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सांसद आदर्श ग्राम योजना: गांवों को गोद तो ले रहे राज्यसभा सांसद, लेकिन मंत्रालय को नहीं दी जा रही रिपोर्ट

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Ranchi: सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को गांव को गोद लेना है. योजना केंद्र प्रायोजित है. जिसे साल 2014 में शुरू किया गया.

हालांकि झारखंड में साल 2016 और 2018 में राज्यसभा के लिए नये सांसद बनें. लेकिन अगर गांव गोद लेने और विकास कार्यों की बात करें, तो जो सांसद पूर्व से कार्यरत है उन्होंने भी तत्परता नहीं दिखायी.

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ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट से इसकी जानकारी होती है. रिपोर्ट की मानें तो राज्य के छह राज्यसभा सांसदों में से पांच ने ही तीसरे चरण में गांव गोद लिये. वहीं सांसद महेश पोद्दार ने इस चरण में दो-दो गांवों को गोद लिया.

जबकि साल 2018 में सांसद बनें धीरज प्रसाद साहू भी फिर से सांसद बनाये गये, लेकिन उन्होंने भी तीसरे चरण में गांव गोद नहीं लिया. पांच में से तीन सांसदों द्वारा गोद लिये गांव और उनके विकास कार्यों का विवरण ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में है.

इसमें भी वर्तमान में प्रदीप बलमुचू सांसद नहीं है. बता दें गोद लिये गांवों के विकास के लिये विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार किया जाता है. जिसे गांवों के विकास का मानक कहा जाता है.

तीसरे चरण में प्रदीप बलमुचू ने काम ही शुरू नहीं किया

पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप बलमुचू ने साल 2017 तक चलाये गये, सभी तीन चरणों में ग्राम पंचायत को गोद लिया. साल 2015 में सांसद ने पहले फेज में पूर्वी सिंहभूम के भल्की गांव को गोद लिया.

ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में पूर्व सांसद ने पहले चरण का विकास विवरण नहीं दिया गया है.  वहीं दूसरे चरण में मोहलीशोले ग्राम पंचायत को गोद लिया. इसमें गांव के विकास के लिये 83 विलेज डेवलपमेंट प्लान तय किये गये. जिसमें मात्र तीन ही पूरे हुए. जबकि मंत्रालय को रिपोर्ट दिये जाने तक एक ही प्लान जारी था.

फेज तीन में साल 2017 में सांसद ने काठीमारी ग्राम पंचायत को गोद लिया. इसके बाद इसी साल जुलाई में सांसद का कार्यकाल पूरा हुआ. लेकिन इस गांव के विकास के लिये एक भी विलेज डेवलपमेंट प्लान तय नहीं किया गया.

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दोबारा सांसद बनने के बाद धीरज ने गोद नहीं ली पंचायत

पहले फेज के तहत सांसद धीरज प्रसाद साहु ने पलामू के पांकी प्रखंड के केकरा पंचायत को साल 2015 में गोद लिया. मंत्रालय की रिपोर्ट में सांसद के इसी गांव के विकास का विवरण है.

सांसद ने इसके लिये 274 विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार किये. लेकिन इसमें से मात्र 28 प्लान ही पूरे हुए. जबकि 34 पर रिपोर्ट जारी होने तक काम हो रहा था. जबकि बाकी के प्लान की कोई जानकारी नहीं दी गयी.

दूसरे चरण में सांसद ने गुमला के घाघरा प्रखंड के बीमारला गांव को गोद लिया. लेकिन रिपोर्ट में इस गांव में किये गये विकास कार्यों का जिक्र नहीं है. साल 2017 में ही सांसद का कार्यकाल पूरा हुआ.

धीरज कुमार साहू साल 2018 में फिर से कांग्रेस से सांसद बनाये गये. जिनका कार्यकाल 2024 में पूरा होगा. लेकिन सांसद ने अब तक कोई पंचायत गोद नहीं ली है.

महेश पोद्दार ने तीसरे में फेज दो पंचायत को गोद लिया

सांसद महेश पोद्दार साल 2016 में सांसद बनें. 2022 में इनका कार्यकाल पूरा होगा. ऐसे में पहले फेज, जो साल 2014-15 के लिये था. इसमें इन्होंने फेज दो के तहत महिलौंग पंचायत को गोद लिया. इसके लिए सांसद ने 81 विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयारी किया गया. इसमें 19 पूरे हुए और चार प्लान पर अब भी काम चालू है. बाकी प्लान पर काम नहीं हुआ.

बता दें तीसरे चरण के दौरान सांसद ने दो-दो गांव को गोद लिया. इसमें धनबाद का करमाटाड़ गांव, जिसे 2018 में गोद लिया गया. और साल 2017 में इसी फेज के तहत रांची के रातु प्रखंड के बजपूर गांव को गोद लिया. हालांकि सांसद के तीसरे चरण में गोद लिये गांवों के विकास कार्यों का विवरण मंत्रालय की रिपोर्ट में नही है.

इन सांसदों के विकास कार्यों का जिक्र मंत्रालय की रिपोर्ट में नहीं

मुख्तार अब्बास नकवी, जो साल 2016 में राज्यसभा सांसद बनें. इन्होंने फेज दो में कोई गांव गोद नहीं लिया. तीसरे चरण में सांसद ने नामकुम के लाली गांव को गोद लिया. लेकिन रिपोर्ट मंत्रालय को नहीं दी गयी. चौथे फेज के लिये सांसद ने जयनगर गांव को गोद लिया है. कार्य चालू है.

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2018 में सासंद बनें समीर उरांव ने 2019 में तीसरे चरण के दौरान गुमला के सिलाफरी गांव को गोद लिया. परिमल नाथवाणी साल 2014 में सांसद बनें. पहले चरण के दौरान इन्होंने बराम गांव को गोद लिया. दूसरे चरण में कांके के चटटू गांव को गोद लिया. वहीं तीसरे चरण में अनगढ़ा प्रखंड के बरवादाग गांव को गोद लिया.

प्रेमचंद गुप्ता ने पहले फेज में कोडरमा के मरकच्चो प्रखंड के चोपनाडीह गांव को गोद लिया. दूसरे फेज में पलामू के कसवाखर गांव को गोद लिया. इसके बाद सांसद का कार्यकाल समाप्त हुआ. सांसद संजीव कुमार ने पहले फेज में धनबाद के टुंडी गांव को साल 2015 में गोद लिया.

दूसरे फेज में गुरीडीह गांव को 2018 में गोद लिया. इसके बाद सांसद का कार्यकाल साल 2018 में खत्म हुआ. लेकिन विकास कार्यों की रिपोर्ट मंत्रालय को नहीं दी गयी.

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