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नगर निगम : 10 दिन में आ जायेगी बरसात, लेकिन प्रस्ताव के बावजूद 265 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर नहीं हुआ काम 

सभी 53 वार्डों के स्लम इलाकों में दी जानी है पांच-पांच वाटर हार्वेंस्टिंग की सुविधा, 20 करोड़ रुपये का बजट में हुआ है प्रस्ताव

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Ranchi : गर्मी के दिनों में लोग जिस तरह से पानी की भारी किल्लत से जूझते रहे हैं, उसे देख निगम ने विभिन्न वार्डों के स्लम इलाकों में पांच-पांच रेन वाटर हार्वेंस्टिंग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके आलोक में निगम के 53 वार्डों में कुल 265 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सुविधा दी जानी थी. इस सुविधा के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 के निगम बजट में 20 करोड़ रुपये का भी प्रावधान किया गया था.

राजधानी में बरसात शुरू होने में करीब 10 दिन शेष बचे हैं. लेकिन अभी तक निगम की तरफ से कोई विशेष पहल नहीं की गयी है. राजधानी में पानी के लिए छूरा मारने की घटना भी सामने आ चुकी है. शहर में जिस तरह से ग्राउंड वाटर लेवल नीचे जा रहा है, उसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा बहुत जरूरी है. लेकिन निगम के अधिकारी या जनप्रतिनिधि इसके लिए तनिक भी गंभीर नहीं दिख रहे है. हाल ही में वार्ड 26 स्थित हरमू हाईकोर्ट कॉलोनी की गयी दो बोरिंग भी पूरी तरह से फेल होने की खबर है.

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मेयर आशा लकड़ा ने की थी घोषणा

गत 9 मार्च को निगम बोर्ड बैठक के बाद मेयर आशा लकड़ा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि गर्मी में जल संकट को देखते हुए सभी 53 वार्डों के स्लम एरिया में पांच-पांच वाटर हार्वेंस्टिंग करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है. इस प्रस्ताव पर पार्षदों ने खुशी जाहिर कर कहा था कि इससे उनके वार्डों में पानी की किल्लत पर नियंत्रण लगेगा. लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं होने से अब नाराज होकर वे निगम की  कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं.

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 पहल नहीं होने पर अब पार्षद उठा रहे सवाल

हर वार्ड में पांच-पांच वाटर हार्वेस्टिंग सुविधा के मेयर के बयान पर कई पार्षदों ने सवाल खड़ा किया है.  न्यूज विंग से बातचीत में सभी पार्षदों ने यही कहा कि निगम के जनप्रतिनिधि अपने काम से भाग रहे हैं. स्लम तो क्या वार्डों के अन्य इलाकों में भी पानी की किल्लत है. लेकिन इसका कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है.

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मेयर के बयान के बाद पर कोई पहल नहीं  : अरुण झा (पार्षद, वार्ड 26)

वार्ड 26 के पार्षद अरुण झा का कहना है कि वाटर हार्वेंस्टिंग पर मेयर के दिये बयान पर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ है. अधिकारी या कोई जनप्रतिनिधि उनके वार्ड के स्लम एरिया का निरीक्षण करें या पार्षद को कोई सूचना दें, ऐसा कुछ नहीं हुआ है. उनके वार्ड में हरमू बस्ती, फारूकी स्ट्रीट और आजाद हिंद नगर जैसे ऐसे स्लम इलाके है, जहां पानी की भारी किल्लत है. बरसात शुरू होने को करीब 20 दिन शेष है. अगर मेयर के निर्देश के बाद इन स्लम एरिया में वाटर हार्वेंस्टिंग की जाती, तो भविष्य में शायद पानी की किल्लत नहीं होती. लेकिन अभी तक इस दिशा में  निगम ने कोई पहल नहीं की है.

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लोगों के पास पानी है ही नहीं,  वाटर हार्वेस्टिंग कराने का क्या फायदा :  निरंजन कुमार (पार्षद, वार्ड 52)

वार्ड 52 के पार्षद निरंजन कुमार का कहना है कि जब उनके वार्ड में पानी है ही नहीं, तो वाटर हार्वेस्टिंग कराने की बात ही कहां आती है. डीपा टोली, गढ़ा टोली, गनियोर टोली, गिरजा टोली, चाईबासा टोली उनके वार्ड के प्रमुख स्लम एरिया में आते है. इन एरिया में पानी पहुंचाने के लिए निगम ने केवल टैंकर ही उन्हें उपलब्ध कराया है. लेकिन यहां तक पहुंचने का रास्ता इतना दुर्गम है कि टैंकर को पहुंचने में काफी दिक्कत आती है.

आश्वासन देने के बाद भी निगम नहीं दिखता गंभीर  :  अर्जुन यादव (पार्षद, वार्ड 10)

वार्ड 10 के पार्षद अर्जुन यादव का कहना है कि मेयर, डिप्टी या निगम का कोई अधिकारी सिर्फ पेपर में बात कर सिमट जाते है. कचरा तो उठ नहीं रहा है, पानी की क्या बात करें. उनके वार्ड में हकरा खोचा, जामुन टोली, तिरिल बस्ती ऐसे स्लम एरिया है, जहां पानी की उपलब्धता ही नहीं है. इन सभी स्लम बस्तियों में डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने भी कई आश्वासन दिये हैं. लेकिन अभी भी यहां के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे है.

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बरसात के पहले शुरू होगा काम : मेयर आशा लकड़ा

मेयर का कहना है कि गर्मी को लेकर निगम सभी वार्डो में पांच-पांच बोरिंग कराने का काम कर रहा है. बरसात के पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग की दिशा में काम किया जायेगा. मेयर के  बयान पर यह सवाल खड़ा होता है कि बरसात शुरू होने में अब ज्यादा दिन शेष नहीं है. तो क्या निगम रेन वाटर हार्वेंस्टिंग की दिशा में कोई विशेष पहल कर सकेगा.

नगर आयुक्त भी नहीं दिखते सजग

मेयर आशा लकड़ा ने तो निगम बोर्ड बैठक के बाद वार्डों के स्लम एरिया में वाटर हार्वेस्टिंग की बात कर दी, लेकिन इसपर  कार्रवाई की गयी या नहीं, इस पर नगर आयुक्त ने क्या पहल की, इसकी जानकारी अभी तक नहीं है. निगम क्षेत्र में कचरा तो सही तरीके से उठ नहीं रहा है. राजधानी में बनने वाले भवनों का भी सही तरीके से नक्शा पास नहीं हो पा रहा है. शहर की एक बड़ी आबादी इन दिनों पानी की किल्लत झेल रही है. लेकिन नगर आयुक्त होने के नाते उन पर शहरवासियों की उपरोक्त समस्याओं का कोई असर दिखता नजर नहीं रहा है.

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