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DVC मामले में सांसद पोद्दार का ट्वीट, संचित निधि से हो सकती है कटौती, समस्या की जड़ है JBVNL

  • उन्होंने कहा, लोग अभी से सक्रिय हों ताकि अप्रिय स्थिति टले

Ranchi: “डीवीसी के बकाया भुगतान के मामले में केंद्र सरकार फिर से कटौती कर सकती है. कटौती राज्य के संचित निधि से किये जाने की संभावना है. ऐसे में राज्य के सामने फिर से संकट उत्पन्न हो सकता है. लोग अभी से सक्रिय हों ताकि अप्रिय स्थिति टले. समस्या की जड़ जेबीवीएनएल चुप है. ये कहना है सांसद महेश पोद्दार का.”

सांसद ने न्यूज विंग की खबर पर ट्वीट किया है. “अभी भी अटका है डीवीसी के बकाया का मामला, कहीं फिर ना हो जाये सात जिलों में बिजली गुल” शीर्षक से लगी खबर में डीवीसी के मामले में केंद्र के हस्तक्षेप के बावजूद जेबीवीएनएल की ओर से बकाया भुगतान नहीं करने का जिक्र किया गया है.

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लोन की फाइल दबायी गयी

ट्वीट करते हुए सांसद ने कहा कि पिछली बार केंद्र सरकार ने डीवीसी को भुगतान के लिए 1410 करोड़ रुपये राज्य मद से काटे, जिसके बाद राज्य में हंगामा बरपा. सांसद की ओर से केंद्रीय बिजली मंत्री राज सिंह को पत्र लिखा गया. उन्होंने लिखा कि पत्र लिखने के बाद जवाब सामने है.

जेबीवीएनएल को टैग करते हुए लिखा है कि इस मामले में जेबीवीएनएल ने आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत लोन लेकर बकाया चुकाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन फाइल दबा दी गयी. और आखिरकार केंद्र ने मामले में हस्तक्षेप किया.

5600 करोड़ लोन लेने की थी योजना

जुलाई महीने में डीवीसी ने जेबीवीएनएल से बकाया भुगतान की मांग की, जिसके बाद जेबीवीएनएल ने बैठक की और आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत 5600 करोड़ लोन लेने की सहमति बनी. अगस्त में जेबीवीएनएल ने यह प्रस्ताव उर्जा विभाग को भेजा. उर्जा विभाग की ओर से इसमें देर की गयी और अक्टूबर में यह प्रस्ताव वित्त विभाग को दिया गया.

हालांकि वित्त विभाग की ओर से जेबीवीएनएल 1800 करोड़ लोन की स्वीकृति जेबीवीएनएल को दी गयी. लेकिन मामला विभागों में रहा और अंततः केंद्र ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए 1410 करोड़ रुपये की कटौती कर ली.

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4260 करोड़ अब भी है बकाया

उर्जा विभाग की मानें तो डीवीसी का कुल बकाया जुलाई तक 5670 करोड़ था,जिसमें केंद्र ने 1410 करोड़ की कटौती की. अब भी 4260 करोड़ बकाया है, जो केंद्र सरकार की ओर से कटौती की जायेगी. जबकि जुलाई के बाद से जेबीवीएनएल को हर महीने ससमय डीवीसी को बकाया भुगतान करना था.

बता दें कि डीवीसी सात जिलों में बिजली आपूर्ति करती है, जो देवघर, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, कोडरमा और चतरा है. फरवरी में भुगतान लंबित होने के कारण डीवीसी ने दो सप्ताह तक सात जिलों में 18 घंटे तक लोड शेडिंग की थी.

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