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मुखिया संघ ने सोशल ऑडिट टीम पर उठाये सवाल, कहा- फर्जीवाड़ा करके मनरेगा में लेबर डिमांड बढ़ाने का चल रहा खेल

  • संघ ने सरकार से मनरेगा कर्मियों की हड़ताल को खत्म किये जाने का किया आग्रह

Ranchi: राज्य में मनरेगा कर्मियों की हड़ताल 27 जुलाई से जारी है. हड़ताल के कारण लेबरों को रोजगार देने के प्रयासों पर असर ना पड़े, इसके लिये ग्रामीण विकास विभाग पहल भी कर रहा है. सोशल ऑडिट टीम ने 10 लाख लोगों को एक महीने के भीतर काम दिलाने की बात कही है. पर प्रदेश मुखिया संघ ने इस दावे पर सवाल उठाये हैं.

संघ के मुताबिक विभाग एक-सूत्री कार्यक्रम चला रहा है. किसी तरह मनरेगा सॉफ्ट में लेबर डिमांड बढ़ाने की बात की जा रही है. वास्तविक रूप में ऐसा हो नहीं रहा. मनरेगा का कार्य मनरेगाकर्मी ही कर सकते हैं. सरकार को जल्द से जल्द मनरेगा कर्मियों से वार्ता पूर्व की तरह सुगमता से इसे चलाना चाहिए.

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सोशल ऑडिट, एसएचजी औऱ जेएसएसपीएस की लगी है टीम

मजदूरों का डिमांड कलेक्ट करने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर टीमों को लगा रखा है. सोशल ऑडिट यूनिट के कर्मचारियों के अलावे राज्य के 35,000 एसएचजी (स्वयं सहायता समूह की दीदी), जेएसएलपीएस के कर्मचारियों की भी मदद ली जा रही है.

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पंचायतों पर दिया जा रहा प्रेशर

प्रदेश मुखिया संघ के सचिव अनूप कुमार ने एक बयान जारी कर कहा है कि मनरेगा कमिश्नर ने सोशल ऑडिटरों को मनरेगा में काम दिलाने का टास्क दिया है. वास्तव में यह एक भ्रामक बात है. ऐसे ऑडिटर गांवों में जाकर लोगों से केवल काम की डिमांड ले रहे हैं. ऐसे लोग जो मनरेगा में काम करने को इच्छुक ही नहीं हैं, उनसे भी डिमांड लिया जा रहा है.

इसी डिमांड के आधार पर मुखिया, पंचायत सचिव और मनरेगा से जुड़े पदाधिकारियों पर रोजगार दिये जाने का दबाव दिया जा रहा है. ऐसी स्थिति से बचने के लिये मनरेगा कर्मियों की हड़ताल को समाप्त करना जरूरी है. ऐसा नहीं किये जाने पर प्रदेश के मुखिया मनरेगा कर्मियों के संग हड़ताल में शामिल हो जायेंगे.

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