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मुंबई : डांस बार का धंधा सालाना दो लाख करोड़ का,  सुप्रीम कोर्ट की हां के बाद राजनीति तेज

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 NewDelhi : मुंबई में डांस बार का धंधा सालाना 2 लाख करोड़ रुपए का बताया गया है. इसमें वैध-अवैध राशि शामिल है. खबरों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुंबई डांस बार पर 14 साल से लगी रोक (कुछ शर्तों के साथ) हटाते ही राजनीति शुरू हो गयी है. बता दें कि सत्ता पर काबिज भाजपा ने हालांकि इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताकर चुप्पी साध ली है, लेकिन विपक्षी दल इस कदम को महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों का गठबंधन करार दे रहे है. जानकारों के अनुसार अकेला यह धंधा मुंबई को लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की वैध-अवैध आमदनी कराता रहा था.  इसमें वैध आमदनी 40 से 42 हजार करोड़ रुपए थी.  बता दें कि मुंबई डांस बार के खिलाफ सैकड़ों याचिकाएं दर्ज किये जाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2005 में डांस बार बंद करने के फैसले पर मुहर लगाई थी.

इस फैसले से मुंबई में लाखों लोग बेरोजगार हो गये थे. इसकी वजह दो लाख करोड़ रुपये की वैध-अवैध अर्थव्यवस्था थी. जानकारों के अनुसार धंधा बंद होने से पिछले 15 साल में प्रदेश सरकार को कई लाख करोड़ रुपये के राजस्व का घाटा सहना पड़ा है.

मुंबई में 20-22 हजार डांस बार चलते थे : उस वक्त मुंबई में 20-22 हजार डांस बार चलते थे, जिनमें 800 ही सरकारी आंकड़ों में रजिस्टर्ड थे। इनमें करीब 75 हजार डांसर काम करती थीं, जिनमें से 40 हजार ने अब दूसरा काम धंधा शुरू कर दिया है. मुंबई में 20-22 हजार डांस बार चलते थे, जिनमें 800 ही सरकारी आंकड़ों में रजिस्टर्ड थे.  इनमें लगभग 75 हजार डांसर काम करती थीं.

डांस बार संस्कृति पर लिखी गयी है बॉम्बे बार

मुंबई की डांस बार संस्कृति पर लिखी गयी किताब बॉम्बे बार में कहा गया है कि डांस बार के व्यवसाय में शराब, डांसरों पर विभिन्न मदों में होने वाले खर्च और वेश्यावृत्ति से लेकर पुलिस को दिया जाने वाला हफ्ता शामिल था. इस धंधे से सिर्फ मुंबई पुलिस को लगभग 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का हफ्ता मिलता था. इस बिजनेस में उद्योगपतियों के साथ-साथ पुलिस और राजनेता भी हाथ काले कर रहे थे.

सूत्रों के अनुसार मुंबई के एक प्रमुख राजनीतिक दल के बड़े नेताओं की पाचं डांस बार में हिस्सेदारी थी. चर्चा थी कि डांस बार ही इस दल की आय के सबसे बड़े साधन थे. कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री आरआर पाटिल ने अपने प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दल को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए डांस बार पर प्रतिबंध का दांव खेला.

विधेयक को फुलप्रूफ नहीं बनाया जाना सरकार की विफलता

शिवसेना नेता अनिल परब ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्णय  बरकरार नहीं रखा. सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी प्रावधान में संशोधन क्यों किये. कहा कि डांस बार पर बैन के लिए तैयार विधेयक को फुलप्रूफ नहीं बनाया जाना सरकार की विफलता है. इस क्रम में महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री रंजीत पाटिल ने कहा कि हम SC के निर्णय के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं.

एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के पीछे महाराष्ट्र सरकार और डांस बार मालिकों का गठबंधन काम कर रहा है. जब हम सत्ता में लौटेंगे तो डांस बार पर दोबारा प्रतिबंध लगा देंगे.

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