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MP महेश पोद्दार का CM हेमंत सोरेन को पत्रः व्यवसायी हर सहयोग को तैयार, अफसर उन्हें डराये नहीं उनसे बात करें, विश्वास में लें

Ranchi: राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र लिखा है. उन्होंने कहा है कि कोरोना संकट पर विजय पाने की सरकारी पहल, प्रयास व संघर्ष में पूरा राज्य आपके साथ है.

मैं निजी रुप से और संस्थागत रुप से आपके सहयोग में लगा हूं. झारखंड सरकार भी इसमें पीछे नहीं है. यह संतोष का विषय है.

महेश पोद्दार ने हेमंत सोरेन को व्यवसायी वर्ग की चिंता से अवगत कराते हुए कहा है कि उपभोक्ता वस्तुओं व खाद्य सामग्रियों की सप्लाई से जुड़े उद्यमी, थोक व खुदरा विक्रेता व किराना व्यापारी आदि अनावश्यक प्रशासनिक सख्ती से भयभीत और असहज हैं.

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लॉकडाउन की अवधि 21 दिन की है. जनता को आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं व खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. व्यवसायी वर्ग भी सरकार के साथ हर सहयोग करने को तैयार हैं.

पर बेवजह प्रशासनिक सख्ती की घटनाओं से सप्लाई चेन टूटने का खतरा है. अगर ऐसा हुआ तो लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो जायेगा.

इसलिये जरूरी है कि आपके स्तर से प्रशासनिक अफसरों को यह निर्देश दिया जाये कि बेवजह की सख्ती ना करें. आप खुद व्यवसायियों से बात करें और अफसरों से कहें सहयोग की भावना रखे. ताकि उनके बीच फैला डर, भय व असहजता की स्थिति खत्म हो सके. कोरोना से जंग में सफल होने के लिये यह बहुत ही आवश्यक है.

ऐसा नहीं होने पर साफ-सुथरा कारोबार करने वाले व्यापारी मौजूदा स्टॉक को क्लियर करने के बाद हाथ खड़े कर सकते हैं. यह स्थिति राज्य की जनता और सरकार के लिये बेहतर स्थिति नहीं होगी.

ऐसी सूचनाएं भी मिल रही है कि इंटरस्टेट ट्रांसपोर्टिंग में बॉर्डर पर भी कुछ व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है. ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाये कि बॉर्डर पर तैनात प्रशासनिक अधिकारी GST दस्तावेज, ई वे बिल आदि से सत्यापन कर सकते हैं, अनावश्यक कंटेनर/ट्रक के सील होने की वजह से आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं का परिवहन कर रहे लोगों को परेशान करना ठीक नहीं.

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केंद्र सरकार ने इस दिशा में तत्परता दिखाते हुए सभी टोल गेट फिलहाल मुक्त कर दिए हैं, राज्य सरकार को भी फिलहाल इन मामलों में आवश्यक रियायत देनी चाहिए.

जानकारी मिली है कि रांची के पंडरा स्थित बाजार समिति प्रांगन में दूकान के सामने भीड़ होने की वजह से एक व्यापारी को फाइन कर दिया गया. आप भी सहमत होंगे कि भीड़ को नियंत्रित करना व्यापारी के वश की बात नहीं.

यह जिम्मेवारी प्रशासन की होनी चाहिए. अगर ऐसी कार्रवाई से दुखी होकर व्यापारी घर बैठ गए तो इस विषम परिस्थिति में आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति चरमरा सकती है.

फिलहाल शहर में कई संस्थाएं गरीबों,  मजदूरों,  लाचारों को भोजन एवं अन्य जरुरी चीजें निःशुल्क उपलब्ध करा रही हैं.  इनमें से न्यूनतम 15– 20 ऐसी संस्थाएं हैं जिनका संचालन या वित्त पोषण व्यापारियों द्वारा किया जा रहा है.  इस बात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

पुलिस, सरकारी कर्मचारियों, चिकित्सकों, हेल्थ वर्कर्स, पत्रकारों आदि की तरह व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वास्थ्य की चिंता किये बगैर लोगों को आवश्यक उपभोक्ता वस्तुये मुहैया करा रहे इन व्यापारियों की भी तारीफ़ होनी चाहिए. इनके लिए भी दो शब्द कहे जाने चाहिए.

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