Ranchi

ऊर्जा विभाग में छह महीने के लिये आयी मुंबई की एजेंसी पीडब्ल्यूसी, सरकार बदलते ही बंद हुआ काम

वर्तमान सरकार की ओर से एक्सटेंशन नहीं मिलने के कारण बंद हुआ काम

Ranchi: ऊर्जा विभाग की योजनाएं आम जन तक नहीं पहुंच पाती. इसी कार्य के लिये विभाग की ओर से पिछले साल एक एजेंसी नियुक्त की गयी. मुंबई की एजेंसी पीडब्ल्यूसी को विभाग ने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और जागरूकता के लिये चयनित किया. लेकिन अब यह एजेंसी विभाग की योजनाओं पर काम नहीं कर रही है.

एजेंसी ने विभाग के साथ सिर्फ छह महीने ही काम किया. विभाग की मानें तो पूर्व सरकार ने इस एजेंसी को नियुक्त किया था. वो भी सिर्फ छह महीने के लिये. अब एकरारनामा खत्म हो चुका है. वर्तमान सरकार की ओर से एजेंसी को एक्सटेंशन नहीं दिया गया. जबकि इसके लिये विभागीय स्तर पर प्रयास किया गया था. वरीय सूत्रों से जानकारी मिली कि सरकार ने इस काम के लिये एजेंसी को फंडिंग करने से भी मना कर दिया था. पिछले कुछ महीनों से एजेंसी के लोग ऊर्जा विभाग के साथ काम नहीं कर रहे थे. एजेंसी की ओर से मात्र चार लोगों को इस काम के लिये भेजा गया था.

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चारों निगमों के योजनाओं के क्रियान्वयन पर करना था काम

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पीडब्लयूसी एजेंसी को ऊर्जा विभाग की योजनाओं को आम जन तक पहुंचाने के लिये नियुक्त किया गया था. यह एजेंसी का मुख्य काम था. वहीं बिजली बोर्ड की चार निगमों के साथ मिलकर एजेंसी के लोग काम करते. जिसमें निगमों की योजनाओं, कार्यों के क्रियान्वयन, जमीनी स्तर पर योजनाओं पर कार्य आदि किया जाता. अधिकारियों की मानें तो एजेंसी ने अलग-अलग योजनाओं पर कार्य भी किया था. लेकिन एक्सटेंशन नहीं मिलने के बाद एजेंसी को वापस जाना पड़ा. मुख्य रूप से जेबीवीएनएल संचालित ईजी बिजली ऐप, ग्रामीण विद्युतिकरण के लिये एजेंसी ने प्लान तैयार किया था.

आचार संहिता लागू होने के पहले आयी थी एजेंसी

एजेंसी पीडब्लयूसी राज्य में आचार संहिता लागू होने के पहले से काम कर रही है. तब एजेंसी की ओर से ऊर्जा विभाग और निगमों की योजनाओं पर वर्क प्लान तैयार किया जा रहा था. साथ ही उम्मीद थी कि नयी सरकार बनने के बाद एजेंसी काम शुरू करेगी. लेकिन ऐसा हो नहीं सका और एजेंसी को काम बंद करना पड़ा. अब इस दिशा में काम किया जायेगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है.

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विभाग की बढ़ी परेशानी

इस एजेंसी को कार्य मुक्त करने से विभाग की परेशानियां बढ़ गई है. एजेंसी के बहाल रहने से चारों निगमों के कार्यों के साथ विभाग का सीधे समन्वय स्थापित होता. साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी होती. विभाग की मानें तो पूर्व सरकार ने जो फंडिंग इस एजेंसी के लिए की वो भी कामगार साबित नहीं हुई. चुनाव को ध्यान मे रखते हुए ही एजेंसी को सिर्फ छह महीने के लिए लाया गया था. ताकि बाद में एक्सटेंशन दिया जा सके.

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