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#MP_Political_Crisis: कांग्रेस छोड़ने वाले 22 विधायकों को स्पीकर का नोटिस, कमलनाथ और BJP ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा

Bhopal/Bengaluru: ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उनके समर्थक 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. जिससे एमपी की कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

वहीं कांग्रेस छोड़ने वाले सभी विधायकों को मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने नोटिस जारी किया है. शुक्रवार तक उन्हें स्पीकर के समक्ष पेश होने और यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है अथवा किसी के दबाव में.

इधर मध्य प्रदेश में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच सूबे के सीएम कमलनाथ ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है. वहीं बीजेपी ने भी गवर्नर से मिलने के लिए समय मांगा है.

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‘विधायकों ने दबाव में तो नहीं दिया इस्तीफा ?’

विधानसभा स्पीकर ने छह विधायकों को शुक्रवार, 7 विधायकों को शनिवार और बाकी बचे 9 विधायकों रविवार को उपस्थित होने को कहा है.

विधानसभा के प्रधान सचिव ए पी सिंह ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस से अलग हुए 22 विधायकों को शुक्रवार तक उनके समक्ष पेश होने और यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है अथवा किसी के दबाव में.

बता दें कि पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और विधायक बिसाहूलाल सिंह, ऐंदल सिंह कंषाना और मनोज चौधरी के इस्तीफे सौंपते हुए उसे मंजूर करने का अनुरोध किया है.

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अचरज जताया कि ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष से खुद मिलकर उन्हें अपना इस्तीफा क्यों नहीं सौंप रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह भी अजीब बात है कि कांग्रेस पार्टी के विधायकों के इस्तीफे भाजपा के विधायक भूपेन्द्र सिंह लेकर आते हैं.

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बीजेपी करेगी शक्ति परीक्षण की मांग

बहरहाल बड़ी संख्या में विधायकों के इस्तीफे से मध्यप्रदेश सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. इस बीच भाजपा ने कहा है कि वह 16 मार्च को विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने की मांग करेगी.

इस पर कांग्रेस का कहना है कि 22 विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय होने के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार शक्ति परीक्षण का सामना करने के लिए तैयार है.

विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि चूंकि सरकार अल्पमत में आ गई है इसलिए हम राज्यपाल से शक्ति परीक्षण कराने की मांग करेंगे.

फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफे पर हो फैसला- दिग्विजय

भाजपा की इस मांग के बारे में पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘जैसा कि कमलनाथ (मुख्यमंत्री) पहले ही कह चुके हैं कि हम शक्ति परीक्षण के लिए तैयार हैं, लेकिन शक्ति परीक्षण के पहले विधायकों के इस्तीफे पर निर्णय होना चाहिए.’

भाजपा पर कांग्रेस विधायकों को कब्जे में रखने का आरोप लगाते हुए सिंह ने कहा, ‘यह प्रजातांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. वह उन्हें छोड़ें. अगर स्पीकर साहब (विधानसभा अध्यक्ष) के सामने वे अपना पक्ष खुद रखते हैं, उसके बाद जो भी निर्णय होगा, उसे हम स्वीकार करेंगें.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘बात ये है कि इस्तीफे मंजूर कब होंगे. इस्तीफे तब मंजूर होंगे जब ये विधायक (विधानसभा) अध्यक्ष जी के सामने खुद बैठकर कहेंगे कि मेरे दस्तखत हैं. मुझ पर कोई दबाव नहीं है और जब तक इस्तीफों पर निर्णय नहीं होता है तब तक शक्ति परीक्षण कैसे हो?’

राज्यपाल के अभिभाषण के पहले विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने की भाजपा नेताओं की मांग पर सिंह ने कहा कि कांग्रेस के 19 विधायक उनके कब्जे में हैं. विधायकों के परिवार के लोग उनसे बात नहीं कर पा रहे हैं. फोन उनके ले लिए गए हैं.

गौरतलब है कि कांग्रेस के बागी विधायकों के त्यागपत्र से पहले प्रदेश कांग्रेस 114 विधायकों की संख्या के साथ कमजोर बहुमत पर खड़ी थी. राज्य में फिलहाल विधानसभा की कुल 228 सीटें हैं. कांग्रेस सरकार को चार निर्दलीय, बसपा के दो और सपा के एक विधायक का भी समर्थन हासिल है. प्रदेश विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 107 है.

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