JharkhandPalamu

माओवादी से लेकर पुलिस अधिकारी तक बने सांसद, फिर भी विकास के लिए तरस रहा इलाका

विज्ञापन

Dilip Kumar

Palamu : देश की आजादी के 70 साल से ज्यादा समय बीत चुके हैं. 17वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव हो रहा है. इतना लंबा समय किसी भी इलाके के सर्वांगीण विकास के लिए बहुत ज्यादा होता है. लेकिन 13वीं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पलामू आज भी विकास की मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है.

जनसरोकार की समस्याएं सिंचाई, पेयजल, रोजगार, आधारभूत संरचना, बिजली, सड़क मुंह बांये खड़ी हैं. ऐसे मामले हर बार के लोकसभा चुनाव में मुद्दे बनते हैं. उम्मीदवार इन मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ता है, लेकिन निर्वाचित होते ही तमाम घोषणाएं धरी की धरी रह जाती हैं. जैसे-तैसे पांच वर्ष गुजर जाते हैं. पुनः इसी तरह की रणनीति बनाकर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरते हैं और फिर निर्वाचित होते हैं. यह सिलसिला इसी तरह से चलता आ रहा है.

इसे भी पढ़ें – गांव के लोक मुहावरे और कहानियों से लोगों को परिचित करा रही हैं ज्योति

टॉप माओवादी और पुलिस अधिकारी रह चुके हैं सांसद

पलामू संसदीय सीट से अबतक 15 सांसद निर्वाचित हो चुके हैं. इनमें टॉप माओवादी नक्सली कामेश्वर बैठा और झारखंड में डीजीपी रहे विष्णु दयाल राम ने इस इलाके का प्रतिनिधित्व किया है. कामेश्वर बैठा के नक्सली बनने के पीछे सामाजिक, आर्थिक सहित अन्य कारण रहे हैं.

नक्सल कमांडर रहते हुए कामेश्वर बैठा ने नजदीक से गरीबी देखी, लेकिन जब वे सांसद बने तो उन्होंने गरीबी और पिछड़ेपन को दूर करने में कोई ठोस पहल नहीं की. पुलिस सेवा में रहकर अक्सर लोग ग्राउंड जीरो से स्थितियों को देखते हैं. साथ ही पढ़े-लिखे होने के कारण उनमें सोचने-समझने की क्षमता औरों से ज्यादा होती है. लेकिन एक्स डीजीपी वीडी राम के सांसद बनने के बाद भी पलामू संसदीय क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया.

इसे भी पढ़ें – सिंहभूम सीटः भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ ने किया नामांकन, रघुवर दास और मंगल पांडेय रहे मौजूद

सिंचाई के लिए किसी सांसद ने नहीं की ठोस पहल

प्रकृति के समय पर साथ नहीं देने के कारण पलामू संसदीय क्षेत्र में हमेशा सुखाड़ और अकाल की काली छायी मंडराती रहती है. संसदीय क्षेत्र के पलामू और गढ़वा जिले में हर दो साल पर सुखाड़ की स्थिति बनती है. संसदीय क्षेत्र के दोनों जिले केंद्र सरकार के आकांक्षी जिलों की सूची में हैं. सिंचाई का कोई ठोस प्रबंध नहीं रहने के कारण फसलें मारी जाती हैं. ऐसा नहीं है कि इस क्षेत्र में नदियां नहीं हैं.

कोयल, अमानत, सदाबह, तलहे, कनहर सहित अन्य छोटी बड़ी सहायक नदियां इन क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं. बरसात के दिनों में सारा पानी इन नदियों से होकर बह जाता है. अमानत के अलावा अन्य नदियों पर बराज या फिर डैम बनकर तैयार है. लेकिन कोई भी परियोजना कारगर नहीं है, जो खेतों को पानी दे सके.

1967 से रिजर्व है पलामू संसदीय सीट

अनुसूचित जाति बाहुल्य इलाका होने के कारण पलामू संसदीय सीट 1967 से रिजर्व है. इस इलाके का प्रतिनिधित्व करने वाले कई सांसद आज लखपति हैं. जोरावर राम पलामू के पूर्व सांसद रहे हैं. उनकी वर्तमान में संपति दो करोड़ से ज्यादा है. साल 2007 में पलामू के तत्कालीन सांसद मनोज कुमार नोटकांड के स्टिंग में पकड़े गए थे. 2009 में पलामू से टॉप माओवादी कामेश्वर बैठा ने झारखंड मुक्ति के टिकट पर चुनाव जीते थे. जबकि 2014 में झारखंड के पूर्व डीजीपी विष्णु दयाल राम सांसद रहे.

रोजगार के कोई साधन नहीं

पलामू और गढ़वा के सीमावर्ती रेहला में एक मात्र ग्रासीम इंडस्ट्रीज संचालित है. यहां सीमित मात्रा में ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिल पाता है. पंडवा में कोल माइंस हैं. वहीं भी मजदूर रोजगार और ग्रामीण सुविधाओं के लिए हमेशा कंपनी से भिड़ते रहते हैं. रोजगार की इस इलाके में बड़ी समस्या है.

यहां के युवा हर महीने कमाने के लिए बाहर के प्रदेशों में पलायन करते हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में एक दर्जन से ज्यादा पिकेट की स्थापना के बाद विकास की उम्मीद जगी है. पुल-पुलिया और सड़क बनी है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जितनी विकास होने की उम्मीद थी, वह नहीं हो पाई है.

इसे भी पढ़ें – शिक्षा व्यवस्था चौपट! कला संकाय के छह विषयों में 3 लाख 27 हजार छात्र, शिक्षक एक भी नहीं

गर्मी में मचता है पेयजल के लिए हाहाकार

इस वर्ष के निकाय चुनाव में मेदिनीनगर को नगर पर्षद से नगर निगम बना दिया गया है. जिले के छत्तरपुर, विश्रामपुर और हुसैनाबाद नगर पंचायत क्षेत्र हैं. गढ़वा में नगरीय शासन व्यवस्था है. इसी तरह नगर उंटारी को भी नगर पंचायत बनाया गया है.

देखने और सुनने में तो पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर और गढ़वा जिले में नगर प्रशासन काम कर रहा है. बता दें कि करीब 33 लाख जनसंख्या वाला यह क्षेत्र पेयजल की संकट से हमेशा जूझता रहा है. गर्मी के दौरान कई शहरी क्षेत्र ड्राई जोन हो जाते हैं.

पेयजल के लिए हाहाकार मच जाता है. मेदिनीनगर नगर क्षेत्र में जहां टैंकर से जलापूर्ति की जाती है. हालांकि मेदिनीनगर में वर्षों पुरानी फेज वन जलापूर्ति व्यवस्था है, जिससे आधे शहर को पानी देना भी मुश्किल हो जाता है. फेज टू जलापूर्ति योजना शिलान्यास के बाद मामूली ढांचे को खड़ाकर कई महीने से बंद पड़ी है.

इसे भी पढ़ें – अटल वेंडर मार्केट : पार्षदों ने कहा हुई है गड़बड़ी, निगम आयुक्त ने सवालों का नहीं दिया जवाब, डिप्टी…

2019 के चुनाव में कौन-कौन हैं उम्मीदवार

2019 के चुनाव में वर्तमान सांसद वीडी राम जहां बीजेपी से उम्मीदवार हैं, वहीं राजद की ओर से घुरन राम उम्मीदवार बनाए गए हैं. बसपा से पूर्व मंत्री दुलाल भुइयां की पत्नी अंजना भुइयां और भाकपा माले से सुषमा मेहता सहित कुल 19 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं.

पलामू में कब कौन रहा सांसद

वर्ष     सांसद

1957 गजेन्द्र प्र. सिन्हा

1962 शशांक मंजरी

1967 कमला कुमारी

1971 कमला कुमारी

1977 रामदेनी राम

1980 कमला कुमारी

1984 कमला कुमारी

1989 जोरावर राम

1991 रामदेव राम

1996 ब्रजमोहन राम

1998 ब्रजमोहन राम

1999 ब्रजमोहन राम

2004 मनोज कुमार

2009 कामेश्वर बैठा

2014 वीडी राम

इसे भी पढ़ें – गैर सेवा से IAS बनने में एक साल की देरी, 2018 के रिक्त पदों के लिए बढ़ी तिथि

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: