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सांसद महेश पोद्दार ने की ट्रेड लाइसेंस को सरल बनाने की मांग

  • कहा- पीएम स्व निधि योजना का मिलेगा सबों को लाभ

Ranchi: सांसद महेश पोद्दार ने ट्रेड लाइसेंस से संबंधित प्रावधानों को सरल किये जाने की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर, नगर आयुक्त, नगर विकास विभाग के सचिव और झारखंड चैंबर को एक लेटर भी लिखा है.

इसके मुताबिक रांची नगर निगम, फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के सहयोग से ट्रेड लाइसेंस के लिए रांची में शिविर आयोजित कर रहा है. इसमें ट्रेड लाइसेंस के लिए जमीन,मकान,दुकान के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजों सहित कई अन्य दस्तावेजों की मांग की गयी है. इससे लाइसेंस से संबंधित प्रक्रियाओं को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया जा रहा है.

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योजना का लाभ लेने में परेशानी

सांसद के अनुसार फेरीवालों, ठेलेवालों, खोमचेवालों, रेहड़ी-पटरी वालों, स्ट्रीट वेंडर्स को तात्कालिक रूप से राहत देने के लिए पीएम मोदी की पहल पर प्रधानमंत्री स्व निधि योजना शुरू की गयी है. कोरोना संकट झेल रहे लोगों के लिये यह एक राहत है.

इसके तहत उनके लिए बगैर गारंटी के कम ब्याज दर और आसान किस्तों पर 10 हजार रुपये के लोन का प्रावधान है. कई ऐसे अत्यंत छोटे कारोबारी हैं जिनके पास दुकान के स्वामित्व या लीज के दस्तावेज संभव नहीं हैं. हालांकि ट्रेड लाइसेंस उनके लिए भी जरूरी है.

इसी तरह ऐसे हज़ारों दुकानदार रांची में होंगे जो पैतृक मकानों में अपना कारोबार चला रहे हैं पर उनके पास किसी कारण से पुख्ता दस्तावेज नहीं हैं. केवल अपर बाज़ार में ही ऐसे सैकड़ों उदाहरण होंगे. ट्रेड लाइसेंस के जरिये नगर निकाय को यह पता रहता है कि उसके एरिया में कितने और किस प्रकार के कारोबार हो रहे हैं.

एक दूसरा पहलू राजस्व संग्रहण का भी है. हालांकि वे नहीं मानते कि जमीन,मकान,दुकान के पक्के दस्तावेजों के बिना नगर निकायों को अपने इन दोनों उद्देश्यों को पूरा करने में कोई दिक्कत आती है.

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इज़ ऑफ डूइंग को करें प्रमोट

रांची नगर निगम के मुताबिक कई सारे प्रावधान राज्य सरकार तय करती है. झारखंड देश के उन चुनिंदा राज्यों में है जहां 74वें संविधान संशोधन के तहत सारी शक्तियां नगर निकायों को हस्तांतरित कर दी गई हैं. यदि इसके बावजूद राज्य सरकार का प्रशासनिक तंत्र नगर निकायों के अधिकारों का हनन कर रहा है तो नगर निकायों सामने आना होगा.

प्रधानमंत्री हर क्षेत्र में इज़ ऑफ डूइंग के पक्षधर हैं. शपथ पत्र में स्व अभिव्यक्ति को मान्यता दी गई है. अतः जरूरी है कि ट्रेड लाइसेंस से संबंधित प्रावधानों को सरल बनाया जाये.

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