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नगर निगम : रखरखाव के अभाव में जर्जर हो गयी 1.40 करोड़ की रोड स्वीपिंग मशीन, नयी खरीदने की तैयारी

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Ranchi : रांची नगर निगम ने राजधानी की सड़कों को साफ रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर जिस रोड स्वीपिंग मशीनों को खरीदा था, आज वह निगम के बकरी बाजार स्टोर रूम में जर्जर हालत में है. इसका कारण मशीनों का सही रखरखाव नहीं हो पाना है. प्रत्येक मशीन की लागत करीब 70 लाख रुपये आयी थी. सड़ने के कगार पर पहुंच चुकी दोनों मशीनों की लागत 1.40 करोड़ रुपये पहुंचती है. जानकारी के अनुतार  इन मशीनों की मरम्मति की जगह दो अन्य मशीनों को खरीदने की तैयारी है. निगम के अधिकारियों की मानें, तो नगर विकास विभाग से रोड स्वीपिंग मशीनें खरीदने के लिए राशि की मांग की गयी है.

नगर आयुक्त के प्रस्ताव पर विभागीय सचिव ने दी सहमति

मालूम हो कि शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर गत एक जुलाई को निगम सभागार में एक बैठक हुई थी. बैठक में विभागीय सचिव अजय कुमार उपस्थित थे. उनके समक्ष अधिकारियों ने प्रस्ताव रखा था कि महात्मा गांधी और हरमू बाईपास रोड की सफाई के लिए मैकेनाइज्ड मशीन की व्यवस्था हो. नगर आयुक्त के प्रस्ताव पर सचिव ने रोड स्वीपिंग मशीन खरीदने पर अपनी सहमति प्रदान की थी.

ब्रूम से सफाई करने की खासियत थी मशीन की, अब सड़ने के कगार पर

निगम द्वारा खरीदी गयी  इन रोड स्वीपिंग मशीनों द्वारा राजधानी की कई महत्वपूर्ण सड़कों की सफाई की जाती थी. बकरी बाजार स्टोर रूम में जब इन मशीनों का निरीक्षण किया गया, तो मशीनें खराब हालत में मिली.  इन मशीनों को जिस तरह से रखा गया है, उससे मशीन का खराब होना तय था. मशीन के किनारे लगे सभी इलेक्ट्रिक ब्रूम (झाड़ू) पूरी तरह से खराब हो चुके है. मशीन के दोनों और लगे झाड़ू मिट्टी और बालू हटाने के लिए उपयोग किये जाते थे. इसके अंदर लगा रोलर कचरे को अंदर की तरफ खींच लेता था. मशीन से बाहर निकलने के लिए एक पानी का फव्वारा भी लगा था, जो धूल और मिट्टी को उड़ने से रोकता था. मशीन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसके जरिए डिवाइडर के आसपास की गंदगी भी आसानी से साफ हो जाती थी.

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करोड़ों की लागत से खरीदी गयी थी रोड स्वीपिंग मशीन

उक्त दोनों मशीनें करोड़ो की लागत से खरीदी गयी थी. इसमें एक रोड स्वीपिंग मशीन करीब 70 लाख की लागत से खरीदी गयी थी. दूसरी मशीन भी इतनी ही लागत से राजधानी की सफाई कार्य कर चुकी कंपनी एटूजेड वेस्ट मैनजेमेंट कंपनी ने खरीदी थी. स्टोर कर्मियों से बातचीत में पता चला कि पहली मशीन जो 2007 में खरीदी गयी थी, वह एक माह भी नहीं चली. खरीदने के बाद से ही मशीन का वाहन रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने में काफी परेशानी आयी. जब कंपनी को हटाया गया, तब से मशीन यही पड़ी है. हालांकि कंपनी एस्सेल इंफ्रा को इन मशीनों को हैंडओवर करने की तैयारी भी निगम ने की थी. इसके लिए तत्कालीन नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि ने बाहर से दो इंजीनियरिंग भी बुलाये थे. लेकिन उनके पलामू स्थानांतरण के बाद मशीन मरम्मति का काम आगे नहीं बढ़ पाया.

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