. तेलंगाना में 15 क्षेत्र ऐसे हैं जहां मुस्लिम आबादी 40%से ज़्यादा है और इनमें 7 विधानसभा क्षेत्र हैदराबाद लोकसभा के अंतर्गत  हैं. 1 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. बीजेपी ने अपने मुस्लिम उम्मीदवार इसी क्षेत्र से दिए. कांग्रेस ने इस क्षेत्र से 11 उम्मीदवार दिए जिनमें 5 मुस्लिम थे और 2 मुस्लिम उम्मीदवारों को ऐसी जगह से उतारा जहां मुस्लिम 15% थी जैसे कमारेड्डी, निज़ामाबाद (शहरी). मजलिस ने भी अपने सारे उम्मीदवार हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से उतारे थे.
छत्तीसगढ़: कुल सीट 90, मुस्लिम आबादी 2.02%. कांग्रेस का 1 मुस्लिम एमएलए है जो मुस्लिम आबादी का 1.11% है. बीजेपी ने यहां से अपना कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था.
मिज़ोरम: कुल सीट 40, मुस्लिम आबादी 1.35%. इस विधानसभा क्षेत्र में 39 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है और मात्र एक सीट सामान्य वर्ग में आती है. किसी भी सियासी पार्टी (कांग्रेस,एमएनएफ,बीजेपी) ने इस एक सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था.

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आबादी के तनासुब में राज्य विधानसभाओं में मुस्लिम नुमाइंदगी कम होती जा रही है. ये चिंताजनक स्थिति है. राजनीतिक दलों को विचार करना चाहिए. बिना सही राजनीतिक प्रतिनिधित्व के किसी भी क़ौम अथवा समुदाय के सशक्तिकरण की बात करना बेमानी है. आज तो समानुपातिक प्रतिनिधित्व (Propotional Representation) की बात चर्चा में है. एडीआर और दूसरी तंजीमें भी इसपर खुलकर बोल रही हैं.

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