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#Succsess_story : मुनगा की खेती कर महिलाएं बन रहीं स्वावलंबी, 60,650 पौधे खेती के लिए किसानों के बीच वितरित

Dilip Kumar

Palamu : पलामू जिले की महिलाएं स्वालंबी बन रही हैं. वे दूसरों पर निर्भर न रहकर खुद की मेहनत के बदौलत धन कमाने की ओर कदम बढ़ाई हैं. सखी मंडल से जुड़कर महिलाएं न केवल अपनी आत्मविश्वास को बढ़ाया है, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करने में जुटी हैं.

जिले के तीन प्रखंड की महिलाएं सखी मंडल से जुड़कर जोहार परियोजना के तहत मुनगा की खेती कर रही हैं. दो तरह से किसान मुनगा की खेती कर रहे हैं. इसमें नर्सरी विधि से तैयार किये गये मुनगा के पौधे को किसानों के बीच वितरण किया गया है.

वहीं फॉर्मिंग मॉडल से भी किसान मुनगा की खेती कर रहे हैं. दोनों तरह के पौधों को खेतों में लगाया गया है.

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जिले के इन प्रखंडों में की जा रही मुनगा की खेती

जिले के तीन प्रखंड छतरपुर, पाटन और चैनपुर के 2718 किसान मुनगा की खेती कर रहे हैं. नर्सरी विधि से 60650 मुनगा के पौधे तैयार किये गये और उसे किसानों के बीच वितरित किये गये हैं. वहीं 116 अन्य किसान फार्मिंग मॉडल से मुनगा की खेती करने में जुटे हैं.

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प्रखंडवार यह है आंकड़ा

प्रखंडवार आंकड़ों को देखें तो छतरपुर प्रखंड के 803 किसानों को 23650 मुनगा के पौधे वितरित किये गये हैं. वहीं 34 किसान फॉर्मिंग मॉडल से खेती कर रहे हैं. पाटन प्रखंड में 901 किसान 21000 पौधे वितरण किये गये हैं.

वहीं 42 किसान फॉर्मिंग मॉडल से खेती कर रहे हैं. इसके अलावा चैनपुर प्रखंड के 1014 किसान 16000 किसानों को नर्सरी विधि से तैयार किये गये मुनगा के पौधों का वितरण किया गया है. जबकि 40 किसान फॉर्मिंग मॉडल से मुनगा की खेती करने में जुटे हैं.

पौष्टिकता से भरा है मुनगा का पेड़  

मुनगा एक प्रकार का पेड़ होता है, जिसके हर हिस्से का इस्तेमाल किसी न किसी बीमारी के इलाज और पशु आहार में होता है. यूं कहें कि इसके जड़ से लेकर फल तक काफी उपयोगी होता है.

मुनगा के पत्तों में बहुत तरह के विटामिन, प्रोटिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो न केवल इंसानों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि पशुओं के लिए भी आवश्यक है. उसके पत्तों में जख्मों को भरने की भी क्षमता होती है.

मुनगा के पत्तों को पशु आहार के तरह इस्तेमाल करने से न केवल बकरियां स्वस्थ रहती हैं, बल्कि उनके वजन में भी बढ़ोतरी होती है. मुनगा की खूबियों की वजह से इसे ‘मिरेकल ट्री‘ यानी जादुई पेड़ भी कहा जाता है.

बकरी पालन करने वालों के बीच दिया जा रहा बढ़ावा

जोहार परियोजना के अंतर्गत मुनगा के खेती को उन किसानों के बीच बढ़ावा दिया जा रहा है, जो बकरी पालन कर रहे हैं. मुनगा की खेती शुरू करने से पहले सखी मंडल की सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया.

प्रशिक्षण में उन्हें मुनगा की खेती से संबंधित जानकारी दी गयी. जिले के तीनों प्रखंडों में नर्सरी विधि से मुनगा का पौधा तैयार कर खेतों में लगाया जा रहा है.

सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं

मुनगा की खेती दो तरह से की जा सकती है. एक नर्सरी के माध्यम से पौधा तैयार कर और दूसरा सीधा खेत में. मेढ़ बनाकर इसके पौधे लगाये जाते हैं. पौधा से पौधा की दूरी करीब एक फीट और दो मेढ़ों के बीच की दूरी करीब ढाई फीट का होता है.

इसमें जैविक खाद और कीटनाशक दिया जाता है, ताकि कीटनाशक से पौधे का नुकसान नहीं हो। इसके पौधे में सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है. इसकी खेती किसी भी प्रकार के मिट्टी में आसानी से की जा सकती है.

प्रशिक्षण से जाना मुनगा का गुण

पाटन प्रखंड के कोल्हुआ गांव निवासी लक्ष्मी बाला देवी और चैनपुर प्रखंड के चांदो गांव निवासी सरिता देवी भी मुनगा की खेती कर रही हैं. लक्ष्मी बाला देवी और सरिता देवी ने बताया कि वे लोग क्रमशः 4 डिसमिल और 6 डिसमिल जमीन पर मुनगा की खेती कर रही हैं.

वे झारखंड लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी (जेएसएलपीएस) के जोहार परियोजना द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर खेती प्रारंभ की हैं. प्रशिक्षण में मुनगा की खेती करने से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गयी. मुनगा का पेड़ आसपास भी होता था, लेकिन प्रशिक्षण के पूर्व उसके महत्व का नहीं जानते थे.

साथ ही मुनगा के पत्ता और फल बीमारियों में भी फायदेमंद होता है, इसकी भी जानकारी नहीं थी. प्रशिक्षण के बाद उसके गुणों के बारे में जाना. मुनगा पशु आहार में भी उपयोगी और फायदेमंद है, इसके संबंध में भी जानकारी प्राप्त हुई. इसकी खेती करने से बीमारियों का इलाज भी हो सकेगा. साथ ही बकरियों को बिना पैसा खर्च किये पौष्टिक आहार देने में सक्षम हो पाएंगे.

मुनगा की खेती को दिया जा रहा बढ़ावा: उपायुक्त

उपायुक्त डॉ. शांतनु कुमार अग्रहरि ने बताया कि जिले में भी सखी मंडल की महिलाएं मुनगा की खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. मुनगा का पेड़ कई गुणों से भरपूर होता है. झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग के जेएसएलपीएस द्वारा ग्रामीणों को जोहार परियोजना के अंतर्गत इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है.

विशेषकर बकरी पालन करने वाले किसानों को मुनगा की खेती में आगे लाया जा रहा है, ताकि वे पशुपालन की ओर प्रेरित होंगे. मुनगा की खेती से वे पशुओं को पौष्टिक आहार दे पाएंगे, इससे उन्हें बाहर से आहार लेने की आवश्यकता नहीं होगी. इससे पैसे का भी बचाव कर सकेंगे.

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