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पत्थलगड़ी की आग में जल रहा है मुंडा अंचल, 29 प्रथामिकी में 15000 से अधिक मुंडाओं पर देशद्रोह का आरोप

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  • 54 लोगों को बनाया गया था नामदज अभियुक्त, 45 लोगों को भेजा गया है जेल
  • खूंटी जिला में मानवाधिकारों के हो रहे उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार अयोग में की गयी शिकायत

Pravin Kumar

Ranchi/Khunti : संविधान विशेषज्ञ सह लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ सुभाष कश्यप ने झारखंड सरकार द्वारा 10 नवंबर 2018 को रांची के आर्यभट्ट सभागार में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा था कि झारखंड में अभी भी पत्थलगड़ी की समस्या का समाधान नहीं हुआ है, बल्कि नियंत्रण हुआ है. डॉ सुभाष ने जो कहा था, वह आज खूंटी जिला में सच साबित होता दिख रहा है. कुल मिलाकर खूंटी जिला में पत्थलगड़ी आंदोलन भले थमा हुआ दिख रहा हो, लेकिन जिला प्रशासन की गतिविधियां और दूसरी ओर मुंडा समुदाय का सरकार के प्रति आक्रोश अभी भी खूंटी में जारी है, जो आनेवाले चुनाव में भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है. जिला पुलिस बल द्वारा की जा रही गतिविधियों से मुंडा समुदाय में नाराजगी है, जिसे अब यह समुदाय मीडिया में भी जाहिर नहीं करना चहता है.

भाजपा के विरोध में मतदान करने का लिया फैसला

जिन गांवों में पत्थलगड़ी की गयी, वहां के मुंडा अपने गांव और अपना नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहते हैं, “भाजपा सरकार मुंडाओं की जमीन लूटना चाहती है. घाघरा में हुई घटना के बाद पत्थलगड़ी आंदोलन करनेवाले लोगों पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत बदनाम किया गया. फिर इलाके में पुलिस पोस्ट बैठाने के लिए मुंडा से कोचांग के इलाके में जमीन ले ली गयी. ऐसे में हमलोग सरकार द्वारा किया जा रहा जुल्म कब तक सहेंगे? पत्थलगड़ीवाले क्षेत्र में वोट न देने का निर्णय लिया गया था, जिसे बदलकर हमलोगों ने भाजपा के विरोध में मतदान करने का निर्णय लिया है. साथ ही मुंडाओं को तोड़ने का काम इलाके में आरएसएस द्वारा किया जा रहा है. इससे भी सचेत रहने के लिए ग्रामसभा में कहा जा रहा है.” कई गांवों के मुंडाओं से बातचीत पर यह लगता है कि पत्थलगड़ी वाले इलाके में विधानसभा चुनाव समेत लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए जीत की राह बेहद कठिन साबित हो सकती है. भले पूर्व में इलाका भाजपा का रहा हो.

15000 से अधिक आदिवासियों पर दर्ज है देशद्रोह का मामला

खूंटी जिला में पांचवीं अनुसूची की रक्षा को लेकर और भूमि अधिग्रहण कानून, लैंड बैंक के विरोध में मुंडा समुदाय ने जिला के लगभग 86 गांवों में पत्थलगड़ी की थी. इसके बाद कई बार जिला प्रशासन और पत्थलगड़ी समर्थक आमने-सामने भी हुए थे. कोचांग में दुष्कर्म की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई में तेजी आयी. जिला प्रशासन की ओर से कुल 29 प्रथामिकी दर्ज करायी गयी. पत्थलगड़ी को लेकर 54 लोगों पर नामजद प्राथमिकी की गयी. इसमें करीब 45 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इनमें 17 गांव के मुंडा भी हैं. 15000 से अधिक आदिवासियों पर देशद्रोह का मामला बनाते हुए प्राथमिकी दर्ज की गयी.

आदिवासी अधिकार मंच ने मानवाधिकार आयोग को भेजा पत्र

खूंटी जिला में आदिवासी समुदाय के मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर आदिवासी अधिकार मंच की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज की गयी है. आयोग को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि एक दर्जन से अधिक एफआईआर के अध्ययन से यह बात प्रमाणित होती है कि सभी एफआईआर एक-दूसरे की नकल है. कुछ एफआईआर मात्र सुनी-सुनायी बातों पर आधारित है. पत्थलगड़ी के मामले में की गयी खुली एफआईआर में धारा 124 ए के तहत देशद्रोह जैसे संगीन आरोप लगाये गये हैं. 10 -12 लोगों को नामजद अभियुक्त बनाकर 15000 से अधिक लोगों को अज्ञात आरोपी बनाया गया है.

गृह मंत्री से मिलकर खूंटी के मामले पर बात करेंगे : जितेन चौधरी

सांसद सह आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक जितेन चौधरी ने न्यूज विंग से बातचीत में कहा कि अभी मानवाधिकार आयोग में भेजे गये पत्र का कोई जवाब नहीं आया है. इस विषय को हम संसद में भी उठायेंगे और जल्द ही गृह मंत्री से मिलकर खूंटी के मामले में बात करेंगे.

मानवाधिकार हनन के खिलाफ कोर्ट जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे : प्रफुल्ल लिंडा

आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच के राज्य संयोजक प्रफुल्ल लिंडा का कहना है कि मुंडा समुदाय में आज भी भाजपा सरकार के प्रति काफी आक्रोश है. खूंटी जिला में हो रहे मानवाधिकार के हनन को लेकर संगठन जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाने से भी पीछे नहीं हटेगा. सरकार द्वारा आदिवासियों की जमीन लूटने का कई तरह से कार्य किया जा रहे है. पत्थलगड़ीवाले इलाके में पुलिस द्वारा किसी को भी जेल में डालने का काम किया जा रहा है.

खूंटी के विषय पर क्या कहते हैं सामाजिक कार्यकर्ता जेरोम जेराल्ड कुजूर

सामाजिक कार्यकर्ता जेरोम जेराल्ड कुजूर कहते हैं, “ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और पेसा कानून के प्रणेता दिवंगत डॉ बीडी शर्मा कहा करते थे- लोकसभा न विधानसभा! सबसे ऊंची ग्रामसभा. अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह झारखंड के पांचवीं अनुसूचित इलाकों में घूमते हुए गांव गणराज्य की मीटिंग करते थे और पत्थलगड़ी करते थे. एसटी/एससी आयोग के पूर्व अध्यक्ष बंदी उरांव ने भी कई बार डॉ बीडी शर्मा के साथ खूंटी जिले के कई खूंटकटी गांवों में साथ-साथ भ्रमण कर पेसा कानून के महत्व को समझाया है. तब से खूंटी और आस-पास के स्वशासी इलाकों के ग्राम प्रधानों ने अपने इलाकों में पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों के तहत मिले अधिकारों विशेषकर पेसा कानून के अंतर्गत ग्रामसभा के अधिकारों को प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया है. ऐसे में बिरसा मुंडा के रास्ते पर चलनेवाले मुंडा समुदाय को प्रशासन द्वारा झूठे मुकदमों में जेल में डालना कानूनसम्मत नहीं है. पत्थलगड़ी भले ही थम गयी है, लेकिन मुंडा अंचल पांचवीं अनुसूची को लेकर और पुलिसिया दमन को लेकर आज भी अशांत है.”

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