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आंदोलन के मूड में हैं एमपीडब्ल्यू, स्थायीकरण और सातवें वेतनमान की कर रहे मांग

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Ranchi : वेक्टर जनित रोग नियंत्रण समिति के बहुद्देश्यीय कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू) भी अब आंदोलन के मूड में हैं. ये कर्मचारी स्थायीकरण एवं मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं. एमपीडब्ल्यू कर्मचारी ने बताया कि वर्ष 2016 में 2210 चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य 06, लोक स्वास्थ्य 101, रोगों का निवारण तथा नियंत्रण 03, राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत आवंटन स्वीकृति दी गयी, जिसके बाद छह जून 2016 को मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र दिया गया था. इस दौरान भी स्थायीकरण एवं ग्रेड-पे की बात कही गयी थी, लेकिन हमें अंधेरे में रखकर हमारी नियुक्ति संविदा के आधार पर कर दी गयी और सिर्फ 15123 रुपये मानदेय दर्शाया गया. वर्तमान में सभी एमपीडब्ल्यू नियुक्ति पत्र के अनुसार संबंधित जिला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अपना योगदान दे रहे हैं. कर्मियों ने कहा कि लगता है अपने भविष्य को संवारने के लिए संघर्ष के रास्ते को अपनाना होगा.

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2014 में हटा दिये गये थे सभी एमपीडब्ल्यू

वर्ष 2014 में बगैर पूर्व नोटिस के सभी एमपीडब्ल्यू कर्मचारी को कार्यमुक्त कर दिया गया. वर्ष 2008 में इन कार्यकर्तओं की नियुक्ति की गयी थी, लेकिन लगातार सेवा देने के बाद भी वर्ष 2014 के अक्टूबर में इन कार्यकर्ताओं को बिना पूर्व सूचना एवं पत्र-व्यवहार के विभाग द्वारा कार्य से मुक्त कर दिया गया. नियुक्ति के समय नियुक्ति पत्र में स्पष्ट दर्शाया गया था कि सेवा संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर एक माह पूर्व सूचित कर सेवा समाप्त कर दी जायेगी, लेकिन इन नियमों को ताक पर रखकर सभी कर्मचारियों को हटा दिया गया. एमपीडब्ल्यू के कर्मचारियों ने बताया कि सेवा मुक्त होने पर उनकी परिवारिक, सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक परिस्थिति के खराब होने का दंश झेलना पड़ रहा है. बहुत सारे एमपीडब्ल्यू कर्मी डिप्रेशन में आकर अपना मानसिक संतुलन भी खो बैठे, कुछ का घर-परिवार बिखर गया है. तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री की ओर से आश्वासन मिला था कि उनकी सेवा अवधि विस्तारित की जा रही है, निश्चिंत रहें, आपको राज्य बजट में लाकर स्थायी किया जायेगा. लेकिन, उस आश्वासन का कुछ नहीं हुआ. अब एमपीडब्ल्यू कर्मचारियं ने आंदोलन का मूड बना लिया है.

एमपीडब्ल्यू की मुख्य मांगें

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  • झारखंड सरकार अंतर्गत अनियमित एमपीडब्ल्यू कर्मचारियों को नियमित किया जाये.
  • झारखंड सरकार अंतर्गत कर्मी का प्रत्येक वर्ष प्रशंसनीय स्वीकृति और बजट के नाम सेवा विस्तार एवं सेवा से मुक्त किये जाने का भय समाप्त कर एकमुश्त सेवा विस्तार कर सुरक्षा प्रदान की जाये.
  • कर्मियों को पीएफ की कटौती, दुर्घटना बीमा एवं ग्रुप बीमा का लाभ दिया जाये.
  • आकस्मिक मृत्यु होने पर इनके आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाये.
  • सातवें वेतनमान का लाभ, चिकित्सा भत्ता एवं महंगाई भत्ता का लाभ दिया जाये.
  • झारखंड में पूर्व में कार्यरत शेष एमपीडब्ल्यू कर्मी की नियुक्ति यथाशीघ्र की जाये.

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