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विभाग के हस्तक्षेप के कारण परिषद के निर्णय को लागू करने से बच रहे नगर आयुक्त व कर्मी : मेयर

  • निगम परिषद की बैठक में स्पेरो सॉफ्टेक से ही काम लेने की कही थी बात, लेकिन सूड़ा ने किया नयी कंपनी का चयन
  • नगर विकास विभाग के सचिव को लिखा पत्र, कहा-“हाईकोर्ट के निर्देश आने तक परिषद के निर्णय को लागू करने का दें निर्देश”

Ranchi  :   राजधानी में होल्डिंग टैक्स वसूली के लिए नयी कंपनी के चयन और उससे उपजे विवाद के बीच मेयर ने विभाग पर फिर हमला बोला है. विभागीय सचिव को पत्र लिख मेयर ने कहा है कि राजस्व वसूली के काम में जिस तरह से हस्तक्षेप किया गया है, उससे नगर आयुक्त समेत अन्य अधिकारी परिषद् के निर्णय और नगरपालिका अधिनियम के तहत दिये कार्यों से बच रहे हैं.

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विभाग ने जिस तरह से बीते दिनों हस्तक्षेप किया, वही सही नहीं है. इससे जहां नगर आयुक्त समेत अन्य अधिकारी परिषद के निर्णय को लागू कराने से बच रहे है, वहीं इससे सभी जनप्रतिनिधि एवं परिषद की गरिमा के साथ झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम 2011 का भी उल्लंघन हो रहा है.

विभागीय सचिव होने के नाते अधिनियम संगत कार्य कराना आपकी जिम्मेदारी है. लेकिन आप ही के द्वारा अधिनियम का अनुपालन कराने से रोका जा रहा है.

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अधिनियम और परिषद की गरिमा के लिए नगर आयुक्त को दें निर्देश

मेयर ने कहा कि नगरपालिका ‘‘संविधान के अनुच्छेद 243(फ) के तहत गठित एक स्वायत्तशासी संस्था“ है. परिषद् (बोर्ड) के निर्णय को लागू करना नगर आयुक्त का जिम्मेदारी है. पुरानी कंपनी स्पेरो सॉफ्टेक के कार्य विस्तार पर निगम परिषद की बैठक में सामूहिक निर्णय लिया गया है. यह निर्णय झारखण्ड नगरपालिका अधिनियम 2011 व झारखण्ड म्यूनिसिपल अकाउंट मैनुअल पार्ट-। व एकरारनामा में किए प्रावधानों के तहत लिया गया है.

मामला अभी हाईकोर्ट में है. परिषद की गरिमा के लिए जरूरी है कि हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय तक विभाग नगर आयुक्त को वे निर्देश दें कि पुरानी कंपनी से ही अभी राजस्व वसूली का काम लिया जाये. पत्र की एक प्रतिलिपि मेयर ने राज्यपाल,  मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री और मुख्य सचिव को भी दी है.

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मामला हाइकोर्ट में, अंतिम आदेश से होगा टेंडर प्रभावित

आशा लकड़ा ने कहा कि नयी कंपनी के चयन पर सूड़ा के निकाले टेंडर पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा है कि सूडा से आंमत्रित टेंडर उनके आदेश से प्रभावित होगा. अभी मामले में सुनवाई विचाराधीन है. ऐसे में विभाग से उनकी अपील है कि हाईकोर्ट में जबतक सुनवाई न हो जाये, तबतक निगम परिषद् के निर्णय को मानने का निर्देश वे नगर आयुक्त को दें.

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