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सांसद रामटहल चौधरी ने गांव गोद लेकर किया उसके साथ सौतेला व्यवहार, हहाप आदर्श गांव बनने से अब भी कोसों दूर

तमाम दावों और वादों के बीच एक दावा ऐसा भी था, जिसके मूल में किसी गांव को शहर जैसी सुविधाओं वाला कर देना था.

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Akshay/Pravin

Hahhap:  लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. 2014 के अच्छे दिन के वायदे को जनता अब परखेगी. अपने मत का इस्तेमाल करते हुए जनता अपना मत (पक्ष) रखेगी. सारे दावों और वादों का हिसाब होगा. तमाम दावों और वादों के बीच एक दावा ऐसा भी था, जिसके मूल में किसी गांव को शहर जैसी सुविधाओं वाला कर देना था. यह कोई योजना नहीं, बल्कि एक संकल्प था. संकल्प की शुरुआत खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी. उन्होंने यूपी में वाराणसी के जयनगर गांव को 11 अक्टूबर 2014 को गोद लिया. उनके गोद लेने के बाद से ही तमाम सांसदों ने भी गांव को आदर्श बनाने के मकसद से गोद लेना शुरू किया. न्यूज विंग की टीम उन गांवों का दौरा कर रही है. गोद लेने के बावजूद भी उन गांवों के साथ सौतेला व्यवहार हुआ या सच में गांवों को प्यार मिला. इसकी पड़ताल गांव जाकर की जा रही है. शुरुआत हो रही है, राजधानी रांची के सांसद के आदर्श गांव की. रांची के सांसद रामटहल चौधरी ने रांची शहर से करीब 20 किमी दूर हहाप गांव को गोद लिया था. क्या हहाप आदर्श गांव हो गया पढ़िए पूरी रिपोर्ट.

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सांसद आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य

मोदी सरकारी की तरफ से गांवों में विकास के लिए कुछ पैमाने बनाए गए. सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव की शिक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, जीवन यापन के बेहतर मौके, बिजली, पक्के घर, सड़क और बेहतर प्रशासन को दुरुस्त करना था.

सांसद का आदर्श गांव“हहाप…”

रांची के खरसी दाग के पास रिंग रोड पर करीब तीन किमी चलने के बाद दांयी ओर एक नयी सड़क मुड़ी है. एनएच पर एक बड़ा सा बोर्ड भी लगा है. बोर्ड पर हहाप जैसे छोटे से गांव का नाम और एनएच से दूरी चार किमी लिखी हुई है. चकाचक सड़क पर सरपट दौड़ते हुए आप हहाप की ओर जा सकते हैं. हहाप पहुंचने से एक किमी पहले चौड़ी काली सड़क पीसीसी पथ में बदल जाती है. गांव पहुंचने तक लगता है कि आप आदर्श गांव की ओर जा रहे हैं. लेकिन ज्यों ही आप गांव में दाखिल होते हैं. सबसे पहले एक बेकार पड़ा जल मीनार आपको मुंह चिढ़ाता है. वहां उतरने पर पास से गुजर रही महिला फुलमनी ने बताया कि महज तीन महीने ही इसका पानी लोगों ने इस्तेमाल किया. उसके बाद से यह खराब पड़ा हुआ है. उसने कहा कि मेरे घर में शादी का आयोजन है. पानी की घोर समस्या है. हमें गांव के बाहर के तालाब से पानी लाना पड़ रहा है.

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आगे बढ़ने पर एक नया-नवेला भवन खड़ा दिखता है. बोर्ड पर लिखा था स्वास्थ्य उपकेंद्र हहाप. लेकिन वहां मौजूद एक शख्स ने बताया कि एक साल से ज्यादा हो गए हैं. भवन तैयार रखा है. लेकिन उपकेंद्र का उद्घाटन नहीं हुआ. पास में ही पंचायत सचिवालय का भवन था. उसपर भी ताला जड़ा हुआ था. ताज्जुब तो इस बात से हुई कि उसी सचिवालय में बने डाकघर पर भी ताला जड़ा हुआ था.

(स्वास्थ्य उपकेंद्र के झोपड़ी की तस्वीर)
(स्वास्थ्य उपकेंद्र के नए भवन की तस्वीर)

थोड़ा आगे बढ़ने पर हम उस झोपड़े के पास पहुंचे. जहां नए भवन रहने के बावजूद स्वास्थ्य उपकेंद्र चलता है. यह अलग बात थी कि दिन के करीब 12 बजे भी उसके दरवाजे पर ताला जड़ा था. जिन्होंने उस झोपड़े को किराए पर दिया था. उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता कि स्वास्थ्य उपकेंद्र पर ताला क्यों जड़ा हुआ है. वो कहने लगे कि हमलोग तो कई बार बोल चुके हैं कि या तो किराया बढ़ाओ या फिर नए भवन में जाओ. लेकिन दोनों में से कोई काम नहीं हो रहा है. उनसे बात करने के बाद जब पास में बने सरकारी शौचालय का दरवाजा खोला तो शौचालय में कबाड़ भरा हुआ था. शायद ही उस शौचालय का इस्तेमाल किसी ने कभी किया था.

(हहाप के स्कूल की तस्वीर)

हहाप के राजकीय उत्क्रमित मध्यविद्यालय में कुल मिलाकर दो कमरे, दो टीचर और 60 से ज्यादा बच्चे मिले. दो में से एक शिक्षक परमानेंट थे और एक पारा शिक्षक थे. क्लास वन से लेकर कक्षा आठ तक के बच्चे दो कमरे में किसी तरह अपने-आप को कोचे हुए थे. मास्टर साहब क्लास वन से लेकर क्लास सिक्स तक के बच्चों को एक ही पढ़ाई पढ़ा रहे थे. यह समझ पाना किसी के लिए मुश्किल होता कि आखिर यहां पढ़ाया किस क्लास के बच्चे को जा रहा है.

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गांव के मुखिया ने सांसद को 10 में से एक भी नंबर नहीं दिया

गांव के विकास का हाल जानने के लिए गांव की महिला मुखिया अर्चना मुंडा से सवाल-जवाब के दौरान उन्होंने सांसद रामटहल चौधरी को 10 में से एक भी नंबर देने से मान कर दिया. उन्होंने कहा कि विकास का मतलब कम से कम बिजली, सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा होती है. लेकिन गांव में विकास के नाम पर सिर्फ सड़क पहुंची है. बिजली के नाम पर बिना काम करने वाले मीटर और बिजली के खंभे गाड़े गए. उन्होंने कहा कि बिजली तो पहले से ही थी. साथ ही कहा कि गांव में करीब 19 बोरिंग कराए गए. लेकिन उनमें से चार फेल हैं. जल मिनार बनाया गया. वो अब किसी काम का नहीं है. स्वास्थ्य केंद्र एक छोटे से झोपड़े में चल रहा है. पांच साल में एक नया भवन खड़ा तो हुआ. लेकिन उसमें स्वास्थ्य केंद्र शिफ्ट नहीं हो पाया है. बताया गया था कि एक फरवरी को हैंडओवर कर दिया जाएगा. लेकिन नहीं हुआ. स्कूल दो कमरे में चल रहा है. इन पांच सालों में सांसद ने गांव का दौरा महज चार या पांच बार किया होगा. लेकिन मुझसे एक बार भी नहीं मिले.

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फर्जी निकला आदर्श गांव बनाने का दावा

हहाप के दौरे के बाद यह कहा जा सकता है कि आदर्श गांव बनाने का दावा जो पांच साल पहले सांसद रामटहल चौधरी ने किया था, वो पूरी तरह से झूठा साबित हुआ. मोदी सरकार की तरफ से आदर्श गांव की संज्ञा उस गांव को दी गयी थी, जहां शिक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास, जीवन यापन के बेहतर मौके, बिजली, पक्के घर, सड़क और बेहतर प्रशासन होता. लेकिन यहां इनमें से एक चीज भी दिखायी नहीं दी. जीवन यापन का बेहतर मौका कितना मिल रहा है, वो इस बात से समझा जा सकता है कि कुछ दिनों पहले सीआरपीएफ ने गांव के पास अफीम की खेती नष्ट की थी. मंगलवार को पुलिस ने हहाप के गांव के पास से अवैध शराब बनाने का बड़ा प्लांट ध्वस्त किया था. कौशल विकास की परछायी दूर-दूर तक गांव में नहीं दिखी और गांव में दो सरकारी भवन को छोड़कर शायद ही कोई पक्के का मकान था. एक सड़क ठीक थी. लेकिन उससे अभी भी हहाप में बेरोजगारी और कुव्यवस्था ही पहुंचा करती है.

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