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एमपी सरकार ने बॉर्डर पर रोकी सूरत से गिरिडीह आने वाली बस, फंसे 45 प्रवासी मजदूर, सीएम से मदद की गुहार

Ranchi: गुजरात के सूरत शहर से झारखंड के गिरिडीह आ रहे 45 झारखंडी मजदूरों को गुजरात और मध्यप्रदेश (एमपी) के बॉर्डर जिले झाबुआ में रोक दिया गया है. झारखंडी मजदूरों को रोके जाने के कारण को लेकर झाबुआ जिला प्रशासन का कहना है कि जबतक गुजरात सरकार उन्हें परमिशन नहीं देती है, तो उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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जबकि हकीकत यह है कि सूरत जिला प्रशासन ने सभी झारखंडी मजदूरों को गिरिडीह जिला जाने की अनुमति दे दी है. ऐसे में परेशान इन मजदूरों ने न्यूज विंग से संपर्क किया है. और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मदद की गुहार लगायी है.

सीएम हेमंत सोरेन से मदद की गुहार

झाबुआ में फंसे इन 45 मजदूरों में से एक विनोद कुमार वर्मा ने न्यूज विंग को फोन कर अपनी पीड़ा साझा की है. इन्होंने बताया है कि सूरत से सभी 45 मजदूर गिरिडीह के लिए 3 मई यानि रविवार को चले थे. गुजरात के किसी भी जिले में तो उन्हें किसी तरह की कोई परेशान नहीं हुई.

लेकिन जैसे ही उनकी बस दोनों राज्यों के बॉर्डर स्थित झाबुआ जिले पहुंची, स्थानीय जिला प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. जिसके कारण ये लोग झाबुआ में फंसे हुए हैं.

सूरत जिला प्रशासन द्वारा जारी परमिट

जब उनसे पूछा गया कि उन्हें किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. तो विनोद कुमार ने बताया कि खाने-पीने की कुछ व्यवस्था तो झाबुआ प्रशासन ने की है. लेकिन उन्हें यहां कब तक खड़ा रहना पड़ेगा, इसकी जानकारी कोई नहीं दे रहा है. सभी मजूदरों ने एकसाथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मदद की गुहार लगाकर कहा है कि करीब डेढ़ माह के लॉकडाउन में उन्हें काफी परेशान झेलनी पड़ी है. ऐसे में अब उन्हें केवल उनसे ही उम्मीद है.

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झारखंड से बंगाल गयी बसों को भी रोकने की बात आयी थी सामने

बता दें कि इससे पहले झारखंड के कुछ जिलों से बंगाल जाने वाली बसों को भी बंगाल सरकार द्वारा रोकी जाने की बात सामने आयी थी. वहीं लॉकडाउन में फंसे कई मजदूरों को झारखंड वापस लाया गया है. पिछले शुक्रवार को तेलंगाना सरकार ने झारखंड के 1250 मजदूरों और राजस्थान सरकार ने कोटा में पढ़ाई कर रहे करीब 1000 छात्रों को ट्रेन से वापस भेजा था.

वहीं बंगाल सरकार ने शनिवार को प्रवासी भारतीयों को लाने के लिए झारखंड के 16 बसें, समेत 23 वाहनों को घुसने नहीं दिया था. इसमें 30 बसे वैसे भी शामिल है जिनमें मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा जिले के 92 लोग सवार थे. गिरिडीह से भेजी गयी 10 बसों समेत 10 वाहनों को धनबाद के मैथन में बंगाल सीमा के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया था. वहीं जामताड़ा से भी भेजी गयी बसों को बंगाल बॉर्डर में प्रवेश करने से रोक दिया था.

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