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प्रधानमंत्री जी, आपने “धर्म व जात” को लेकर बोलने में देर कर दी, आपके लोगों की नफरत कहीं दुनिया में अलग-थलग ना कर दे हमें

Surjit Singh

श्रीमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी. 20 अप्रैल को अखबारों में आपके लेख/संदेश का अंश पढ़ा. आपने लिखा हैः “कोरोना धर्म, जाति या नस्ल देख कर हमला नहीं करता.” आपने देशवासियों से अपील करते हुए लिखा है: “आपसी भाईचारे के साथ कोरोना महामारी से लड़ना है.”

पर, क्या आपको नहीं लगता आपने धर्म, जाति और नस्ल को लेकर बोलने में बहुत देर कर दी. देश के लोग अपील करते रहें, कोरोना को किसी खास समुदाय से ना जोड़ें, पर आप चुप रहें.

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तबलीगी जमात के लोगों का कोरोना से संबंध जुड़ने के बाद 28 मार्च से ही देश का एक बड़ा तबका देश के खास धर्म के लोगों के खिलाफ जहर उगल रहा है. टीवी पर, फेसबुक पर, ट्विटर पर, व्हाट्सएप पर, अखबारों में, न्यूज पोर्टल पर. सब जगह. आपके साथ सेल्फी लेने वाले टीवी चैनल के पत्रकार “कोरोना जिहाद” से लेकर “मानव बम” तक से जमातियों की तूलना करते रहे. पर आप चुप रहें.

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आपके कई सांसद, पार्टी के नेशनल व स्टेट लेवल के भाजपा प्रवक्ता उकसावे वाले बयान देते रहें. क्योंकि जहर उगलने वाले बयान और हर मुद्दे को धार्मिक रंग देने की उनकी खासियत ही उनके लिये पार्टी में तरक्की की सीढ़ी बन गई है.

आपने तब भी मुंह नहीं खोला जब भाजपा के सांसद तेजस्वी सूर्या ने खास धर्म को लेकर आपत्तिजनक बयान दिये. चार साल पहले इसी तेजस्वी सूर्या ने मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ शर्मशार करने वाला ट्वीट किया था. भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और फिर वह चुनाव जीत कर सांसद बन गये. यह आपकी पार्टी का खास धर्म से नफरत करने वालों के प्रति करीबी को दर्शाता है.

आपने अपना मुंह तब खोला जब अरब देशों के महत्वपूर्ण लोगों/हस्तियों ने भारत में मुस्लिमों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से चलाये रहे हेट अभियान की निंदा करनी शुरू कर दी. यह बताना शुरू कर दिया कि कुवैत में कुल 1658 में से 924 कोरोना पीड़ित भारतीय हैं. कुवैत की सरकार सभी भारतीयों का इलाज सम्मान पूर्वक प्रतिष्ठित अस्पतालों में करा रहा है.

भारत में जिस तरह एक खास तबके के द्वारा खास धर्म के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. खास धर्म के किसी एक व्यक्ति या एक समूह की गलती या आपराधिक कृत्य को समूचे धर्म से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है. किसी एक की गलती को पूरे समाज की गलती बताते हुए देश की सुरक्षा से जोड़ा जा रहा है.

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ऐसा करने वालों में प्रिंट, टीवी के बड़े पत्रकार, भाजपा के सांसद-विधायक, राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय नेता, कार्यकर्ता से लेकर सोशल मीडिया पर गंदगी फैलाने वाले स्टूडेंट, कार्यकर्ता, रिटायर्ड सरकारी सेवकों से लेकर बहुत सारे लोग शामिल हैं. क्या यह जायज है.

अब भी समय है. अगर समय रहते इन चीजों को नहीं रोका गया, तो कहीं ऐसा ना हो हम दुनिया में अलग-थलग पड़ जाये. दुनिया के दूसरे मुल्कों में रह रहे या काम कर रहे भारतीयों को भारत में रह रहे कथित राष्ट्रवादियों की हेट स्पीच की प्रतिक्रिया ना झेलनी पड़ जाये. उन्हें नौकरी, रोजगार से वंचित ना होना पड़ जाये. क्योंकि कट्टरपंथी ताकतें हर समाज, राज्य व देश में होती हैं.

अगर ऐसा होता है तो “आज का वक्त” भविष्य में हमारे लिये गाली के तौर पर इस्तेमाल होने लगेगा. जैसा कि “हिटलर” के दौर को जर्मनी व दुनिया के लोग याद करते हैं.

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